फैसला : हदां के चर्चित हमले में 06 को 03 से 05 साल की सजा, हत्या के प्रयास का आरोप नहीं हुआ साबित!
हदां हमले में फैसला : सेशन कोर्ट ने धारा 307 से बरी किया, अन्य धाराओं में सजा; पंचीलाल बागुड़ा को 5 साल, पांच आरोपियों को 3 साल की कैद
Rudra News Express Bikaner.
बीकानेर की सेशन कोर्ट ने वर्ष 2023 के एक मारपीट और वाहन चढ़ाने के प्रयास से जुड़े मामले में छह अभियुक्तों को दोषी माना है। कोर्ट ने हत्या के प्रयास यानी धारा 307 भारतीय दंड संहिता का आरोप संदेह से परे साबित नहीं होने पर सभी अभियुक्तों को इस आरोप से दोषमुक्त कर दिया, लेकिन धारा 325/149, 143, 341, 323 और 427 के अपराधों में दोषसिद्ध किया है। निर्णय 2 सितंबर 2026 को सुनाया गया था, जबकि सजा के बिंदु पर सुनवाई के बाद दंडादेश 16 सितंबर 2026 को जारी किया गया।
मामला 22 दिसंबर 2023 का है। अभियोजन के अनुसार खारिया मल्लीनाथ क्षेत्र में रूकला रोड स्थित सुथारों की ढाणी के पास महेंद्र कुमार और उसका भाई रामदयाल पिकअप से जा रहे थे। आरोप था कि कई लोग वाहनों से वहां पहुंचे और उनकी पिकअप को टक्कर मारकर रास्ता रोका। इसके बाद रामदयाल के साथ लाठी-सरियों से मारपीट की गई और उसे वाहन में डालकर ले जाया गया। अभियोजन ने आरोप लगाया कि बाद में रामदयाल को जमीन पर डालकर उसके ऊपर वाहन चढ़ाया गया।
इस मामले में पुलिस थाना हदां में मुकदमा संख्या 80/2023 दर्ज किया गया था। शुरुआती तौर पर इसमें धारा 365, 307, 149, 323, 427 और 382 के तहत मामला दर्ज हुआ था। जांच के बाद मदनलाल, राजाराम, जगदीश प्रसाद, रामेश्वरलाल, रामदयाल और पांचीलाल बागुड़ा के खिलाफ धारा 307, 323, 341, 427 और 143 के तहत आरोप पत्र पेश किया गया।
15 गवाहों के बयान हुए :
मामले में अभियोजन की ओर से कुल 15 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इनमें शिकायतकर्ता महेंद्र कुमार और घायल रामदयाल भी शामिल थे। बचाव पक्ष ने अभियुक्तों को झूठा फंसाए जाने और पुरानी रंजिश का तर्क दिया।
कोर्ट ने साक्ष्यों का विश्लेषण करते हुए धारा 307 के आरोप को संदेह से परे साबित नहीं माना। वहीं मारपीट और चोट पहुंचाने से जुड़े अन्य आरोपों को प्रमाणित मानते हुए धारा 325/149, 143, 341, 323 और 427 के तहत दोषसिद्धि की।
पांच को तीन साल तक की सजा :
मदनलाल, राजाराम, जगदीश प्रसाद, रामेश्वरलाल और रामदयाल को धारा 325 के तहत तीन वर्ष के साधारण कारावास और 15 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। इसके अलावा धारा 143 में छह माह की सजा व एक हजार रुपये जुर्माना, धारा 323 में एक वर्ष की सजा व दो हजार रुपये जुर्माना, धारा 427 में दो वर्ष की सजा व पांच हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 341 में एक माह की सजा व 500 रुपये जुर्माना लगाया गया। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
छठे अभियुक्त पांचीलाल बागुड़ा को भी इन्हीं धाराओं में दोषी ठहराया गया, लेकिन उसके मामले में धारा 325 के तहत पांच वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई। कोर्ट के आदेश में उसके खिलाफ पूर्व में दर्ज 14 आपराधिक मामलों का भी उल्लेख किया गया है।
जुर्माने से 50 हजार रुपये पीड़ित को मिलेंगे :
कोर्ट ने आदेश दिया कि अभियुक्तों द्वारा इस मामले में पहले पुलिस या न्यायिक अभिरक्षा में बिताई गई अवधि को धारा 428 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत सजा में समायोजित किया जाएगा। साथ ही जुर्माने की राशि वसूल होने पर उसमें से 50 हजार रुपये घायल को प्रतिकर के रूप में दिए जाएंगे।
न्यायाधीश अश्विनी विज की अदालत, इन्होंने की पैरवी :
यह दंडादेश बीकानेर के सेशन न्यायाधीश अश्वनी विज की अदालत ने 16 सितंबर 2026 को खुले न्यायालय में लिखकर सुनाया और हस्ताक्षरित किया। मामले में राज्य की ओर से लोक अभियोजक राधेश्याम सेवग ने पैरवी की, जबकि अभियुक्तगण की ओर से अधिवक्ता सुरेन्द्रपाल शर्मा तथा परिवादी की ओर से अधिवक्ता हेमाराम जाखड़ ने पक्ष रखा। सजा के दौरान भी लोक अभियोजक और परिवादी के अधिवक्ता ने अभियुक्तों की ओर से की गई नरमी/परिवीक्षा की मांग का विरोध किया था।

