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एक पहल बनी उम्मीद: रुचिरा ने भूखे प्रवासी परिवारों तक पहुंचाया भोजन

 

RNE Network.

यदि कोई किसी की सहायता करने की ठान ले तो उसे कोई बाधा रोक नहीं सकती। बस, प्रयास सार्थक व मॉनव हित का हो। ऐसे अनेक उदाहरण हम इतिहास से वर्तमान तक देख सकते हैं। खासकर, महिलाओं ने एक नहीं अपितु अनेक बार इस उक्ति को गलत साबित किया है कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता। 
 

बस, पहल करने की जरूरत होती है। फिर साथ तो मिलता रहता है। कहते भी है - मैं अकेला ही चला था जानिबे मंजिल की ओर, लोग जुड़ते रहे और कारवां बन गया। इसी तरह का प्रयास बेलफास्ट में अभी देखने को मिला है।
 

बेलफास्ट में अप्रवासियों के खिलाफ भड़की हिंसा के बीच भारतीय मूल की रुचिरा रँगाप्रसाद ने घरों में छिपे प्रवासी परिवारों को भोजन उपलब्ध कराया। भारत से 3 वर्ष पहले आयी रुचिरा ने भोजन पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया पर अभियान शुरू कर दिया। पहले दिन 50 से अधिक परिवारों को भोजन पहुंचाया। उसके बाद यह सामुदायिक अभियान बन गया और दर्जनों स्वयंसेवक अभियान से जुड़ गए।

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