15 से 29 अक्टूबर तक अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं, नवंबर में पंचायत चुनाव के चरण; दीपावली अवकाश में भी प्रशिक्षण-ड्यूटी का अनुमान
Rudra News Express Bikaner.
राजस्थान में पंचायती राज चुनाव 2026 और सरकारी स्कूलों की अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं के कार्यक्रम ने शिक्षा विभाग के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। शिविरा पंचांग के अनुसार सरकारी स्कूलों में अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं 15 से 29 अक्टूबर तक प्रस्तावित हैं। इसी अवधि में पंचायती राज चुनाव की प्रक्रिया शुरू होकर आगे बढ़ेगी। ऐसे में बड़ी संख्या में शिक्षकों के सामने एक साथ परीक्षा व्यवस्था और चुनावी ड्यूटी निभाने की चुनौती खड़ी हो गई है।

पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव चार चरणों में कराए जाने हैं। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार इनके मतदान की तारीखें 23 अक्टूबर, 29 अक्टूबर, 4 नवंबर और 14 नवंबर हैं। वहीं पंच-सरपंच चुनाव की मतदान तिथियां 25 अक्टूबर, 31 अक्टूबर, 6 नवंबर और 16 नवंबर निर्धारित हैं। चुनावी प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों के प्रशिक्षण, मतदान दलों की तैयारियों और मतदान ड्यूटी के कारण स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका है।
यानी अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं के अंतिम दौर के साथ ही पंचायत चुनाव का पहला और दूसरा चरण सामने होगा। इसके बाद नवंबर में चुनावी प्रक्रिया जारी रहेगी और इसी दौरान 4 से 15 नवंबर तक स्कूलों का मध्यावधि यानी दीपावली अवकाश निर्धारित है।
दीपावली के बीच चुनावी ड्यूटी की चिंता
पंचायत चुनाव का तीसरा चरण दीपावली के आसपास पड़ रहा है। पंच-सरपंच चुनाव के तीसरे चरण में 6 नवंबर को मतदान और 7 नवंबर को उपसरपंच चुनाव है, जबकि दीपावली 8 नवंबर को है। ऐसे में चुनावी ड्यूटी और प्रशिक्षण में लगाए जाने वाले शिक्षकों-कर्मचारियों के सामने त्योहार की तैयारियों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच चुनावी दायित्व निभाने की चुनौती रहेगी।
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान विद्यालय शिक्षा के प्रदेश सचिव रवि आचार्य ने कहा कि बड़ी संख्या में शिक्षक अपने गृह जिले से बाहर कार्यरत हैं। मध्यावधि अवकाश में वे परिवार के साथ दीपावली मनाने के लिए गृह जिले जाते हैं। यदि इसी अवधि में चुनावी प्रशिक्षण या ड्यूटी लगती है तो उनके लिए घर जाना मुश्किल हो सकता है।
आचार्य ने कहा कि कर्मचारी चुनावी दायित्व से पीछे नहीं हटते, लेकिन चुनाव कार्यक्रम तय करते समय प्रमुख त्योहार, मध्यावधि अवकाश और पारिवारिक जिम्मेदारियों का भी व्यावहारिक रूप से ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने दीपावली के बाद तीसरे चरण की चुनावी प्रक्रिया कराने की मांग की है। साथ ही अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं, खेलकूद प्रतियोगिताओं और अन्य विद्यालयी गतिविधियों में लगे शिक्षकों के लिए भी आवश्यक समायोजन की मांग की।
गृह जिले से बाहर कार्यरत शिक्षकों को विशेष राहत की मांग
महासंघ ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि मध्यावधि अवकाश के दौरान चुनावी प्रशिक्षण या ड्यूटी के कारण गृह जिले से बाहर कार्यरत शिक्षकों को घर जाने से वंचित नहीं किया जाए। ऐसे शिक्षकों को अवकाश अवधि में गृह जिले जाने के लिए विशेष शिथिलता दी जाए तथा उनकी चुनावी ड्यूटी का स्थानीय स्तर पर या वैकल्पिक तिथियों में समायोजन किया जाए।
मंडल संयुक्त मंत्री विनोद पुनिया ने कहा कि यह मांग चुनावी जिम्मेदारी से बचने की नहीं, बल्कि चुनावी कार्यक्रम में मानवीय और व्यावहारिक समायोजन की है, ताकि कर्मचारी लोकतांत्रिक दायित्व निभाने के साथ परिवार के साथ दीपावली भी मना सकें।

