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‘डेजर्ट सोल’ में अमित गोस्वामी के साथ यादगार संध्या

 

RNE Network.

“साज़ की ख़ामोशी में भी अल्फ़ाज़ की धड़कन सुनाई देती है,जब दिल सच में बोलता है, तो शायरी अपने आप हो जाती है।”

शनिवार को राजस्थान फोरम ने आईटीसी राजपूताना के सहयोग से “डेजर्ट सोल” श्रृंखला के अंतर्गत संगीत और शायरी की दुनिया के विशिष्ट रचनाकार अमित गोस्वामी के साथ एक विशेष संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर शहर की सांस्कृतिक और साहित्यिक बिरादरी के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और संगीत, शायरी तथा संवेदना से भरी एक सजीव संध्या का हिस्सा बने।

कार्यक्रम की शुरुआत राजस्थान फोरम की कार्यकारी सचिव अपरा कुच्छल के उद्घाटन वक्तव्य से हुई। उन्होंने डेजर्ट सोल की परंपरा और इसके माध्यम से कला, साहित्य और संस्कृति के विविध आयामों को सामने लाने के प्रयासों पर प्रकाश डाला।

इसके बाद रुचि भार्गव ने अमित गोस्वामी के साथ संवाद के माध्यम से उनके रचनात्मक जीवन, संगीत और शायरी के बीच के गहरे संबंध तथा उनकी कलात्मक यात्रा के विभिन्न अनुभवों पर चर्चा की। अमित गोस्वामी ने साझा किया कि उनके लिए संगीत और शायरी दो अलग-अलग माध्यम नहीं, बल्कि एक ही संवेदना की दो अभिव्यक्तियाँ हैं, जहाँ सुर और शब्द मिलकर भावनाओं को नया आयाम देते हैं।

संवाद के दौरान उनकी रचनात्मक प्रक्रिया, संगीत साधना और शायरी की भावभूमि पर भी रोचक चर्चा हुई, जिसने उपस्थित श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया। कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र हुआ, जो अपने आप में एक अनोखा अनुभव बन गया। श्रोताओं के सवालों के जवाब देते हुए अमित गोस्वामी ने कई शेर सुनाए और यह सत्र एक तरह के “शायरी संवाद” में बदल गया, जहाँ हर प्रश्न के साथ एक नया शेर और नई संवेदना सामने आती रही।

कार्यक्रम के अंत में पद्मश्री तिलक गीताई, पद्मश्री अली मोहम्मद, पद्मश्री गनी मोहम्मद और संजय कौशिक ने अमित गोस्वामी और रुचि भार्गव को स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया। संध्या का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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