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Bikaner Cyber Fraud : बीकानेर का सरकारी कर्मचारी साइबर ठगों का साथी, 05 करोड़ की जालसाजी 

Bikaner Cyber Fraud: PWD का UDC  साइबर ठगों का साथी, 5 करोड़ की जालसाजी
 

RNE Bikaner.
बीकानेर के लूणकरणसर में PWD विभाग में तैनात UDC अमित उर्फ राकेश विश्नोई का नाम एक ऐसे साइबर नेटवर्क से जुड़ा मिला है, जिसने बैंक खातों के गलत इस्तेमाल से लाखों-करोड़ों की ठगी को अंजाम दिया। 

अमित विश्नोई पर आरोप है कि वह बैंक कर्मी बनकर लोगों का विश्वास जीतता था। विशेष रूप से फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिकों से उसके संपर्क थे, जिनसे वह आधार, पैन और अन्य दस्तावेज जुटाकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवा देता था। इन खातों को वह आगे साइबर ठगों को बेच देता था, जो इन्हें फर्जी लेनदेन और ऑनलाइन ठगी के लिए इस्तेमाल करते थे।

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि इन खातों के जरिए करीब पाँच करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी को अंजाम दिया गया। पीड़ितों से धोखे से ऐंठे गए पैसे पहले इन खातों में आते, फिर कई स्तरों पर ट्रांसफर होते हुए गायब कर दिए जाते। सरकारी नौकरी में होने के कारण आरोपी पर लोग भरोसा कर बैठते थे, और यही भरोसा इस पूरे फर्जीवाड़े की रीढ़ बन गया।

बीकानेर साइबर यूनिट की टीम ने कई दिनों तक संदिग्ध खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शनों की निगरानी की। 
साइबर प्रभारी रमेश सर्वटा और उनकी टीम ने तकनीकी विश्लेषण के आधार पर इस नेटवर्क की गतिविधियों को जोड़कर आरोपी तक पहुंचने की रणनीति तैयार की। बैंक खातों के असामान्य लेनदेन, KYC विवरणों में गड़बड़ी और एक ही व्यक्ति से जुड़े कई संदिग्ध नंबरों ने पुलिस को शक की दिशा दी, जो अंततः गिरफ्तारी तक पहुंची।

 पुलिस लगातार ठगों के नेटवर्क पर प्रहार कर रही है। फर्जी बैंक खाते, डिजिटल वॉलेट और सिम कार्ड के जरिए आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

यह मामला महज एक कर्मचारी तक सीमित नहीं लग रहा। पुलिस अन्य खातों, कनेक्शनों और उससे जुड़े संभावित सहयोगियों के बारे में जांच कर रही है। शुरुआती अनुमान के अनुसार, यह नेटवर्क और गहरा तथा व्यापक हो सकता है। कई श्रमिकों को भी यह जानकारी नहीं थी कि उनके नाम से खोले गए खाते अपराध में इस्तेमाल हो रहे हैं।

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