"कलम भी उनकी, कानून भी उनका—अब देश की नियति में हिस्सा भी महिलाओं का, भाजपा नेता पूजा मोहता ने बिल का किया स्वागत
RNE Bikaner.
देहात भाजपा प्रवक्ता डॉ पूजा मोहता ने कहा है कि भारत की विकास यात्रा में नारी शक्ति का योगदान केवल एक अध्याय नहीं, बल्कि पूरी पुस्तक का आधार है। 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' मात्र एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि नेतृत्व के आकाश में महिलाओं के बढ़ते कदमों की वो आहट है, जो अब पंचायत की चौपाल से लेकर संसद की दहलीज तक नए भारत की पटकथा लिखेगी। ३३ प्रतिशत आरक्षण केवल एक संख्या नहीं, बल्कि उन करोड़ों महिलाओं की सामूहिक जीत है जिन्होंने दशकों तक अपने हक के लिए संघर्ष किया है।
डॉ मोहता ने कहा कि राजस्थान की यह वीर धरा गवाह है कि यहाँ की मिट्टी ने हमेशा साहस को जन्म दिया है। पन्नाधाय का बलिदान, रानी पद्मिनी का स्वाभिमान और मीराबाई की भक्ति—ये उदाहरण सिद्ध करते हैं कि बौद्धिक और आत्मिक चेतना पर किसी एक लिंग का अधिकार नहीं है। आज बीकानेर की बेटियाँ खेल के मैदान से लेकर पर्यावरण संरक्षण के आंदोलनों तक अपनी प्रशासनिक क्षमता को सिद्ध कर रही हैं। अब समय 'बेनिफिशियरी' (लाभार्थी) कहलाने का नहीं, बल्कि 'लीडर' (विकास के वाहक) बनकर राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने का है।
उनका कहना था कि आधी आबादी, पूरा हक है। 50 फीसदी की ओर बढ़ते कदम है।यह अधिनियम भारतीय संसदीय इतिहास का वह ऐतिहासिक कानून है, जिसने महिलाओं के लिए राजनीति के द्वार खोले हैं। लेकिन यह तो बस शुरुआत है, अभी मंज़िल और भी ऊँची है। मेरा स्पष्ट मानना है कि "जब देश की आबादी आधी है, तो हक़ भी पूरा होना चाहिए।" आज हमने ३३ प्रतिशत का संकल्प सिद्ध किया है, और आने वाले समय में ५० प्रतिशत की पूर्ण भागीदारी के साथ ही एक समर्थ और समृद्ध भारत की नींव रखी जाएगी।

