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Rajasthan: अनुकंपा नियुक्ति के नियम बदले, कर्मचारी की पुत्रवधू भी नौकरी की पात्र, जानिए और किसे मिल सकेगी अनुकंपा नियुक्ति 

 

Rudra News Express Jaipur.

राजस्थान में सरकारी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने पर आश्रित को मिलने वाली अनुकंपा नियुक्ति के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। भजनलाल सरकार ने राजस्थान अनुकंपात्मक नियुक्ति नियम, 1996 में संशोधन करते हुए अब मृत सरकारी कर्मचारी की पुत्रवधू (बहू) को भी आश्रितों की सूची में शामिल कर दिया है। कार्मिक विभाग ने मंगलवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी। संशोधित प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।

बहू को चौथे क्रम पर रखा, शर्त भी तय :

नए नियम में आश्रितों की प्राथमिकता का क्रम निर्धारित किया गया है। सबसे पहले पति या पत्नी, इसके बाद पुत्र, फिर अविवाहित, विधवा या तलाकशुदा पुत्री को रखा गया है। इनके बाद पुत्रवधू को चौथे क्रम पर शामिल किया गया है।

हालांकि, बहू को अनुकंपा नियुक्ति तभी मिल सकेगी, जब मृत कर्मचारी के क्रमांक 2 और 3 में बताए गए अन्य आश्रित उपलब्ध नहीं हों। यानी यदि पात्र पुत्र अथवा अविवाहित, विधवा या तलाकशुदा पुत्री उपलब्ध है, तो पुत्रवधू की प्राथमिकता उसके बाद होगी।

विवाहित बेटी भी सूची में :

संशोधन के तहत विवाहित पुत्री को भी आश्रितों की सूची में शामिल किया गया है। उसे पांचवें क्रम पर रखा गया है और उसकी पात्रता तब होगी, जब ऊपर के क्रम में बताए गए अन्य आश्रित उपलब्ध नहीं हों।

अविवाहित कर्मचारी की मृत्यु पर माता-पिता भी पात्र :

यदि मृत सरकारी कर्मचारी स्वयं अविवाहित था, तो उसकी माता, पिता, अविवाहित भाई या अविवाहित बहन भी अनुकंपा नियुक्ति के लिए आश्रित माने जा सकेंगे। इसके लिए शर्त है कि वे कर्मचारी की मृत्यु के समय पूरी तरह उस पर निर्भर रहे हों।

गोद लिए बेटे-बेटी भी दायरे में :

नए प्रावधान में मृत कर्मचारी द्वारा जीवनकाल में विधि-सम्मत रूप से गोद लिए गए पुत्र और पुत्री को भी संबंधित आश्रित श्रेणी में शामिल किया गया है। इस तरह संशोधन के बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए आश्रितों की पात्रता और प्राथमिकता का दायरा पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट किया गया है।

सरकार के इस फैसले से उन परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनमें सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार की जिम्मेदारी पुत्रवधू या अन्य आश्रित सदस्यों पर आ जाती है। हालांकि, नियुक्ति का दावा प्राथमिकता क्रम और नियमों में निर्धारित शर्तों के अधीन ही तय होगा।

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