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रंगरूड़ौ राजस्थान महोत्सव लूणकरनसर में सम्पन्न, 630 मीटर की विश्व की सबसे लंबी पगड़ी से राजवीर सिंह चलकोई का किया सम्मान

 

RNE Bikaner

लूणकरनसर। पंडित जी फाउंडेशन फॉर कल्चरल हैरिटेज ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित “रंगरूड़ौ राजस्थान” का भव्य सांस्कृतिक महोत्सव रविवार को श्री हनुमान मन्दिर परिसर, लूणकरनसर में हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री ईश्वरलाल पंचारिया ने की।

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समारोह के मुख्य अतिथि प्रख्यात इतिहासविद् श्री राजवीर सिंह चलकोई ने राजस्थानी भाषा की संवैधानिक मान्यता की पीड़ा उजागर करते हुए कहा कि राजस्थान में राजस्थानी भाषा की संवैधानिक मान्यता का नहीं होना और विश्वविद्यालयों में मराठी भाषा के अध्ययन केन्द्र थोपना राजस्थानियों का अपमान है । उन्होने कहा कि राजस्थानी संस्कृति को जीवित रखने के लिए रंगरूड़ो राजस्थान जैसे उत्सव होते रहने चाहिए । साथ ही अपने संबोधन में उन्होंने विशेष रूप से युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि नशा व्यक्ति, परिवार और समाज तीनों के लिए घातक है। युवा शक्ति को नशे जैसी बुराइयों से दूर रहकर शिक्षा, संस्कार, खेल और राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से भी आग्रह किया कि वे मोबाइल और सोशल मीडिया में अत्यधिक समय व्यतीत करने के बजाय अपने बच्चों के साथ समय बिताएं, उनके संस्कार, शिक्षा और गतिविधियों पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि बच्चों का सर्वांगीण विकास तभी संभव है जब परिवार उनका मार्गदर्शन और सहयोग करे।
उन्होंने राजस्थान के प्रत्येक बच्चे को पढ़ाई के साथ-साथ कम से कम एक खेल से जुड़ने की प्रेरणा देते हुए कहा कि खेल अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और स्वस्थ जीवन का आधार हैं।सभी नागरिकों से राजस्थानी भाषा, संस्कृति, लोककला और लोक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक विरासत को बचाना हम सभी का नैतिक दायित्व है तथा नई पीढ़ी को अपनी भाषा और संस्कृति से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
विशिष्ट अतिथियों में डॉ. हरिमोहन सारस्वत ‘रूंख’ ने अपने साफे की महत्व पर बोलते हुए उसकी गरीमा को बनाए रखने की बात की ।  श्री छैलू चारण ‘छैल’ महाराणा प्रताप पर कविता सुनाकर जोश भरा राजूराम बिजारणिया ने बेटी पर कविता सुनाई साथ ही उनके राजस्थानी गजल एल्बम 'आज कबीरी चादर धर दे का लोकार्पण भी हुआ , श्री ओंकारनाथ योगी, श्री देवीलाल महिया, श्री रामजी लाल घोड़ेला, श्री भवानी पाईवाल तथा हनुमान पंचारिया ने मी विचारों और कविताओं से उपस्थिति दर्ज कराई ।

महोत्सव का मुख्य आकर्षण 630 मीटर लंबी विश्व की सबसे बड़ी पगड़ी रही। इस ऐतिहासिक पगड़ी को धारण करवाकर इतिहासविद् श्री राजवीर सिंह चलकोई का भव्य सम्मान किया गया। वहीं जगमाल सिंह भाटी की 40 फीट लंबी मूंछ दर्शकों के आकर्षण का प्रमुख केन्द्र बनी रही।

राजस्थानी साफ़ा प्रतियोगिता में बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर, हनुमानगढ़, करौली सहित राजस्थान के विभिन्न जिलों से आए कलाकारों ने भाग लेकर पारम्परिक साफ़ा बाँधने की अपनी अनूठी कला का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता ने आयोजन को राज्यस्तरीय पहचान प्रदान करते हुए राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता का जीवंत परिचय कराया। महोत्सव में घूमर, भवई सहित विभिन्न राजस्थानी लोकनृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। 

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कार्यक्रम संयोजक राम शर्मा ने बताया कि महोत्सव का उद्देश्य राजस्थानी भाषा, लोककला, संस्कृति एवं गौरवशाली विरासत के संरक्षण और संवर्धन के प्रति समाज में जागरूकता उत्पन्न करना है।

ट्रस्ट के संस्थापक स्वरूप पंचारिया ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, सहयोगियों एवं संस्कृति प्रेमियों का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि ट्रस्ट द्वारा संचालित “हर घर साफ़ा–हर घर पगड़ी” अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिला है। पाँच दिवसीय नि:शुल्क राजस्थानी साफ़ा प्रशिक्षण शिविर में 248 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण प्राप्त कर राजस्थानी साफ़ा संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लिया।

चळकोई फाउंडेशन के संस्थापक राजवीर सिंह द्वारा स्कूली कबड्डी में 7 बार नेशनल स्तर खेली और राजस्थान की कप्तान रही लखावर गांव की बेटी आईना सायच को 25000 रु,साफा प्रतियोगिता में प्रथम,द्वितीय व तृतीय रहे प्रतिभागियों को 5100,3100 व 1100 रु नकद पुरस्कार से तथा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया ।
कार्यक्रम की सफलता में राजस्थानी मोट्यार परिषद के विनोद सारस्वत,नमामि शंकर आचार्य,राजेश चौधरी, हिमांशु टाक,कमल मारू, प्रशांत जैन सहित पूरी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही ।

कार्यक्रम का प्रभावी मंच संचालन गोपाल जोशी ने किया। मोट्यार परिषद के हरिराम विश्नोई ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया ।अंत में अतिथियों का सम्मान कर राजस्थानी भाषा, संस्कृति और लोक परम्पराओं के संरक्षण का सामूहिक संकल्प दोहराया गया।

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