Hub & Spoke हवाई सेवा : विदेश यात्रा आसान, अब दिल्ली में नहीं उठाना पड़ेगा सामान, वाराणसी से देश की पहली "हब एंड स्पोक" हवाई सेवा शुरू
RNE Varanasi-New Delhi.
India के विमानन क्षेत्र में एक नई शुरुआत करते हुए भारत की पहली हब एंड स्पोक" (Hub and Spoke) हवाई सेवा का शुभारंभ वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, बाबतपुर से किया गया। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री *राम मोहन नायडू किंजारापु ने इस महत्वाकांक्षी व्यवस्था का उद्घाटन किया और इसे भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक कदम बताया।
नई व्यवस्था के तहत वाराणसी एयरपोर्ट को "प्राइमरी स्पोक" के रूप में विकसित किया गया है, जो यात्रियों को दिल्ली जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय "हब" एयरपोर्ट से जोड़ते हुए विदेश यात्रा को पहले से कहीं अधिक आसान बनाएगा।
क्या है 'हब एंड स्पोक' मॉडल?
हब एंड स्पोक मॉडल को समझने के लिए साइकिल के पहिए का उदाहरण लिया जा सकता है। हब (Hub) यानी मुख्य केंद्र, जैसे दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे बड़े एयरपोर्ट। स्पोक (Spoke) यानी छोटे या क्षेत्रीय एयरपोर्ट, जैसे वाराणसी।
इस व्यवस्था में यात्री पहले अपने नजदीकी स्पोक एयरपोर्ट से हब एयरपोर्ट तक पहुंचते हैं और वहां से दुनिया के विभिन्न देशों के लिए कनेक्टिंग उड़ानें लेते हैं। लेकिन नई प्रणाली में यात्री को हब एयरपोर्ट पर दोबारा औपचारिकताओं से नहीं गुजरना पड़ेगा।
यात्रियों को क्या मिलेगा फायदा?
केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू ने बताया कि अब वाराणसी से विदेश जाने वाले यात्रियों को दिल्ली पहुंचकर दोबारा बैगेज लेने, चेक-इन करने, टर्मिनल बदलने या इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी करने की जरूरत नहीं होगी।
नई व्यवस्था के तहत वाराणसी में ही अंतरराष्ट्रीय चेक-इन होगा। इमिग्रेशन और आवश्यक औपचारिकताएं यहीं पूरी की जाएंगी। सामान सीधे अंतिम विदेशी गंतव्य तक बुक होगा। दिल्ली एयरपोर्ट पर केवल ट्रांजिट प्रक्रिया होगी। यात्रा का समय और परेशानी दोनों कम होंगे। बुजुर्गों, महिलाओं और पहली बार विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों को विशेष राहत मिलेगी।
पहली विशेष उड़ान हुई रवाना :
योजना के तहत एयर इंडिया की विशेष उड़ान वाराणसी से दिल्ली के लिए रवाना हुई। इसके बाद यात्रियों को दिल्ली से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के जरिए विदेश भेजा गया। इस पूरी प्रक्रिया में यात्रियों को एकीकृत यात्रा अनुभव उपलब्ध कराया गया।
पूर्वांचल और बिहार के यात्रियों को बड़ा लाभ :
Varanasi से नई व्यवस्था का सबसे अधिक फायदा पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को मिलेगा। अब उन्हें विदेश जाने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट पर लंबी प्रक्रियाओं और अतिरिक्त परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वाराणसी एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट केंद्र के रूप में उभरेगा और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।
छह और एयरपोर्टों पर होगा विस्तार :
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में विमानन क्षेत्र का तेजी से विस्तार हुआ है। पिछले 12 वर्षों में देश में एयरपोर्टों की संख्या 74 से बढ़कर 160 से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि अगले छह सप्ताह के भीतर देश के छह अन्य एयरपोर्टों पर भी हब एंड स्पोक मॉडल लागू किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय शहरों को सीधे वैश्विक नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिलेगी।
अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हुई तैयारी :
इस नई सेवा को लागू करने से पहले केंद्र सरकार के एक उच्चस्तरीय दल ने वाराणसी एयरपोर्ट का दो दिवसीय निरीक्षण किया। इस दौरान इमिग्रेशन अधिकारियों और एयरलाइंस कर्मचारियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में दस्तावेज सत्यापन, अंतरराष्ट्रीय यात्रियों का प्रबंधन, सुरक्षा मानक और ट्रांजिट संचालन जैसी प्रक्रियाओं पर विशेष ध्यान दिया गया।
विमानन क्षेत्र में नया अध्याय :
उद्घाटन समारोह के साथ ही वाराणसी एयरपोर्ट देश के विमानन नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित हो गया है। इस नई व्यवस्था से न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी, बल्कि पूर्वांचल को अंतरराष्ट्रीय संपर्क और आर्थिक विकास के नए अवसर भी प्राप्त होंगे। कार्यक्रम में नागरिक उड्डयन सचिव तथा भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के अध्यक्ष पुनीत कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

