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Iran-US Peace Talks : वेंस बोले-बुरी खबर, ईरान ने कहा "खेल अभी बाकी"

America-Iran War : 15 घंटे चली बातचीत फेल, हार्मुज स्ट्रेट पर स्थिति नहीं बदलेगी, तनाव और बढ़ने की आशंका

 

RNE Network. 

पूरी दुनिया को Pakistan में हुई America -Iran की जिस वार्ता से बड़ा हल निकलने की उम्मीद थी वह 15 घंटे लंबी चली वार्ता दोनों और से रखी गई भारी-भरकम शर्तों में दबकर फेल हो गई। अमेरिका ने इसे ईरान के लिये ज्यादा बुरी खबर बताया। दूसरी ओर ईरान की ओर से कहा गया है कि ऐसी शर्तें रखी गई जिन्हें मानना नामुमकिन है। 

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बातचीत के बाद स्पष्ट कहा कि दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं हो पाया है। कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। इस विफलता का असर अमेरिका से ज्यादा ईरान पर पड़ेगा।

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हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच 15 घंटे चली मैराथन वार्ता भले ही किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी, लेकिन बातचीत पूरी तरह टूटने की आशंकाओं के बीच ईरान ने साफ किया है कि वार्ता अभी खत्म नहीं हुई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने वार्ता के बाद कहा कि दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता नहीं हो पाया है, जिसे उन्होंने “बुरी खबर” बताया। वेंस के अनुसार कई अहम मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई, लेकिन सहमति नहीं बन सकी और यह स्थिति ईरान के लिए ज्यादा नुकसानदेह हो सकती है।

वहीं, ईरान ने इस स्थिति को “डेड-एंड” मानने से इनकार किया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा, “खेल अभी खत्म नहीं हुआ है” और दोनों देश अभी भी बातचीत की मेज पर बने रहने के इच्छुक हैं।

वार्ता विफल होने के प्रमुख कारण : 

वार्ता के विफल होने के पीछे दोनों देशों की कड़ी और एक-दूसरे से बिल्कुल अलग मांगें मानी जा रही हैं। अमेरिका जहां ईरान से परमाणु हथियार कार्यक्रम पूरी तरह बंद करने, मिसाइल विकास पर रोक लगाने और क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों को समर्थन खत्म करने की मांग कर रहा है, वहीं ईरान ने सभी अमेरिकी प्रतिबंध हटाने, फ्रीज संपत्तियां जारी करने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने अधिकार को मान्यता देने जैसी शर्तें रखी थीं।

इसके अलावा ईरान ने लेबनान, इराक और यमन में चल रहे हमलों को तुरंत रोकने की भी मांग की थी, जबकि अमेरिका हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बिना शर्त वैश्विक आवागमन के लिए खुला रखने पर जोर दे रहा है।

ऐसे में कहा जा सकता है कि दोनों पक्षों के रुख में भारी अंतर होने के कारण फिलहाल किसी समझौते की संभावना कम नजर आ रही है। ऐसे में मध्य-पूर्व क्षेत्र में तनाव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

ये हैं ईरान की मांगें : 
 

  • सभी प्राथमिक और माध्यमिक अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाया जाए। 
  • केवल ईरान ही नहीं, बल्कि लेबनान (हिजबुल्लाह), इराक और यमन में भी हमलों को तुरंत रोका जाए। 
  • मेरिका में फ्रीज हुई ईरान की अरबों डॉलर की संपत्ति को तुरंत रिलीज किया जाए। 
  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के नियंत्रण और वहां से गुजरने वाले जहाजों से 'ट्रांजिट शुल्क' लेने के अधिकार को मान्यता दी जाए। 
  • शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के लिए यूरेनियम संवर्धन का अधिकार बना रहे। 

यह चाहता है अमेरिका : 
 

अमेरिका बगैर किसी शर्त के होर्मुज स्ट्रेट खुलवाना चाहता है। अमेरिका का कहना है कि वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत और स्थायी रूप से सुरक्षित खोला जाए। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने कहा, ईरानियों के साथ हमारी कई अहम बातचीत हुई है, यह अच्छी खबर है। बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंचे हैं और मुझे लगता है कि यह अमेरिका से कहीं ज़्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है।

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