Gokul Prasad Purohit को श्रद्धांजलि, भीलवाड़ा के मांडलगढ़ और बीकानेर से रहे थे विधायक
मुरलीधर व्यास को हरा बीकानेर में पहली बार दिलाई कांग्रेस को जीत
RNE Bikaner
बीकानेर में कांग्रेस को पहली बार जीत दिलाने वाले पूर्व विधायक, स्वतंत्रता सेनानी और जननेता स्वर्गीय गोकुल प्रसाद पुरोहित की पुण्यतिथि पर उनके प्रतिमा स्थल पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जनार्दन कल्ला, मकसूद अहमद, श्री जी पुरोहित सहित बड़ी संख्या में पुरोहित समर्थक, कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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सभा के दौरान नेताओं और कार्यकर्ताओं ने स्वर्गीय गोकुल प्रसाद पुरोहित की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके जनसेवा, श्रमिक हितों के लिए किए गए संघर्ष और राजनीतिक योगदान को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि पुरोहित ने अपने सार्वजनिक जीवन में हमेशा आमजन की आवाज को बुलंद किया और बीकानेर की राजनीति में एक नई दिशा देने का काम किया।
इस अवसर पर गोकुल प्रसाद स्मारक समिति के अजय गोपाल पुरोहित ने कहा कि स्वर्गीय गोकुल प्रसाद पुरोहित केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि जनहित और सामाजिक सरोकारों के प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को उनके संघर्ष, सिद्धांतों और जनसेवा के आदर्शों से प्रेरणा लेनी चाहिए तथा उनके विचारों को आगे बढ़ाना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

गोकुल प्रसाद पुरोहित होने के मायने :
यदि ऐतिहासिक संदर्भ में देखा जाए तो गोकुल प्रसाद पुरोहित की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धियों में से एक बीकानेर विधानसभा सीट पर कांग्रेस की पहली जीत मानी जाती है। वर्ष 1967 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने तत्कालीन दिग्गज नेता मुरलीधर व्यास को पराजित कर बीकानेर सीट कांग्रेस की झोली में डाली थी। उस दौर में बीकानेर की राजनीति में यह परिणाम बेहद महत्वपूर्ण माना गया था।
दरअसल स्वर्गीय गोकुल प्रसाद पुरोहित राजस्थान कांग्रेस के उन जननेताओं में रहे जिन्होंने संगठन और जनाधार के बल पर अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने 1962 में भीलवाड़ा जिले की माण्डल विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज कर पहली बार राजस्थान विधानसभा में प्रवेश किया। इसके बाद 1967 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बीकानेर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ते हुए मुरलीधर व्यास को पराजित किया। यह बीकानेर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की पहली जीत थी, जिसने स्थानीय राजनीति में नया इतिहास रचा। 1967 से 1972 तक वे बीकानेर के विधायक रहे और इस दौरान विधानसभा की विभिन्न समितियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। मजदूर हितों, जनसरोकारों और कांग्रेस संगठन को मजबूत करने में उनका योगदान आज भी याद किया जाता है। हालांकि वे बाद में कांग्रेस की भीतरघात वाली राजनीति से इतने व्यथित हुए कि उन्होंने पार्टी छोड़ निर्दलीय चुनाव लड़ा लेकिन सफलता नहीं मिली।

गोकुल प्रसाद का राजनीतिक जीवन :
गोकुल प्रसाद पुरोहित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े रहे और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के सदस्य भी थे। राजनीति में आने से पहले और साथ-साथ वे मजदूर संगठनों से भी जुड़े रहे तथा श्रमिकों की समस्याओं को उठाने के लिए सक्रिय रहे।

मांडलगढ़ में शिवचरण दास को हराया :
उनका राजनीतिक सफर वर्ष 1962 में शुरू हुआ, जब वे कांग्रेस के टिकट पर भीलवाड़ा जिले की माण्डल विधानसभा सीट से निर्वाचित होकर तीसरी राजस्थान विधानसभा (1962-1967) के सदस्य बने। इस चुनाव में उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी शिवचरण दास को 7,783 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया। विधानसभा में रहते हुए उन्होंने प्राक्कलन समिति (1962-63) तथा जन लेखा समिति (1964-65) के सदस्य के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

बीकानेर में मुरलीधर का विजय रथ रोका :
वर्ष 1967 में गोकुल प्रसाद पुरोहित ने बीकानेर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर चौथी राजस्थान विधानसभा (1967-1972) में प्रवेश किया। उन्होंने 16,581 मत प्राप्त कर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी मुरलीधर व्यास को 4,368 मतों से हराया। मुरलीधर व्यास इससे पहले लगातार दो चुनाव जीते थे। विधायक रहते हुए गोकुल प्रसाद याचिका समिति के सदस्य रहे तथा 1968 से 1971 तक राजकीय उपक्रम समिति में भी सक्रिय भूमिका निभाई।


