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Bikaner Nagar Nigam Election : ये 11 वार्ड सबसे हॉट, यहां दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर!

 
कहीं महापौर के संभावित चेहरे आमने-सामने, कहीं बागी और भीतरघात ने बढ़ाई चुनौती; वार्ड 2 से 77 तक इन 11 सीटों पर शहर की नजर

 

 

पंचायती : धीरेन्द्र आचार्य

 

Rudra News Express Bikaner. 


यूं तो बीकानेर नगर निगम चुनाव के 80 में से एक वार्ड में निर्विरोध होने के बाद 79 वार्डों में मुकाबला है, लेकिन इनमें करीब एक दर्जन वार्ड ऐसे हैं जहां लड़ाई महज पार्षद बनने की नहीं रह गई है। इन सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के ऐसे चेहरे मैदान में हैं जिन्हें महापौर पद के संभावित दावेदारों के तौर पर देखा जा रहा है। कहीं निवर्तमान और पूर्व महापौर मैदान में हैं तो कहीं प्रदेश स्तर के नेता, पूर्व पार्षद, वरिष्ठ संगठन पदाधिकारी और मजबूत राजनीतिक परिवारों से जुड़े चेहरे चुनाव लड़ रहे हैं। इन प्रत्याशियों के लिए चुनाव परिणाम उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक ताकत का भी पैमाना बनेगा।

 

इन 11 वार्ड पर खास नजर : 

वार्ड संख्या 2, 8, 13, 14, 18, 28, 38, 60, 73, 75 और 77 खास तौर पर चर्चा में हैं। इन 11 वार्डों में कुल मतदाताओं की संख्या करीब 67 हजार है और नाम वापसी के बाद कुल 66 प्रत्याशी मैदान में रहे। शाम को  6 बजे तक आए प्राथमिक आंकड़े के मुताबिक इन वार्डों में मतदान का स्तर भी अलग-अलग रहा। कहीं 70 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ तो कुछ वार्डों में यह 60 प्रतिशत के आसपास रहा। पूरे निगम में 6 बजे तक 4,77,789 मतदाताओं में 3,29,238 वोट पड़ चुके थे और मतदान प्रतिशत 68.91 रहा था। 

वार्ड 02 : दीपक -संजय के सामने 13 प्रत्याशी, बागी शिवशंकर ने बढ़ाया संघर्ष : 

7,295 मतदाता वाले वार्ड 2 में सर्वाधिक 15 प्रत्याशी चुनाव मैदान में रहे।  भाजपा से दीपक व्यास और कांग्रेस से संजय आचार्य जैसे राजनीतिक रूप से मजबूत चेहरे आमने-सामने। यह सीट इसलिए खास है क्योंकि भाजपा के दीपक व्यास और कांग्रेस के संजय आचार्य दोनों को राजनीतिक पृष्ठभूमि के चलते महापौर के संभावित चेहरों में गिना जाता है।

लेकिन दोनों के सामने सिर्फ एक-दूसरे की चुनौती नहीं है। 13 निर्दलीयों ने मुकाबले को असाधारण रूप से बहुकोणीय बना दिया है। इनमें शिवशंकर बिस्सा को कांग्रेस का मजबूत बागी माना जा रहा है। ऐसे में यहां सवाल सिर्फ कौन जीतता है का नहीं, बल्कि किसके वोट कितने बंटते हैं और बागी किस दल के समीकरण को ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं, इसका भी है।

इनके अलावा चन्द्रमोहन, दिधिति शर्मा, गिरधारी लाल सुथार, गोपाल, खेत नाथ, लक्ष्मी पारीक, राजेन्द्र कुमार, रास बिहारी, सुरेंद्र स्वामी, सुरेश, तेजेंद्र श्रीमाली और विनोद कुमार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में डटे। यहां शाम 6 बजे तक  5,116 वोट पड़ चुके थे और मतदान प्रतिशत 70.13 रहा। 

वार्ड 08 : भगवान सिंह मेड़तिया ने बढ़ाया रोमांच, मगर संघर्ष कम नहीं : 

वार्ड 8 में 6,803 मतदाता और 9 प्रत्याशी। भाजपा नेता भगवान सिंह मेड़तिया की बतौर प्रत्याशी मौजूदगी ने इस वार्ड को शहर की निगाह में ला दिया है। हालांकि यही मौजूदगी मुकाबले को रोचक बनाने के साथ-साथ संघर्षपूर्ण भी बना रही है। भाजपा-कांग्रेस के सीधे मुकाबले के बीच AAP, BSP और RLP की मौजूदगी तथा चार निर्दलीय प्रत्याशी वोटों के समीकरण को और उलझा रहे हैं। इस वार्ड में पार्टी संगठन, व्यक्तिगत प्रभाव और स्थानीय नाराजगी, तीनों का असर देखने को मिल सकता है।

