पॉलिटिकल नब्ज - Ward -3 Bikaner : कांग्रेस को ‘पहली बार जीत’ की तलाश! बीजेपी के शिव, कांग्रेस के अंशुल में घमासान! भोमराज बना रहे त्रिकोण!
Rudra News Express Bikaner.
सुजानदेसर का वार्ड संख्या 3 इस बार सिर्फ एक पार्षद का चुनाव नहीं लड़ रहा, यहां पुराने नतीजों का हिसाब और नई राजनीतिक जमीन दोनों दांव पर हैं। वर्तमान 80-वार्ड वाले स्वरूप में यह वार्ड अब तक कांग्रेस के लिए जीत से दूर रहा है। 2019 में यहां निर्दलीय राजेश कच्छावा ने बाजी मारी थी, जबकि मार्च 2024 में उनकी अप्राकृतिक मृत्यु के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा के नन्दकिशोर गहलोत विजयी हुए। अब 2026 में कांग्रेस ने अंशुल गहलोत को उतारकर पहली बार वार्ड अपने खाते में डालने की पूरी ताकत लगा दी है।
वार्ड नंबर बदले, मगर कांग्रेस को जीत नहीं मिली :
वार्ड 3 की राजनीतिक कहानी समझने के लिए 2014 का संदर्भ महत्वपूर्ण है। उस समय बीकानेर नगर निगम में 60 वार्ड थे। बाद में परिसीमन के साथ वार्डों की संख्या 80 हुई। इसलिए 2014 के वार्ड नंबर 3 को आज के सुजानदेसर वाले वार्ड 3 का भौगोलिक पूर्ववर्ती मानना सही नहीं होगा। यानी 80 वार्डों के वर्तमान स्वरूप के बाद ही आज के वार्ड 3 का राजनीतिक इतिहास शुरू होता है। इसके बावजूद यहां के निवासियों का कहना है इस इलाके से आज तक कांग्रेस ने जीत का स्वाद नहीं चखा।
2019 में निर्दलीय ने चौंकाया :
2019 के नगर निगम चुनाव में वार्ड 3 से निर्दलीय राजेश कच्छावा विजयी हुए। उन्हें 1,201 वोट मिले, जबकि भाजपा के नन्दकिशोर गहलोत को 994 वोट मिले। जीत का अंतर 207 वोट रहा। कांग्रेस उस चुनाव में यहां जीत दर्ज नहीं कर सकी। यह नतीजा बताता है कि इस वार्ड में सिर्फ पार्टी का चुनाव चिह्न ही निर्णायक नहीं रहा है। व्यक्तिगत पकड़ और स्थानीय समीकरण भी नतीजे बदलने की क्षमता रखते हैं।
2024 में बदला समीकरण :
मार्च 2024 में राजेश कच्छावा की अप्राकृतिक मृत्यु के बाद वार्ड में उपचुनाव हुआ। इस बार भाजपा के नन्दकिशोर गहलोत ने दमदार जीत दर्ज की। उन्हें 1,750 वोट मिले, जबकि कांग्रेस को 848 वोट मिले। निर्दलीय गणेश कच्छावा को 451 वोट मिले। भाजपा की जीत का अंतर 902 वोट रहा। यानी 2019 में महज 207 वोट से पिछड़ने वाली भाजपा ने उपचुनाव में कांग्रेस पर बड़ी बढ़त बना ली।

कांग्रेस को पहली जीत की तलाश "भोपा" अंशुल को उतारा :
कांग्रेस के लिए इस चुनाव की अहमियत यहीं से समझ आती है। वर्तमान वार्ड-3 में पार्टी को अब तक जीत नहीं मिली है। ऐसे में इस बार कांग्रेस सिर्फ प्रत्याशी नहीं उतार रही, बल्कि वार्ड में अपनी पहली जीत की तलाश में मैदान में है।
