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साध्वी प्रीतिसुधा बोलीं—संसार में नहीं, तप और धर्म में आगे बढ़ने की हो होड़

 

Rudra News Express Bikaner.

बीकानेर के रांगड़ी चौक स्थित पौषधशाला में आत्मानंद जैन सभा चातुर्मासिक समिति के तत्वावधान में चातुर्मासिक प्रवचन चल रहे हैं। साध्वीश्री प्रीतिरत्ना, साध्वीश्री प्रीतिसुधा एवं साध्वीश्री प्रीतियशा महाराजसा के सान्निध्य में बुधवार को साध्वीश्री प्रीतिसुधा महाराजसा ने सुकुमार के प्रसंग के माध्यम से वैराग्य, दृढ़ संकल्प और गुरु आज्ञा का महत्व समझाया।

साध्वीश्री ने कहा कि सुकुमार का विवाह सुबह हुआ और उसी दिन शाम को उन्होंने दीक्षा ले ली। उनका संकल्प था कि मानव जीवन केवल सांसारिक सुखों के लिए नहीं, बल्कि तप और मोक्ष साधना के लिए है।

दीक्षा लेने के बाद सुकुमार श्मशान में जाकर बैठ गए। यह देखकर उनके ससुर क्रोधित हो गए। उन्होंने श्मशान की अग्नि की लपटें सुकुमार के आसपास कर दीं। लेकिन सुकुमार विचलित नहीं हुए। उन्होंने इसे भी ससुर का उपकार माना और कोई विरोध नहीं किया।

साध्वीश्री ने कहा कि यह प्रसंग शरीर के मोह से ऊपर उठकर आत्मा को मोक्ष की ओर ले जाने का संदेश देता है। जीवन में वैराग्य तभी सार्थक है, जब संकल्प मजबूत हो।

गुरु की आज्ञा ही साधना का आधार :

साध्वीश्री ने कहा कि संसार छोड़कर साधु बनना एक बात है, लेकिन गुरु को स्वीकार कर उनके सच्चे शिष्य बनना कठिन है। शिष्य को अपने मन और आचरण को गुरु की आज्ञा के अनुरूप ढालना होता है। गुरु की आज्ञा में चलने वाला व्यक्ति जीवन को सही दिशा दे सकता है।

उन्होंने विश्वास का महत्व बताते हुए कहा कि हम रोजमर्रा के जीवन में कई लोगों पर सहज विश्वास करते हैं। भोजन लेते समय हर चीज की जांच नहीं करते और बाल कटवाते समय अपना सिर भी दूसरे के हाथों में सौंप देते हैं। इसी तरह परमात्मा और गुरु के प्रति भी अटूट विश्वास होना चाहिए।

धर्म में आगे निकलने की होड़ हो :

साध्वीश्री ने कहा कि आज लोग विवाह, जन्मदिन और पार्टियों में दिखावे के लिए एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश करते हैं। ऐसी प्रतिस्पर्धा भौतिक सुख बढ़ाती है। इसके बजाय तप, जप, सेवा और धार्मिक कार्यों में आगे बढ़ने की होड़ होनी चाहिए।

उन्होंने श्रावक-श्राविकाओं से श्रीसंघ की धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। कहा कि तप के लिए सबसे जरूरी चीज धन नहीं, दृढ़ संकल्प और नियमित साधना है। उन्होंने 1000 मासिक क्षमण के तप का भी उल्लेख किया।

प्रवचन में परमात्मा के स्वरूप तथा जैन दर्शन में आत्मा, शरीर और कर्म के संबंध को सरल उदाहरणों से समझाया गया।

शुक्रवार को शुद्ध आयंबिल तप :

चातुर्मास लाभार्थी परिवार के सुरेंद्र बद्धाणी ने बताया कि शुक्रवार को शुद्ध आयंबिल तप का आयोजन होगा। इसमें निर्धारित मात्रा में चावल और एक द्रव्य से तप किया जाएगा। साध्वीश्री ने श्रावक-श्राविकाओं के साथ बच्चों को भी तप और धार्मिक साधना से जोड़ने का आह्वान किया।

शांतिलाल सेठिया ने बताया कि बुधवार को राजश्री-जिनेंद्र कोचर ने आयंबिल तप का लाभ लिया। गुरुवार को रेनू-पंकज कोचर आयंबिल करेंगे। अष्टम तप का लाभ जयश्री गोचर, पत्नी कमलजी कोचर लेंगी।

नवकार पद एकासना का लाभ सौम्या-सम्यक मंडल, रावतमलजी रामचंद्र प्रसाद कोचर परिवार, हनुमानदासजी हीरालाल सिपानी, प्रकाशसिंह, राजेंद्र चौरड़िया, जवाहरलालजी, पारसजी कोचर तथा सुरेशकुमार विजय सिरोही परिवार, दिल्ली-बीकानेर ने लिया। श्रीसंघ पूजा का लाभ हनुमानदासजी हीराचंदजी सिपानी परिवार ने लिया।

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