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Rajasthan : वकीलों ने कामकाज बंद किया,  कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से जुड़े प्रशासनिक विवाद और टारगेटेड फाइल सिस्टम के विरोध में अधिवक्ताओं का आंदोलन

 

Rudra News Express Jodhpur-Bikaner. 

राजस्थान हाईकोर्ट से जुड़े प्रशासनिक विवाद और अदालतों में चल रही टारगेटेड फाइल सिस्टम व्यवस्था के विरोध में अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्यों से विरत रहने का निर्णय लिया है। इसका असर बीकानेर सहित राजस्थान की अदालतों में न्यायिक कामकाज पर पड़ रहा है। अधिवक्ता 6 सितंबर 2026 तक व्यक्तिगत और वर्चुअल रूप से न्यायालयों में उपस्थित नहीं होंगे तथा न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे।

आंदोलन के पीछे मुख्य रूप से तीन मुद्दे हैं। अधिवक्ताओं ने राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को न्यायिक एवं प्रशासनिक दायित्वों से विरत रखने, हाईकोर्ट में स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करने और प्रदेशभर में चल रही टारगेटेड फाइल सिस्टम व्यवस्था को तत्काल बंद करने की मांग उठाई है। 

आखिर क्यों नाराज हैं वकील?

राजस्थान हाईकोर्ट की दोनों अधिवक्ता एसोसिएशनों की 31 अगस्त को हुई आपात बैठक में वर्तमान परिस्थितियों पर विस्तृत मंथन किया गया। बैठक में सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश की ओर से भारत के मुख्य न्यायाधीश को लिखे गए तीन पत्रों के बाद सामने आए मुद्दों पर चिंता जताई गई। प्रेस नोट के अनुसार इन पत्रों में राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक आचरण को लेकर गंभीर आपत्तियां एवं चिंताएं व्यक्त की गई हैं। समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के अनुसार इन पत्रों में प्रशासनिक शक्तियों के कथित दुरुपयोग, मामलों की लिस्टिंग प्रक्रिया में कथित हस्तक्षेप, पक्षपात और प्रशासनिक कुप्रबंधन जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। 

अधिवक्ताओं का कहना है कि न्यायपालिका संविधान, विधि के शासन और आम नागरिक के अंतिम विश्वास का प्रतीक है। न्यायिक संस्था से जुड़े गंभीर सवालों का यदि समयबद्ध, निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी समाधान नहीं होता है तो इसका असर आमजन के न्याय व्यवस्था पर विश्वास पर पड़ सकता है। 

टारगेटेड फाइल सिस्टम भी बड़ा मुद्दा : 

अधिवक्ताओं ने प्रदेशभर में चल रही टारगेटेड फाइल सिस्टम व्यवस्था को भी तत्काल बंद करने की मांग की है। उनका कहना है कि लंबे समय से लंबित मामलों को लक्षित तरीके से निस्तारित करने की प्रक्रिया से न्यायिक कार्यप्रणाली के साथ अधिवक्ताओं के सामान्य पेशेवर जीवन पर भी अत्यधिक दबाव पड़ रहा है। इससे प्रदेशभर में बार के सदस्यों में असंतोष और कठिनाइयां पैदा हो रही हैं। 

स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की मांग :

अधिवक्ताओं की दूसरी प्रमुख मांग राजस्थान हाईकोर्ट में स्थायी एवं पूर्णकालिक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट को स्थायी मुख्य न्यायाधीश मिलने से न्यायिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था में स्थिरता, निरंतरता और प्रभावी नेतृत्व मिल सकेगा। बार की बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है। अधिवक्ताओं के अनुसार उनका उद्देश्य न्यायिक संस्था की गरिमा, निष्पक्षता, स्वतंत्रता और आमजन के विश्वास की रक्षा करना है। 

राष्ट्रपति से लेकर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम तक रखेंगे मांग :

अधिवक्ताओं ने इन तीनों मांगों को लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के वरिष्ठ न्यायाधीशों के समक्ष ज्ञापन प्रस्तुत करने का निर्णय लिया है। साथ ही प्रदेश की सभी बार एसोसिएशनों से आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया जाएगा।  

6 सितंबर के बाद तय होगी अगली रणनीति : 

अधिवक्ताओं ने 6 सितंबर तक न्यायिक कार्यों से विरत रहने के साथ आगे की रणनीति तय करने के लिए संघर्ष समिति के गठन का निर्णय भी लिया है। ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि 6 सितंबर के बाद आंदोलन समाप्त होता है या अधिवक्ता इसे आगे बढ़ाने का फैसला करते हैं। 

बीकानेर में भी आंदोलन का असर साफ दिख रहा है। स्थानीय अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने के कारण बीकानेर की अदालतों में नियमित पैरवी और न्यायिक कामकाज प्रभावित होने की स्थिति है। प्रदेशव्यापी इस आंदोलन का अगला रुख 6 सितंबर के बाद स्पष्ट होगा।

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