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Tarang Shakti : F-35 से राफेल तक! जोधपुर में दिखेगी दुनिया की एयर पावर, 40 से अधिक देश शामिल होंगे

 
Jodhpur Air Force Station पर ‘तरंग शक्ति 2026’ का आयोजन होगा। अभ्यास में 40 से अधिक देशों के शामिल होने की उम्मीद है और 32 देश पर्यवेक्षक के तौर पर हिस्सा लेंगे। अमेरिकी वायु सेना पहली बार भारत में F-35 लड़ाकू विमान के साथ इस अभ्यास में शामिल होगी।

Rudra News Express Jodhpur. 

भारतीय वायु सेना का प्रमुख बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास ‘तरंग शक्ति 2026’ राजस्थान के जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन पर आयोजित किया जाएगा। सितंबर में शुरू होने वाला यह अभ्यास 12 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें 40 से अधिक देशों के शामिल होने की उम्मीद है, जबकि 32 देश पर्यवेक्षक के तौर पर हिस्सा लेंगे। इस अभ्यास की खास बात यह होगी कि अमेरिकी वायु सेना पहली बार भारत में F-35 लड़ाकू विमान के साथ किसी वायु अभ्यास में शामिल होगी। F-35 पांचवीं पीढ़ी का अत्याधुनिक लड़ाकू विमान है।

फ्रांस राफेल के साथ, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश C-130J विमानों के साथ शामिल होंगे : 

‘तरंग शक्ति 2026’ में फ्रांस राफेल लड़ाकू विमानों के साथ हिस्सा लेगा। वहीं, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश C-130J विमानों के साथ अभ्यास में शामिल होंगे। वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित के मुताबिक, अभ्यास का उद्देश्य सामरिक वायु शक्ति के इस्तेमाल को लेकर भाग लेने वाली वायु सेनाओं के बीच आपसी समझ बढ़ाना और इंटरऑपरेबिलिटी को मजबूत करना है।

सैटेलाइट तस्वीरें लेकर उनका एनलिसिस करेंगे : 

अभ्यास के दौरान आधुनिक हवाई अभियानों की पूरी प्रक्रिया पर फोकस किया जाएगा। इसकी शुरुआत सैटेलाइट से तस्वीरें हासिल करने और उनके विश्लेषण से होगी। इसके बाद तस्वीरों से मिली जानकारी को मिशन सिस्टम में शामिल कर मिशन की योजना तैयार की जाएगी। लक्ष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद मिशन को अंजाम दिया जाएगा और वापसी के बाद डिब्रीफिंग की जाएगी।

इस पूरी प्रक्रिया में साइबर, एयर पावर और सीमित रूप से स्पेस डोमेन की भूमिका भी शामिल होगी। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मिले अनुभवों और सबक को भी ‘तरंग शक्ति 2026’ के अभ्यास में शामिल किया जाएगा।

भारतीय वायु सेना के वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित के मुताबिक ‘तरंग शक्ति 2026’ भारतीय वायु सेना की परिचालन क्षमताओं और स्वदेशी रक्षा प्लेटफॉर्म को प्रदर्शित करने का भी अवसर होगा। अभ्यास के दौरान विदेशी वायु सेना प्रमुखों और प्रतिनिधिमंडलों को LCA तेजस और कॉम्बैट हेलीकॉप्टर जैसे स्वदेशी प्लेटफॉर्म की क्षमताओं को करीब से देखने और समझने का अवसर मिलेगा।

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