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हिन्दी वाङ्मय में विहंग-वर्णन पर राकेश रामावत को पीएचडी उपाधि

 

RNE Bikaner.

जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के हिन्दी विभाग से राकेश रामावत ने डॉ. प्रेम सिंह के निर्देशन में “हिन्दी वाङ्मय में विहंग-वर्णन के विविध आयाम : एक अनुशीलन” विषय पर अपना शोधकार्य पूर्ण कर पी-एच.डी. उपाधि अर्जित की।

शोध के दौरान राकेश रामावत ने प्राचीन भारतीय साहित्य में पक्षियों से संबंधित संदर्भों का अनुशीलन करते हुए हिन्दी साहित्य के विभिन्न कालखंडों एवं गद्य-पद्य विधाओं में विहंग-विषयक प्रकीर्ण विवरणों का विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया। शोधार्थी ने हिन्दी वाङ्मय में पक्षियों से संबंधित प्रसंगों का आज के दौर में ज्ञान-विज्ञान की विभिन्न शाखाओं के परिप्रेक्ष्य में ‘इंटरडिसिप्लिनरी एप्रोच’ (अंतर्विषयी उपागम) के रूप में गहन अध्ययन करते हुए भावी शोध-सूत्रों का विवरण भी प्रस्तुत किया। हिन्दी साहित्य में निहित विहंग-वर्णन समकालीन नव-विमर्शों की दृष्टि से भी अत्यंत शोधोपयोगी है। हिन्दी के प्रादेशिक लोकसाहित्य की विभिन्न विधाओं में पक्षी जगत की जैव-विविधता के नयनाभिराम ब्यौरे भरे पड़े हैं। यह शोधकार्य साहित्य एवं विज्ञान के सेतु के रूप में उपयोगी है।

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