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टाउन हॉल, रवींद्र रंगमंच का किराया बढ़ गया, कृषि विवि का रोजगार कार्यालय टूट गया, खबर ही नहीं

पानी की कालाबाजारी सरेआम हो रही
 

मधु आचार्य ' आशावादी '
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RNE Special.
 

हे माननीयों ! जनता ने आपको बहुत उम्मीदो के साथ अपना भविष्य आपके हाथों में सौंपा है। ये बड़ा निर्णय करते समय उन्होंने मन में बहुत से सपने पाले थे और उनकी ताबीर की अपेक्षा आप से की है। आप सक्रिय है, इस बात से नाइत्तफाकी नहीं। विकास की प्रक्रिया सतत है। उसमें आपकी तरफ से प्रयास भी है। राज्य व केंद्र सरकार भी इस संभाग मुख्यालय की तरफ अब ध्यान देने लगी है। 
 

मगर ..... अब भी बहुत सी बातें है जो आप तक आपका नेटवर्क नहीं पहुंचा पाया है। जिसके कारण जनता को, कलाकारों को, बेरोजगारों को बड़ी दिक्कत उठानी पड़ रही है। इन लोगों को आप सभी से बहुत अपेक्षा है। ये लोग राजनीतिक नहीं, आपके क्षेत्र के जागरूक नागरिक है। जो आपके हर अच्छे की खुलकर तारीफ करते है। आपके बड़े ब्रांड एम्बेसेडर है। बिना कोई मानदेय लिए आपकी मार्केटिंग करते है। इनकी यदि आप नहीं सुनेंगे तो कौन सुनेगा ?

सुनें माननीय ! क्या चाहते है लोग:

इस शहर की शान, देश - दुनिया मे बीकानेर का नाम रोशन करने वाले कलाकार इस समय संकट में है। नाटक करने वाले, गायक, संगीतकार, नृत्य करने वाले कलाकार परेशान है। यहां दो रंगमंच है, टाउन हॉल और रवींद्र रंगमंच। रवींद्र रंगमंच तो भारी किराए के कारण इनकी पहुंच से वैसे भी दूर है। टाउन हॉल का किराया ठीक था और ये कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते थे।

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अब बीकानेर विकास प्राधिकरण ने अचानक से इसका किराया 1000 गुना बढ़ा दिया। कलाकारों के लिए यह हथोड़े की मार से कम नहीं। कला के मढ़यम सरकार की कमाई के साधन नहीं होते। भारतीय संस्कृति को केंद्र व राज्य सरकार प्रोत्साहित करती है, मगर प्राधिकरण उन पर किराए से अंकुश लगा रहा है। उनको राहत की उम्मीद आपसे ही है।
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पता है, एक दफ्तर बंद हो गया:

कृषि विश्वविद्यालय में रोजगार का एक दफ्तर यूजीसी नॉर्म्स के अनुसार चल रहा था। उसे अचानक से चुपचाप बंद कर दिया गया है। इसकी भनक भी सांसद व विधायकों को नहीं है। सरकार की रोजगार योजनाओं, बेरोजगारों को अब मार्गदर्शन कौन देगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं। बीकानेर का दफ्तर बंद, पद समाप्त और एक भी जन प्रतिनिधि, कर्मचारी नेता, विपक्ष, जागरूक नेता नहीं बोला है। यह बीकानेर के साथ न्याय तो नहीं।

पानी की कालाबाजारी:

नहरबंदी के कारण शहर में पेयजल की किल्लत है। एक दिन छोड़कर थोड़े समय के लिए पानी आता है। जलदाय विभाग टैंकर से आपूर्ति करता है, मगर उसकी भी सीमा है। आपके दबाव में जिला प्रशासन ने निजी टैंकरों की दर तय तो कर दी मगर मोनिटरिंग नहीं, जिस कारण से मनमाने दाम टैंकरों के जनता से वसूले जा रहे है। आप यदि राहत नहीं दिलाएंगे तो जनता किसके पास जायेगी।
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अर्जुनराम जी, सुमित गौदारा जी, जेठानन्द व्यास जी, सिद्धि कुमारी जी, विश्वनाथ मेघवाल जी, अंशुमान सिंह जी, ताराचंद सारस्वत जी व सुशीला डूडी जी, ये शहर आपसे ही तो उम्मीद रखेगा। आप तो नजरें इनायत करिए। आपके छोटे से प्रयास से इन समस्याओं का निदान हो जायेगा। प्लीज, गौर कर दखल दीजिए। शहर को राहत मिलेगी।
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विपक्ष भी तो ध्यान दे:

बीकानेर में विपक्ष के भी कद्दावर नेता है, वे भी माननीय है, उनसे भी उम्मीद है। डॉ बी डी कल्ला जी, भँवरसिंह भाटी जी, वीरेंद्र बेनीवाल जी, गोविंद मेघवाल जी, यशपाल गहलोत जी, राजेन्द्र मूंड जी, बिसनाराम सियाग जी, मदन मेघवाल जी, मकसूद जी आपसे भी जनता, कलाकार, बेरोजगार उम्मीद रखते है। आप भी अपना दायित्त्व निभाएं, ये सब लोग अपेक्षा करते है।

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