पार्टी ने अंशुल गहलोत*को उम्मीदवार बनाया है। उनकी अपनी सामाजिक पहचान भी चुनावी चर्चा का हिस्सा है। अंशुल पुजारी परिवार से जुड़े हैं। स्थानीय बोलचाल में पुजारी परिवार के सदस्य को ‘भोपा’ कहा जाता है। समर्थकों का मानना है कि इस धार्मिक-सामाजिक जुड़ाव से इलाके में उन्हें सम्मान और सहज स्वीकार्यता मिलती है। हालांकि इसका सीधा असर वोटों में कितना बदलता है, यह चुनाव परिणाम ही बताएगा।

भाजपा के सामने चुनौती :
भाजपा ने इस बार शिव गहलोत को मैदान में उतारा है। पार्टी के लिए सबसे बड़ा सकारात्मक आंकड़ा 2024 का उपचुनाव है, जिसमें नन्दकिशोर गहलोत ने कांग्रेस को 902 वोट से पीछे छोड़ा था। लेकिन 2026 में मुकाबला नए उम्मीदवारों के साथ है। इसलिए उपचुनाव की जीत को जस का तस दोहराना भाजपा के लिए चुनौती भी है।
07 उम्मीदवार, मुकाबला सिर्फ दो के बीच नहीं :
- अंशुल गहलोत : कांग्रेस
- शिव गहलोत : भाजपा
- त्रिलोक नाथ : AAP
- मुरली गहलोत : निर्दलीय
- आनंद भाटी : निर्दलीय
- भोमराज : निर्दलीय
- राधेश्याम : निर्दलीय
यानी कांग्रेस और भाजपा के बीच मुख्य मुकाबले के बावजूद AAP और चार निर्दलीय वोटों का समीकरण प्रभावित कर सकते हैं। यहां एक रोचक बात यह है कि जितने भी निर्दलीय है वे सभी बीजेपी से टिकट के दावेदार रहे हैं। ऐसे में मैदान में रहने से बीजेपी को नुकसान की आशंका है। इनमें से निर्दलीय भोमराज की स्थिति मजबूत मानी जाती है।
वार्ड का भूगोल और मतदाता :
सुजानदेसर इसका प्रमुख क्षेत्र है। इसके साथ श्रीरामसर, नायकों का बास, छोटा राणीसर बास, मेघवालों का बास, गहलोत मोहल्ला, संखलों की गली, करमीसर रोड, बाबा रामदेव मंदिर रोड, विनायक कॉलोनी और कुम्हारों का बास जैसे इलाके वार्ड के चुनावी भूगोल में आते हैं।
वार्ड में लगभग 5,525 मतदाता हैं। इनमें 2,967 पुरुष और 2,558 महिलाएं हैं। मतदान के लिए 5 बूथ हैं। वार्ड OBC के लिए आरक्षित है।
पॉलिटिकल नब्ज :
वार्ड 3 की चुनावी कहानी को तीन आंकड़े सबसे बेहतर तरीके से समझाते हैं। पहला- 2019 में निर्दलीय की जीत। दूसरा- 2024 में भाजपा की 902 वोट की बड़ी जीत। तीसरा- 2026 में कांग्रेस की पहली जीत की कोशिश। कांग्रेस के सामने चुनौती सिर्फ भाजपा को हराने की नहीं, बल्कि वार्ड 3 में पहली बार अपना खाता खोलने की है।
भाजपा के पास 2024 की जीत का आत्मविश्वास है, लेकिन इस बार उसके सामने नया कांग्रेस चेहरा, AAP और चार निर्दलीय हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या 2024 की भाजपा की बड़ी बढ़त कायम रहेगी या अंशुल गहलोत के जरिए कांग्रेस वर्तमान वार्ड 3 में पहली बार जीत का स्वाद चखेगी? यही सवाल सुजानदेसर के इस वार्ड को इस नगर निगम चुनाव के दिलचस्प मुकाबलों में शामिल करता है।

