Kolkata News : परिवार को बचाया, खुद मलबे में दब गईं बुजुर्ग महिला, पति के दर्द से उठा सवाल- आखिर कब तक जर्जर भवनों में दबती रहेगी जिंदगी?
Rudra News Express Kolkata.
लगातार बारिश... रात का सन्नाटा... और अचानक घर की दीवार से मिट्टी और मलबा गिरने की आवाज। खतरा भांपते ही 60 साल से अधिक उम्र की बुजुर्ग महिला ने अपने पति और बच्चों को जगाया। उन्हें किसी तरह घर से बाहर निकाला। परिवार सुरक्षित हो गया, लेकिन वह खुद बाहर नहीं निकल सकीं। कुछ ही पलों में करीब 200 साल पुराना जर्जर मकान भरभराकर गिर पड़ा और वह मलबे में दब गईं।

कोलकाता के जोड़ाबागान इलाके में हुआ यह हादसा सिर्फ एक मकान के ढहने की खबर नहीं है। यह उस मां और पत्नी की आखिरी कोशिश की कहानी है, जिसने अपनी जान की परवाह किए बिना पहले अपने परिवार को बचाया। उसकी मौत के बाद बुजुर्ग पति का दर्द पूरे इलाके में पसरे सन्नाटे को और गहरा कर गया।
पहले परिवार को बचाया, फिर खुद मलबे में दब गईं :
दरअसल जोड़ाबागान के ब्रजदुलाल स्ट्रीट में मंगलवार तड़के करीब पांच बजे हादसा हुआ। बताया जा रहा है कि मकान बेहद पुराना और जर्जर था। रात में ही मिट्टी और मलबा गिरना शुरू हो गया था।

महिला ने खतरे को भांप लिया। उन्होंने पति और बच्चों को जगाया और सुरक्षित बाहर निकलने के लिए कहा। परिवार के सदस्य बाहर निकल गए, लेकिन इसी दौरान मकान का हिस्सा अचानक ढह गया। महिला मलबे की चपेट में आ गईं। बचाव दल ने उन्हें मलबे से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
पत्नी को खोने का दर्द पति की आंखों में :
जिस पत्नी ने आखिरी वक्त में पति और बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए खुद को पीछे कर दिया, उसी पत्नी को बुजुर्ग पति ने अपनी आंखों के सामने खो दिया। हादसे के बाद उनका दर्द देखकर आसपास मौजूद लोग भी भावुक हो गए।

किसी ने शायद नहीं सोचा था कि कुछ मिनट पहले परिवार को बचाने की कोशिश कर रही महिला की जिंदगी इतनी दर्दनाक तरीके से खत्म हो जाएगी।
आसपास के लोग भी रह गए स्तब्ध :
मकान गिरने की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। पुलिस और बचाव दल को सूचना दी गई। मलबा हटाकर लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन एक जिंदगी नहीं बचाई जा सकी।

खतरनाक घोषित भवन में जिंदगी का जोखिम :
जानकारी के अनुसार, करीब 200 साल पुराने इस भवन को पहले ही खतरनाक घोषित किया जा चुका था और नोटिस भी लगाया गया था। इसके बावजूद लोग यहां रह रहे थे। यही बात इस हादसे को और गंभीर बना देती है।
एक ओर कोलकाता अपने पुराने मकानों और ऐतिहासिक इमारतों के लिए जाना जाता है, दूसरी ओर इनमें रहने वाले परिवार हर बारिश में अपनी जिंदगी को जोखिम में डालने को मजबूर हैं। लगातार बारिश के बीच पुराने और जर्जर भवनों पर खतरा और बढ़ जाता है। कमजोर दीवारें, पुरानी छतें और लंबे समय से क्षतिग्रस्त ढांचे कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं।
जोड़ाबागान की यह घटना एक बार फिर प्रशासन के सामने बड़ा सवाल खड़ा करती है—खतरनाक घोषित भवनों को खाली कराने और वहां रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थान देने के लिए प्रभावी कार्रवाई आखिर कब होगी?
क्योंकि सवाल सिर्फ एक इमारत का नहीं है। सवाल उन परिवारों का है, जो हर रात इस डर के साथ सोते हैं कि पता नहीं अगली सुबह होगी या नहीं।
जोड़ाबागान की वह बुजुर्ग महिला पीछे एक ऐसा सवाल छोड़ गई हैं, जिसका जवाब अब सिर्फ प्रशासन को नहीं, पूरे शहर को देना है " आखिर कब तक जर्जर भवनों में दबती रहेगी जिंदगी?"

