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Ayurvedic medicine : अब आयुर्वेदिक दवाई पर भी बारकोड होगा, स्कैन करते ही उसका फॉर्मला देख सकेंगे

 

हरियाणा में आयुष विभाग अब लाइसेंस और दवाओं की गुणवत्ता से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को डिजिटल करने जा रहा है। आयुष मंत्रालय के 'ई-औषधि' पोर्टल के जरिए नया लाइसेंस, लोन लाइसेंस और रिन्यूअल समेत सभी काम ऑनलाइन होंगे। प्रदेश के 1000 से ज्यादा ड्रग मैन्युफैक्चरर्स को इस व्यवस्था में शिफ्ट होना होगा।

पोर्टल लागू होते ही हर आयुर्वेदिक दवा को एक यूनिक बारकोड मिलेगा। इसे स्कैन करते ही दवा की पूरी कंपोजिशन और लाइसेंस डिटेल मोबाइल पर देखी जा सकेगी। विभाग का दावा है कि इससे नकली या मानक से कम गुणवत्ता वाली दवाओं पर रोक लगेगी और पारदर्शिता बढ़ेगी। रजिस्ट्रार डॉ. दिलीप मिश्रा के मुताबिक, नेशनल लेवल पर जनवरी में अहमदाबाद में ट्रेनिंग हो चुकी है।

मंत्रालय जल्द ही पोर्टल को नोटिफाई करेगा। जिन कंपनियों के पास पहले से लाइसेंस हैं, उन्हें भी डिजिटल माइग्रेशन करना होगा। हालांकि उनका पुराना लाइसेंस नंबर ही बरकरार रहेगा, केवल स्वरूप डिजिटल होगा। अब किसी भी नई दवा को बाजार में उतारने से पहले उसकी फॉर्मूलेशन 'ई-औषधि' पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। डेटा सीधे विभाग की एक्सपर्ट कमेटी के पास जाएगा। कमेटी की मंजूरी के बाद फाइल हेडक्वार्टर पहुंचेगी। फिर संबंधित जिला आयुर्वेदिक अधिकारी को भेजी जाएगी।

जनवरी में अहमदाबाद में ट्रेनिंग दी गई

नई व्यवस्था में फॉर्मूलेशन अपलोड होते ही यूनिक बारकोड जेनरेट होगा। ग्राहक मोबाइल से स्कैन कर पूरी कंपोजिशन देख सकेंगे। लाइसेंस और निर्माता की डिटेल भी उपलब्ध रहेगी। पोर्टल संचालन के लिए जनवरी में अहमदाबाद में ट्रेनिंग आयोजित की गई थी, जिसमें हरियाणा के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

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