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New Technology Train : स्टेशन मास्टर भी बटन दबाकर रोक सकेगा ट्रेन, कोहरे में रफ्तार में दौड़ेगी ट्रेन 

 

स्वदेशी कवच तकनीक हमारी ट्रेनों के सुरक्षित संचालन में आयाम स्थापित करेगी। तकनीक इतनी विश्वसनीय है कि ट्रेन-इंजन पटरी-स्टेशन कवच के घेरे में रहेंगे। 160 की गति में भी ट्रेनों में आमने-सामने की टक्कर नहीं होगी। लोको पायलट के साथ ट्रेन रोकने का रिमोट स्टेशन मास्टर के हाथ में भी होगा।

पहले इस नई तकनीक को ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटक्शन सिस्टम नाम दिया था, जिसे प्रधानमंत्री ने नया नाम 'कवच' दिया है। उत्तर-पश्चिम रेलवे जोन में सिस्टम अंतर्गत टॉवर, आप्टिकल फाइबर केबल व उपकरण लगाने का कार्य चल रहा है। जोन में 5561 किलोमीटर रेलमार्ग में सिस्टम स्थापित करने में लगभग 2 हजार 300 करोड़ रुपए की लागत आएगी। स्टेशन मास्टर रोक देगा ट्रेन कवच तकनीक में स्टेशन मास्टर के हाथ में भी ट्रेन रोकने की चाबी होगी। 

वह अपने स्टेशन से थ्रू जा रही ट्रेन में किसी तरह की तकनीकी खराबी या खतरा भांपने पर स्टेशन के अंदर लगे बटन को दबा देगा। इससे ट्रेन के करीब तीन किलोमीटर क्षेत्र में पहिए थम जाएंगे। तकनीक से कौनसी ट्रेन किस पटरी पर चल रही है, उस पर निगरानी रहेगी। इससे मानवीय भूल से होने वाले ट्रेन हादसे थमेंगे।

पायलट की भूल, उपकरण याद रखेंगे

इंजन में लगे उपकरण सेटेलाइट से जुड़े होंगे, जो लोको पायलट को ट्रेन की गति अधिक होने पर चेतावनी, आगे ट्रेन रोकनी है या नहीं का संकेत देंगे। चेतावनी और संकेत की तरफ पायलट का ध्यान नहीं गया तो ऑटोमेटिक ट्रेन के पहिए थम जाएंगे। यही नहीं एक पटरी पर आमने-सामने ट्रेन आने पर दोनों ट्रेनों के ब्रेक लग जाएंगे।

कोहरे में भागेगी ट्रेनें

कवच से इंजन पायलट को घने कोहरे में लाइन क्लीयर है या नहीं की सूचना मिलेगी। लाइन क्लीयर के संकेत पर कोहरे में भी ट्रेन पूरी गति से भागेगी। मौजूदा समय में ऐसी तकनीक नहीं है। इसके कारण ट्रेन रोकनी और गति कम करनी होती है।

इनका कहना है

उत्तर-पश्चिम रेलवे में स्वदेशी निर्मित टक्कर रोधी कवच प्रणाली के कार्य पर करीब 2300 करोड़ रुपए खर्च होंगे। अजमेर मंडल पर 568 किलोमीटर पर कक्च लगाने की निविदा आमंत्रित करने की प्रक्रिया चल रही है। जोन के सभी मंडलों में कक्च प्रणाली स्थापित हो जाने के उपरांत रेलवे संरक्षा बेहतर व सुदृढ़ होगी। 
शशि किरण, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर-पश्चिम रेलवे, जयपुर

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