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फैमिली पेंशन को लेकर नई महत्त्वपूर्ण व्यवस्था, पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी अवैध ही रहेगी

 

RNE Network.

उड़ीसा हाईकोर्ट ने फैमिली पेंशन को लेकर महत्त्वपूर्ण व्यवस्था दी है। जस्टिस दीक्षित कृष्ण श्रीपाद और जस्टिस चितरंजन दास की बेंच ने कहा है कि यदि किसी हिन्दू कर्मचारी ने पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी की है तो वह शुरू से ही अमान्य है।
 

पहली पत्नी की मृत्यु होने पर भी यह शादी वैद्य नहीं मानी जायेगी। एक मृत कर्मचारी की दूसरी पत्नी ने पेंशन का दावा किया था। उसकी दलील थी कि नियम में ' पत्नियां ' शब्द का उल्लेख है, इसलिए वह हकदार है।
 

उड़ीसा हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि पेंशन के लिए ' वैद्य विवाह ' अनिवार्य शर्त है। कानूनन दूसरी पत्नी ' विधवा ' की श्रेणी में नहीं आती है। ऐसी शादी हिन्दू मैरिज एक्ट के तहत दंडनीय है। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि अवैध शादी के आधार पर पेंशन देना समाज मे गलत परंपरा को बढ़ावा देना होगा।

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