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Container Manufacturing & Promotion : 10,000 करोड़ की योजना, कंटेनर निर्माण का ग्लोबल हब बनेगा भारत!

 

Rudra News Express New Delhi. 

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10,000 करोड़ रुपये के बजट वाली ‘कंटेनर विनिर्माण संवर्धन योजना’ (CMPS) को मंजूरी दी है। यह योजना का उद्देश्य कंटेनर निर्माण में आयात पर निर्भरता कम करना, घरेलू उत्पादन बढ़ाना और देश की समुद्री एवं लॉजिस्टिक्स आपूर्ति शृंखला को मजबूत करना है।

 

क्या है योजना : 

कंटेनर मेन्यू फेक्चरिंग प्रमोशन स्कीम (CMPS) केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित की गई थी। इस योजना के तहत नई निर्माण इकाइयां स्थापित करने के साथ मौजूदा इकाइयों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने को प्रोत्साहन दिया जाएगा। सरकार का अनुमान है कि इससे भारत में विश्वस्तरीय कंटेनर निर्माण का प्रतिस्पर्धी इकोसिस्टम विकसित होगा। योजना के तहत कंटेनर निर्माताओं को वित्तीय सहायता, उत्पादन लागत में राहत और गुणवत्ता परीक्षण की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी।

ब्याज सब्सिडी: 

859 करोड़ रुपये के प्रावधान वाली ‘इंटरेस्ट सबवेंशन असिस्टेंस’ योजना के तहत पात्र पूंजीगत ऋण पर सालाना 3 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी दी जाएगी। इसका लाभ नई इकाइयां स्थापित करने और मौजूदा इकाइयों का विस्तार करने वाले पात्र निर्माताओं को मिलेगा।

परिचालन व्यय सहायता: 

8,891 करोड़ रुपये के प्रावधान से पात्र निर्माताओं द्वारा बनाए और बेचे जाने वाले कंटेनरों को वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसका उद्देश्य उत्पादन लागत के अंतर को कम कर भारतीय कंटेनरों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाना है।

परीक्षण-प्रमाणन:

150 करोड़ रुपये से साझा परीक्षण एवं प्रमाणन सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इनमें ‘डायनामिक लॉन्गिट्यूडिनल इम्पैक्ट टेस्टिंग’ जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।

7.5 लाख TEU तक उत्पादन लक्ष्य : 

सरकार की योजना घरेलू कंटेनर निर्माण क्षमता को मौजूदा स्तर से लगभग दस गुना बढ़ाकर सालाना 7.5 लाख TEU तक पहुंचाने की है। TEU कंटेनर परिवहन में इस्तेमाल होने वाली मानक क्षमता इकाई है। इस विस्तार से भारत को गुणवत्तापूर्ण शिपिंग कंटेनरों के निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने और समुद्री व्यापार की आपूर्ति शृंखला को मजबूती देने में मदद मिलने की उम्मीद है।

53 हजार रोजगार : 

करीब 3,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है। कंटेनर निर्माण से जुड़े सहायक उद्योगों को भी इसका लाभ मिल सकता है। इनमें कॉर्नर कास्टिंग, विशेष स्टील, लकड़ी के फ्रेम और पेंट जैसे उत्पादों की आपूर्ति करने वाले उद्योग शामिल हैं।

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