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Car Re-Registration : सेकेंड हैंड कार ध्यान से खरीदें! चेसी नंबर बदलकर दोबारा करवा रहे रजिस्ट्रेशन

सेकेंड हैंड कार खरीद रहे हैं तो सावधान। यह कार चोरी की हो सकती है। चेसिस नंबर बदलकर चोरी की कार बेचने वाले ऐसे ही एक गिरोह का दिल्ली पुलिस ने पर्दाफाश किया है।
 

सेकेंड हैंड कार खरीद रहे हैं तो सावधान। यह कार चोरी की हो सकती है। चेसिस नंबर बदलकर चोरी की कार बेचने वाले ऐसे ही एक गिरोह का दिल्ली पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस गिरोह का मास्टर माइंड जालंधर का है। दो दिन पहले जालंधर आई दिल्ली पुलिस अब उन लोगों का पता लगा रही है, जिन्हें दिल्ली से चोरी हुई लग्जरी गाड़ियां बेची गई।

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने 25 दिसंबर को जालंधर से मास्टर माइंड दमनदीप सिंह को गिरफ्तार किया था। उसके परिसर से 4 किआ सेल्टोस बरामद की गई, जो दिल्ली से चोरी हुई थीं। दमनदीप की गिरफ्तारी के बाद 18 जनवरी को गिरोह के दो और सदस्यों चंडीगढ़ निवासी अरविंद शर्मा और दिल्ली निवासी अमनदीप को गिरफ्तार किया गया। इनकी निशानदेही पर 16 महंगी चोरी की कारें बरामद की गई।

शातिर तरीका अपनाता है गिरोह 

गैंग बहुत ही शातिर तरीके से काम करता था। दिल्ली-एनसीआर से डिमांड के हिसाब से लग्जरी गाड़ियां चुराई जाती थीं। फिर इन चोरी की गाड़ियों के इंजन और चेसिस नंबर को मिटा दिया जाता था। फिर एक्सीडेंट में पूरी तरह बर्बाद हो चुकी गाड़ियों के चेसिस नंबर का इस्तेमाल कर, इन चोरी की गाड़ियों का पंजाब और हिमाचल में दोबारा रजिस्ट्रेशन कराया जाता था, ताकि ये बिल्कुल नई और असली लगें।

इसके बाद बी.टेक पास अरविंद शर्मा बैंकों के फर्जी एनओसी और सेल लेटर तैयार कारों के  करता था। पुलिस ने बताया कि आरोपी अब तक 100 गाड़ियों को बेचने की बात कबूल चुके हैं। दमनदीप से पता चला कि उसने पीतमपुरा के रहने वाले अमनदीप के जरिए दिल्ली में नकली रजिस्ट्रेशन नंबर वाली कई चोरी की गाड़ियों बेची हैं। इसी का पता पुलिस लगा रही है। पुलिस अब पंजाब में सेकेंड हैंड गाड़ियां खरीदने वालों का पता लगा रही है।

शोरूम का मालिक ही सिंडिकेट चला रहा

दमनदीप सिंह जालंधर में पुरानी कारों का शोरूम चलाता था और इस पूरे सिंडिकेट का मास्टरमाइंड है अरविंद शर्मा, चंडीगढ़ का है। वह संगरूर से बीटेक ग्रेजुएट है। लुधियाना की एक साफ्टवेयर कंपनी में काम करता था। 2019 से वह वाहनों के जाली दस्तावेज बना रहा था। अमनदीप दिल्ली के कीर्ति नगर में फर्नीचर की दुकान चलाता है. यह ग्राहकों को फंसाने और गाड़ियां ठिकाने लगाने का काम करता था।

ऐसे पहचानें कार चोरी की तो नहीं है

जब तक चेसिस नंबर, आरसी, इंजन नंबर और ऑनलाइन रिकॉर्ड तीनों क्लियर न हों, सौदा फाइनल न करें। कार में एक ही चेसिस नंबर कई जगह होता है। सभी जगह एक जैसा होना चाहिए। आरसी में लिखा चेसिस नंबर और गाड़ी पर खुदा नंबर मैच होना चाहिए।

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