नन्ही उम्र में बड़ा कारनामा- मोहम्मद यज़दान आरिफ़ का रोज़े, तरावीह और मुकम्मल कुरआन पढ़ने पर सम्मान
RNE Bikaner.
महज़ दस वर्षीय बालक मोहम्मद यज़दान आरिफ़ ने अपनी लगन, अनुशासन और आध्यात्मिक समर्पण से एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है। इन्होंने पूरे रमज़ान माह में रोज़े रखे, नियमित रूप से तरावीह अदा की तथा इस दौरान मुकम्मल कुरआन शरीफ़ का अध्ययन पूर्ण किया। इस उल्लेखनीय उपलब्धि के उपलक्ष्य में सोशल प्रोग्रेसिव सोसाइटी द्वारा उन्हें शॉल, श्रीफल, अंगवस्त्र एवं साहित्य भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर शिक्षिका तसनीम बानो, सोसाइटी के अध्यक्ष नदीम अहमद नदीम, इमरोज़ नदीम तथा अरमान नदीम उपस्थित रहे और बालक यज़दान की लगन एवं समर्पण की सराहना की।
शिक्षिका तसनीम बानो ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि “यज़दान आरिफ़ ने इतनी कम आयु में जो इबादत, अनुशासन और लगन का परिचय दिया है, वह अन्य बच्चों के लिए मिसाल है। यह केवल धार्मिक अभ्यास नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और आत्मिक विकास की एक मजबूत नींव है। ऐसे बच्चों को प्रोत्साहन देना समाज की जिम्मेदारी है, ताकि वे आगे चलकर नैतिकता और ज्ञान के मार्ग पर अग्रसर रहें।” उल्लेखनीय है कि मोहम्मद यज़दान आरिफ़, पूर्व राज्यपाल मोहम्मद उस्मान आरिफ़ के पड़पौत्र हैं। इतनी कम आयु में ही उनमें साहित्य के प्रति विशेष रुचि विकसित हो रही है, जो उनके उज्ज्वल भविष्य का संकेत है। इस क्रम में मोहम्मद अमीन लाइब्रेरी में स्थापित “आरिफ़ कॉर्नर” का अवलोकन भी किया गया, जहाँ नूरुल हसन मदनी एवं यज़दान आरिफ़ ने साहित्यिक धरोहरों का निरीक्षण करते हुए ज्ञानार्जन में रुचि प्रकट की। सोशल प्रोग्रेसिव सोसाइटी ने यज़दान आरिफ़ की इस उपलब्धि को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए अन्य बच्चों को भी शिक्षा, संस्कार और आध्यात्मिकता की ओर अग्रसर होने का संदेश दिया।

