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ये रासीसर गांव की भंवरीदेवी है साथ में नाती-पोतियां हैं, जानिये क्या कर रही है पीबीएम हॉस्पिटल में !

 

RNE Bikaner.

पीबीएम हॉस्पिटल परिसर का आचार्य तुलसी कैंसर इंस्टीट्यूट। प्रेक्षा कॉटेज के पास घने पेड़ की छांव में एक पत्थर की बैंच पर रखे कुछ बर्तन। पास खड़ी एक बुजुर्ग महिला और दो किशोरिया को देखकर अचानक नजर ठहर जाती है। ये तीनों वहां मौजूद और आने-जाने वालों की मनुहार कर रही हैं। ‘दिनगै रा भूखा हुवौला, कीं तो खा लो.. नीं तो राबड़ी ई पीय लो, पेट ठंडो रैसी।’ काफी लोग मनुहार मानते हैं। क्षुधा शांत करते हैं। राबड़ी पीकर तृप्त होते हैं।

मन में सवाल उठा! ऐसा क्या है जो दो किशोरियां और एक बुजुर्ग महिला लोगों को मनुहार कर भोजन करवा रही है। जिज्ञासावश पूछ लिया तो महिला ने अपना भंवरीदेवी और गांव शहर के समीप रासीसर बताया। यहां लोगों को भोजन करवाने की कैसे सूझी! सवाल पर कहा, बस यूं ही। 

मतलब यह कि जब दो केले बांटते हुए भी फोटो खिंचवाकर उसका प्रचार करने, बैनर लगाकर लोगों को सेवा का प्रदर्शन करने का दौर है वहां ये परिवार चुपचाप बिना किसी आयोजन के भोजन करवाकर संतुष्टि पा रहा है। इससे भी बड़ी बात यह है कि अपने घर से खुद भोजन बनाकर लाए हैं। साथ में डिस्पोजेबल प्लेट्स लाए हैं। अपने हाथों से ही खाना खिला रहे हैं।

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