ऊंटों का इतिहास : विरासत से साक्षात्कार, अनुभव के माध्यम से इतिहास को समझने की सार्थक पहल
RNE Bikaner.
राजकीय महारानी सुदर्शन कन्या महाविद्यालय के "इतिहास विभाग" के विद्यार्थियों ने विभागाध्यक्ष सुनीता बिश्नोई के नेतृत्व में राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित "ऊंटों का इतिहास विरासत के साथ" प्रदर्शनी का अवलोकन किया । महाविद्यालय प्राचार्य प्रो. नवदीप सिंह बैंस ने इस भ्रमण के लिए विद्यार्थियों को हरी झंडी दिखाते हुए कहा कि इस प्रकार के भ्रमण से विद्यार्थियों के अंदर इतिहास को जानने की उत्सुकता व रूचि पैदा होती है जिससे उनका ज्ञान स्थाई होता है। इतिहास के विद्यार्थियों के लिए ‘प्रदर्शनी भ्रमण’ ज्ञान को स्थायी 'अनुभव' में बदलने का एक शक्तिशाली साधन है, जो उन्हें केवल जानकारी नहीं, बल्कि समझ और जुड़ाव प्रदान करता है।
प्रदर्शनी में डॉ नितिन गोयल द्वारा आदिकाल से आधुनिक काल तक भारतीय इतिहास में ऊंटों के महत्व को समझाते हुए विद्यार्थियों को ऊंटों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की । प्रदर्शनी के माध्यम से पंचतंत्र में ऊंट सवार की कहानी, राजस्थान में लोक देवता पाबूजी की फड़ में ऊंट का निरूपण, सोमनाथ मंदिर में ऊंट का सामग्री वाहक के रूप में उपयोग, रियासत काल में रायका ढाणियों में ऊंट की प्रभावी उपस्थिति, महाराजा गंगा सिंह द्वारा ऊंट की सेना "गंगा रिसाला" का निर्माण व गंग नहर के निर्माण में ऊंट का प्रयोग, ऊंटनी के दूध का प्रयोग डायबिटीज के मरीजों के लिए दवा के रूप में उपयोग की जानकारी प्रदर्शनी के माध्यम से प्रभावी रूप से दी गई।
ऊंट पर आयोजित ऊंट का इतिहास: विरासत के साथ प्रदर्शनी को विद्या प्रतिष्ठान के अंदर लगाया गया है। 6000 साल पुराने ऊंट के इतिहास को जो विभिन्न सांस्कृतिक सोपानों से होकर गुजरा है जो हमारी सांस्कृतिक अस्मिता व ऐतिहासिक स्मृति की पहचान का स्रोत है।
सुनीता बिश्नोई ने प्रदर्शनी संकलनकर्ता डॉ नितिन गोयल का आभार प्रकट करते हुए कहा कि पश्चिमी राजस्थान की अर्थव्यवस्था में ऊंट अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
इतिहास के छात्रों के लिए यह प्रदर्शनी प्रत्यक्ष अनुभव, गहन समझ, प्रेरणा, व्यावहारिक ज्ञान और महत्वपूर्ण कौशल (जैसे आलोचनात्मक सोच, टीमवर्क) ज्ञान प्रदान करती हैं, जिससे किताबें पढ़कर सीखी गई जानकारी को वास्तविक और यादगार बना दिया है।इस प्रदर्शनी ने विद्यार्थियों को अतीत से जुड़ने और इतिहास को एक जीवंत विषय के रूप में समझने में मदद की है, जो कक्षा कक्ष में किए गए सैद्धांतिक अध्ययन से संभव नहीं होता। इस प्रदर्शनी से इतिहास के विद्यार्थियों में इतिहास में ऊंट की भूमिका को नजदीक से देखने व समझने का मौका मिला ।

