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साहित्य अकादेमी द्वारा अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर "बहुभाषी कवि सम्मिलन" का आयोजन

23 भारतीय भाषाओं के कवि हुए शामिल
 
 

RNE Network.

साहित्य अकादेमी द्वारा अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर बहुभाषी कवि सम्मिलन का आयोजन किया गया। प्रख्यात हिंदी कवि दिविक रमेश ने सम्मिलन की अध्यक्षता की और 22 अन्य भारतीय भाषाओं के रचनाकारों ने अपनी कविताएँ, गीत और ग़ज़ल प्रस्तुत की। 

अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में दिविक रमेश ने कहा कि मातृभाषाएं सांस्कृतिक विविधता को आगे बढ़ाती हैं अतः उनका संरक्षण बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि मातृभाषाएं हमारे हृदय की पुकार को अभिव्यक्त करने का सबसे महत्त्वपूर्ण साधन हैं। मातृभाषाएं मानवता को बचाने के लिए वरदान हैं अतः हमें अपनी मातृभाषा के साथ ही अन्य भाषाओं का भी सम्मान करना चाहिए। उन्होंने परस्पर अनुवाद के जरिए इनको मजबूत बनाने की बात भी कही. अंत में उन्होंने अपनी कविता 'बहुत कुछ है अभी' सुनाई।

सभी उपस्थित कवियों ने इस अवसर पर अपनी मातृभाषाओं के सम्मान में तो कविताएँ पढ़ी ही साथ ही उनकी कविताओं में उनका बचपन, प्रकृति माता-पिता के अलावा चिड़िया से लेकर बर्फ और अन्य समस्याएँ भी दर्ज थी। कुछ रचनाकारों ने अपनी कविताएँ सस्वर प्रस्तुत की जिन्हें श्रोताओं ने बेहद पसंद किया।

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कार्यक्रम में हाल ही में दिवंगत हुए साहित्य अकादेमी बोडो भाषा के संयोजक तारेन चो बर', बाङ्ला भाषा के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त प्रसिद्ध लेखक शंकर एवं हिंदी के लिए बाल साहित्य पुरस्कार से सम्मानित देवेंद्र कुमार को एक मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

आज कविता-पाठ करने वाले कवि थे - रत्नोत्तमा दास (असमिया), कौशिक सेन (बाङ्ला), किरण बर’ (बोडो), काजल सूरी (डोगरी), अम्लान ज्योति गोस्वामी (अंग्रेजी), भाग्येंद्र पटेल (गुजराती), रमेश अरोली (कन्नड), रविंदर कौल ‘रवि’ (कश्मीरी), लीलेश वा. कुडाळकार (कोंकणी), निवेदिता झा (मैथिली), सिंधु सुरेश (मलयाळम्), मिसना चानू (मणिपुरी), जीवन प्रकाश तलेगांवकर (मराठी), हर्क बहादुर लामगादे (नेपाली), बिरजा महापात्र (ओड़िआ), अर्कमल कौर (पंजाबी), प्रमोद कुमार शर्मा (संस्कृत), सरोजिनी बेसरा (संताली), मोहिनी हिंगोराणी (सिंधी), विनीता एसआर (तमिळ), दत्तैया अत्तेम (तेलुगु) एवं मोईन शादाब (उर्दू)। कार्यक्रम का संचालन उपसचिव प्रशासन एन. सुरेश बाबु ने किया।

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