कानों से पहले दिल और दिमाग को छूती है धुन, गाना शुरू होते ही धुन को पहचान लेता है दिमाग
Jul 29, 2026, 13:03 IST
RNE Network.
कोई गाना शुरू होते ही, बिना एक भी शब्द सुने दिमाग कैसे तुरन्त समझ जाता है कि यह रॉक मेटल है, क्लासिक धुन है या डिस्को डांस ट्रेक ?
एक नए शोध के अनुसार यह पूरी तरह से ' ध्वनि के भौतिक शास्त्र ' का खेल है। हर म्यूजिक जॉनर के पीछे कुछ खास गणितीय व भौतिक पैमानों का हाथ है।
टिंबर और हॉर्मोनिक्स:
रिसर्च के अनुसार एक ही सुर को अगर गिटार और बांसुरी पर एक ही आवाज में बजाया जाए, तब भी हम कानों से दोनों का फर्क पहचान लेते हैं। इस अंतर को ' टिंबर ' यानी ' ध्वनि का रंग ' कहा जाता है। ऐसे ही जब कोई साज बजता है तो मुख्य सुर के साथ साथ ऊंची - नीची ध्वनि तरंगे भी पैदा करती है। यही ' हॉर्मोनिक्स ' हर इंस्टूमेंट का भौतिकी फिंगरप्रिंट है, जो दिल - दिमाग को छूता है।
जॉनर और उनका साउंड सिस्टम:
- रॉक एंड मेटल: गिटार वेव का डिस्टॉर्शन व ओवरलोड एम्पलीफायर।
- हिप - हॉप : 808 - बेस - कम फ्रीक्वेंसी, कानों से ज्यादा सीने में महसूस
- पॉप : साउंड कम्प्रेशन , जहां धीमी और तेज आवाज एक समान हो
- जैज : स्विंग रिदम, जहां बीट घड़ी की तरह नहीं , थोड़ी ठहरकर चले
- रेगे : ऑफ बीट, मुख्य काउंट छोड़कर बीच के गेप में मूजिक

