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पूनरासर मेला-50 KM तक भक्तों का रेला… हर तरफ ध्वजा, जयकारे और दाल-बाटी-चूरमे की महक, 100 घंटे तक लगातार दर्शन!

पूनरासर बाबे की जै! 100 घंटे से लगातार दर्शन दे रहे बाबा!

 

पूनरासर बाबे की जै! 100 घंटे से लगातार दर्शन दे रहे बाबा!

पूनरासर मेला-50 KM तक भक्तों का रेला… हर तरफ ध्वजा, जयकारे और दाल-बाटी-चूरमे की महक, 100 घंटे तक लगातार दर्शन!
 

राजा बोहरा की लाइव रिपोर्ट 

Rudra News Express Punarasar-Bikaner. 

“पूनरासर बाबे की… जै!” बीकानेर की धरती पर इन दिनों यह सिर्फ जयकारा नहीं है, यह हजारों कदमों की धड़कन बन गया है। कोई पैदल चला आ रहा है, कोई ध्वजा लेकर नाचता हुआ, कोई परिवार के साथ बाबा के दरबार में पहुंच रहा है तो कोई रास्ते भर भजन गाते हुए। चेहरे पर थकान है, पैरों में छाले हैं, लेकिन जुबान पर एक ही नाम है "पूनरासर बाबा।"

बाबा

आज 19 सितंबर 2026 को पूनरासर धाम में हनुमानजी का मेला भरा है। बीकानेर और चूरू जिलों सहित देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। पिछले दो दिनों से बीकानेर से जयपुर मार्ग पर करीब 50 किलोमीटर के हिस्से में पैदल श्रद्धालुओं के जत्थे लगातार दिखाई दे रहे हैं।

हाथों में ध्वजा… होंठों पर बाबा का नाम… डीजे पर भजन… और बीच में अचानक एक तेज आवाज उठती है, “पू..न..रा.. स.. र बा...बे की.. " और जवाब में एक साथ सैकड़ों कंठों से फूटता है  "जै!”  

सेवा

मस्ताने भक्तों की  सेवा का लाभ : 
रास्ते भर कहीं हाथों में थमी लंबी ध्वजा नाच रही है, कहीं भक्त। रायसर, नौरंगदेसर, रामरतन प्याऊ, कन्हैयालाल प्याऊ, कुंडिया सहित रास्ते में दर्जनों जगहों पर सेवादार श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे हैं। कहीं पानी मिल रहा है, कहीं चाय। कहीं भोजन तैयार है तो कहीं थके कदमों को कुछ देर आराम देने की व्यवस्था। भक्त आते हैं… बैठते हैं… प्रसाद लेते हैं… फिर ध्वजा उठाते हैं और आगे बढ़ जाते हैं। मंजिल एक ही "पूनरासर बाबा का दरबार।"

बाबा

16 सितंबर से खुला है बाबा का दरबार : 

पूनरासर के मुख्य हनुमान मंदिर में भी इन दिनों अलग ही दृश्य है।16 सितंबर की सुबह आरती के समय मंदिर भक्तों के दर्शन के लिए खोला गया था। इसके बाद से दिन-रात लगातार श्रद्धालुओं को दर्शन हो रहे हैं। पुजारी परिवार के पवन कुमार के अनुसार, 20 सितंबर की सुबह तक बाबा के दर्शन लगातार खुले रहेंगे। यानी करीब 100 घंटे तक बाबा का दरबार भक्तों के लिए अनवरत खुला रहेगा। 20 सितंबर सुबह दर्शन के बाद मंदिर की सफाई, बाबा का नया शृंगार और पूजा-अर्चना होगी। इसके बाद फिर श्रद्धालुओं के लिए दर्शन खोले जाएंगे।

भीड़

दो लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान : 

पुजारी परिवार और मेले की व्यवस्थाओं से जुड़े लोगों के मुताबिक इस दौरान दो लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के पूनरासर पहुंचने का अनुमान है। पूनरासर गांव में छोटी-बड़ी करीब 10 धर्मशालाएं हैं, जिनमें लगभग 900 कमरे हैं। अनुमान है कि करीब 20 हजार लोग गांव में ठहरे हुए हैं, लेकिन पूनरासर में इन दिनों सिर्फ धर्मशालाएं ही ठहरने की जगह नहीं हैं। गांव के घर भी गेस्ट हाउस बन गए हैं। किसी के आंगन में यात्री ठहरे हैं, किसी के चौक में बिस्तर लगे हैं और कहीं पूरा परिवार बाहर से आए भक्तों की सेवा में जुटा है।

चूरमा

.. और फिर शुरू होती है चूरमे की खुशबू!

पूनरासर की भक्ति सिर्फ जयकारों में नहीं है। यहां भक्ति की अपनी खुशबू भी है। मंदिर का खुला मैदान हो या धर्मशाला का बड़ा रसोड़ा।  गांव के घरों का खुला अहाता हो या सेवादारों का टेंट। हर तरफ एक ही दृश्य दिखाई दे रहा है, "दाल… बाटी… चूरमा।" जगरे में सिकती बाटियों की सौंधी खुशबू और फिर उस पर पड़ती देशी घी की धार। बाटी सिकती है तो खुशबू फैलती है।  घी पड़ता है तो भूख जागती है.. और चूरमा तैयार होता है तो भक्ति का स्वाद पूरा हो जाता है।

चूरमा

यह सिर्फ खाना नहीं है!

यह बाबा का प्रसाद है। इसे कोई भी, किसी की रसोई से बिना हिचक ले सकता है। सारे रसोड़े, सभी के लिये खुले हैं। तभी तो जब चूरमा बाबा को भोग लगता है तो आसपास कहीं नवदीप बीकानेर के भजन की आवाज गूंजती है “आवै चूरमे री महकार, च्यारों खानी जै-जैकार…।"

एक तरफ हजारों भक्त बाबा के दर्शन के लिए कतार में हैं। दूसरी तरफ सेवादार भोजन बनाने में जुटे हैं। कहीं ढोल बज रहा है। कहीं ध्वजा लहरा रही है। कहीं भक्त नाच रहे हैं.. और हर थोड़ी देर में वातावरण को चीरता हुआ वही उद्घोष “पूनरासर बाबे की… जै!”यही है पूनरासर का मेला। जहां रास्ता भी भक्ति है, सफर भी भक्ति है, सेवा भी भक्ति है और बाबा का प्रसाद भी भक्ति है। और इन दिनों पूनरासर की हवा में बस एक ही रंग घुला है "*बाबे की भक्ति का रंग।"

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