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वीरेन्द्र बेनीवाल के ‘मुंह में राम बगल में छुरी’ बयान से बीकानेर की ग्रामीण राजनीति में हलचल

लोग पूछ रहे हैं किनकी ओर है बेनीवाल का इशारा
 

RNE Bikaner. 
 

पंचायत एवं निकाय चुनाव की आहट के साथ ही जहां प्रदेशभर में राजनीति गरमाई है वहीं बीकानेर की भी ग्रामीण राजनीति में काफी चहल-पहल नजर आने लगी है। सोमवार को हुए भीमसेन चौधरी जयंती समारोह के पुष्पांजलि कार्यक्रम में भी चुनावों की छाप दिखी। कड़ाके की ठंड एवं कोहरे के बावजूद यहां बड़ी तादाद जिलेभर के गांवों से लोग पहुंचे। इनमें अधिकांश चेहरे ऐसे रहे जो पंचायत चुनाव मंे किसी न किसी पद के लिए दावेदार माने जा रहे हैं या किसी दावेदार के समर्थक हैं।

इन सबके बीच स्व.भीमसेन चौधरी के पुत्र एवं पूर्व मंत्री वीरेन्द्र बेनीवाल के एक बयान ने माहौल में राजनीतिक गरमाहट के साथ हलचल पैदा कर दी। दरअसल जयंती के मौके पर पत्रकार लक्ष्मण राघव ने बेनीवाल की सक्रियता बढ़ने को लेकर सवाल किया। इसके साथ ही उनको लेकर ‘मित्रों’ की ओर से की जा रही बातों पर इशारा किया। इसके जवाब में बेनीवाल ने कहा, वे ‘मुंह में राम, बगल में छुरी’ वाले मित्र हैं। मैं नियमित सक्रिय था। अभी  हूं और आगे भी सक्रिय रहूंगा। वे किसानों की उपेक्षा और बदहाली का आरोप लगाते हुए भाजपा की भजनलाल सरकार पर भी हमलावर हुए।
 

ऐसे में बेनीवाल के ‘मुंह में राम, बगल में छुरी’ वाले बयान और इन दिनों बढ़ी अत्यधिक सक्रियता ने जिले की ग्रामीण राजनीति में हलचल पैदा की है। पिछले चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय मैदान में उतरने और ताकत दिखाने के बाद पार्टी ने उन्हें वापस कांग्रेस में शामिल किया है। इसके साथ बीकानेर की ग्रामीण राजनीति में सर्वाधिक वर्चस्व वाले नेता रहे रामेश्वर डूडी के निधन के बाद बने हालात में बेनीवाल की बढ़ी सक्रियता ने कांग्रेस में कई नेताओं के माथे पर सिलवटें ला दी हैं।
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हालांकि भविष्य की राजनीतिक तस्वीर के बारे में फिलहाल कुछ कहा नहीं जा सकता लेकिन यह संदेश जिले से लेकर प्रदेश तक जाता दिख रहा है कि बीकानेर की ग्रामीण राजनीति में वीरेन्द्र बेनीवाल को नजरअंदाज कर ज्यादा सुखद नतीजे ले पाना आसान नहीं है।
 

दो बार विधायक और मंत्री रहे बेनीवाल : 
 

वीरेंद्र बेनीवाल राजस्थान की 12 वीं और 13 वीं विधानसभा में दो बार विधायक रहे, इसके साथ ही अशोक गहलोत सरकार में नवंबर 2011 से दिसंबर 2012 तक राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार रहे। उन्हें गृह एवं यातायात जैसे प्रमुख विभाग दिए गए थे। राजस्थान विधानसभा में सरकारी उप मुख्य सचेतक रहे। संगठन में भी वे प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष हैं।

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