एक मेडिकल रिपोर्ट ने उजाड़ दी मासूम की दुनिया, पुलिस पूछताछ और मारपीट के आरोपों से मचा बवाल
RNE Chhattisgarh.
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मासिक धर्म संबंधी परेशानी का इलाज कराने अस्पताल पहुंची एक नाबालिग किशोरी को मेडिकल रिपोर्ट में गर्भवती बता दिया गया। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस हरकत में आई, किशोरी और उसके परिजनों से घंटों पूछताछ की गई, यहां तक कि किशोरी को रातभर थाने में रखने और परिजनों के साथ कथित मारपीट के आरोप भी सामने आए। बाद में जब सोनोग्राफी और कई अन्य जांच हुईं तो गर्भवती होने की पूरी कहानी झूठी साबित हो गई।
इलाज कराने गई थी, आरोपों के घेरे में आ गई :
परिजनों के अनुसार किशोरी पिछले करीब एक वर्ष से मासिक धर्म संबंधी समस्या से जूझ रही थी। इलाज के लिए उसे सोमनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां हुई प्रारंभिक जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे गर्भवती होने की आशंका जताई और पुलिस को सूचना दे दी। इसके बाद मामला अचानक अपराध जांच में बदल गया। परिवार का आरोप है कि बिना पूरी पुष्टि किए पुलिस ने किशोरी और उसके परिजनों को संदेह के घेरे में ले लिया।

थाने में पूछताछ, रातभर रोकने के आरोप :
परिजनों का कहना है कि किशोरी को जांच और पूछताछ के नाम पर थाने बुलाया गया। आरोप है कि उसे देर रात तक थाने में रखा गया और परिवार के सदस्यों से भी लगातार पूछताछ की गई। कुछ परिजनों ने पुलिस पर अभद्र व्यवहार और मारपीट तक के आरोप लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन शिकायत के बाद मामला जांच के दायरे में आ गया है।
सोनोग्राफी और चार टेस्ट ने खोली सच्चाई :
घटनाक्रम से परेशान परिवार ने दूसरी जगह चिकित्सकीय जांच करवाई। सोनोग्राफी और चार अलग-अलग यूरिन प्रेग्नेंसी टेस्ट कराए गए। सभी रिपोर्टें निगेटिव आईं और यह स्पष्ट हो गया कि किशोरी गर्भवती नहीं थी।यानी जिस मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर पूरा विवाद खड़ा हुआ, वही रिपोर्ट गलत साबित हो गई।

मासूम पर पड़ा गहरा मानसिक असर :
परिवार का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम ने किशोरी को मानसिक रूप से तोड़ दिया है। एक तरफ स्वास्थ्य समस्या और दूसरी तरफ गर्भवती होने के आरोप, पुलिस पूछताछ और सामाजिक चर्चाओं ने उसे गहरे तनाव में डाल दिया। परिजनों के मुताबिक, बच्ची अब लोगों के सामने आने से भी डर रही है और लगातार मानसिक दबाव महसूस कर रही है।
पुलिस जांच शुरू, जिम्मेदारी तय होने का इंतजार :
मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक ने जांच के आदेश दिए हैं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर के अनुसार अस्पताल से प्राप्त सूचना के आधार पर प्रारंभिक कार्रवाई की गई थी। अब पूरे मामले की जांच डीएसपी स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि मेडिकल रिपोर्ट में गलती कैसे हुई, पुलिस की कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार थी या नहीं, और कथित प्रताड़ना व मारपीट के आरोपों में कितनी सच्चाई है।

