Dharmendra Memories : धर्मेंद्र ने हेमा मालिनी के लिए फिल्म डायरेक्टर को जड़ दिए थे थप्पड़
फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र के निधन के बाद उनकी यादे निकलकर आ रही है। जहां पर धर्मेंद्र से प्यार करने वाले लोगों की आंखे नम है और उनकी पुरानी बातों को याद कर रहे है। धर्मेंद्र जहां पर दिल के साफ इंसान के साथ मिलनसार थे, लेकिन उसके विपरित काफी गुस्सा भी आता था। इसलिए वह अपने परिवार से काफी प्रेम करते थे और उनके लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार रहते थे।
ऐसा ही मामले का खुलासा अभिनेत्री व उनकी पत्नी हेमा मालिनी ने किया है। जहां पर हेमा मालिनी के लिए धर्मेंद्र ने फिल्म डायरेक्टर सुभाष घई को थप्पड़ ही जड़ दिया था। खुद हेमा मालिनी ने कपित शर्मा शो में इसे साझा किया था। 1981 में रिलीज हुई फिल्म 'क्रोधी' की शूटिंग के दौरान यह वाकया हुआ था। फिल्म के डायरेक्टर सुभाष घई चाहते थे कि हेमा एक सीन में स्विमसूट पहनें।
पहले वे इसके लिए तैयार नहीं थीं। सुभाष घई के बार-बार रिक्वेस्ट करने पर स्विमसूट पहन लिया। जैसे ही इस बात की जानकारी धर्मेंद्र को लगी, उन्हें इतना गुस्सा आया कि वह बीच शूटिंग में ही आ गए और सुभाष घई को जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। सेट पर मौजूद लोगों ने धर्मेंद्र का गुस्सा शांत कराया।
बिमल दा की पत्नी को दे दिया था नोटों से भरा बैग
बिमल रॉय ने धर्मेंद्र को फिल्म बंदिनी (1963) से बड़ा ब्रेक दिया था। जब बिमल दा धर्मेंद्र और शर्मिला टैगोर के साथ फिल्म चैताली बना रहे थे। उसी बीच 1966 में उनकी मौत हो गई। फिल्म की शूटिंग आधी हुई थी। सारे एक्टर्स बची हुई फीस के लिए बिमल दा के घर पहुंचने लगे। ऐसे में उनकी पत्नी मनोबिना राय बहुत परेशान रहने लगीं। एक दिन धर्मेंद्र भी उनके घर पहुंच गए। धर्मेंद्र ने पैसों से भरा ब्रीफकेस खोल दिया और कहा बिमल राय के मुझ पर बहुत एहसान हैं। आज मुझे मौका मिला है, एहसान चुकाने का। उनकी मदद से ये फिल्म बन सकी।
'अपनी खूबियों में भी खामियां ढूंढ लेना मेरी ताकत'
धर्मेंद्र ने एक बार मजाक में कहा था कि हर बार पुरस्कार के लिए सूट सिलवाता था, लेकिन मुझे कभी कोई पुरस्कार नहीं मिला, केवल लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिला। अभिनय का मतलब मेथड या दिखावटी कला नहीं, बल्कि पात्र में पूरी तरह डूब जाना, सहजता और आत्मीयता है। मैं अपनी खूबियों में भी खामियां ढूंढता हूं, यही मेरी सबसे बड़ी ताकत है। कभी किसी की नकल नहीं की और अगर रोना होता, तो बचपन की दुखद यादों से बिना कृत्रिम उपाय (ग्लिसरीन) के ही भाव व्यक्त कर देते।