 

भाजपा से भगवान सिंह मेड़तिया, कांग्रेस से नवीन जांगिड़, AAP से विपिन चन्द्र, BSP से जय सिंह यादव, RLP से राहुल तथा निर्दलीय गौरव शर्मा, मनोज प्रजापत, राजेंद्र सिंह और विक्रम सिंह शेखावत मैदान में डटे। यहां 3,967 वोट पड़े और मतदान प्रतिशत 58.31 रहा। 


वार्ड 13 :सुरेंद्र सिंह शेखावत के सामने चक्रव्यूह : 

वार्ड 13 में 6,982 मतदाताओं का समर्थन मांगने 5 प्रत्याशी मैदान में रहे। भाजपा ने प्रदेश प्रवक्ता सुरेंद्र सिंह शेखावत को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस से दुष्यंत सिंह प्रत्याशी बने। इनके अलावा महेंद्र सिंह, प्रमोद सिंह शेखावत और पुष्पेंद्र सिंह भाटी निर्दलीय उम्मीदवार हैं। शाम 6 बजे तक यहां 4,270 वोटपड़ चुके थे और मतदान प्रतिशत 61.16 रहा। 

 

सुरेंद्र सिंह शेखावत के सामने चुनौती सामान्य चुनावी मुकाबले से आगे की है। प्रदेश प्रवक्ता जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहे नेता की प्रतिष्ठा इस सीट से जुड़ी है। भाजपा प्रत्याशी के सामने निर्दलीय और बागी समीकरण के साथ ही भीतरघात की आशंका चर्चा में है। ऐसे में कांग्रेस प्रत्याशी से सीधी टक्कर के साथ भाजपा के अपने वोटों में सेंध रोकना भी शेखावत के लिए बड़ी चुनौती रही। इसमें कितना सफल रह पाए यह नतीजे बताएंगे। इस सीट का परिणाम यह संकेत भी देगा कि संगठन का प्रभाव ज्यादा चला या स्थानीय असंतोष का। परदे के पीछे पार्टी के ही कई नेताओं का खेल होने के चर्चे भी इस वार्ड में सुने गए। 

वार्ड 14 : सुशीला कंवर के लिये मूल्यांकन और भविष्य की राजनीति का चुनाव : 


वार्ड संख्या 14 को इसलिये हॉट सीट कह सकते हैं क्योंकि इस वार्ड में निवर्तमान मेयर सुशीला कंवर एक बार फिर पार्षद का चुनाव लड़ने मैदान में उतरी। ऐसे में यह खुद उनके पाँच साल का कार्यकाल का मूल्यांकन चुनाव है वहीं संभवित मेयर चेहरों में फिर से शामिल होने के कारण उनके राजनीतिक भविष्य का चुनाव भी है। सुशीला अगर दुबारा मेयर बनती है तो उन्हें आगे विधायक के संभावित चेहरों में भी गिना जाएगा। 

6,793 मतदाताओं वाले वार्ड 14 में 4 प्रत्याशी उतरे। भाजपा की सुशील कंवरऔर कांग्रेस की किरण भाटी मुख्य मुकाबले में हैं, जबकि मनीषा संवाल और शालिनी पाल निर्दलीय प्रत्याशी हैं। यहां 4,050 वोट पड़े और मतदान प्रतिशत 59.62 रहा। दो निर्दलीयों की मौजूदगी अंतिम परिणाम में महत्वपूर्ण हो सकती है।


वार्ड 18 : पूर्व महापौर मकसूद अहमद की अग्नि परीक्षा : 

पूर्व महापौर मकसूद अहमद की मौजूदगी ने वार्ड संख्या 18 का महत्व बढ़ा दिया है। मकसूद अहमद के लिए यह चुनाव राजनीतिक प्रभाव को बनाए रखने की परीक्षा है। वे कांग्रेस के प्रदेश स्तरीय नेता होने के साथ ही बीकानेर UIT के पूर्व चेयरमेन भी रह चुके हैं। भाजपा इस सीट को कांग्रेस से छीनने की कोशिश में है। BSP और निर्दलीय प्रत्याशी मुकाबले में अतिरिक्त कोण जोड़ रहे हैं। खास तौर पर इतना ऊंचा मतदान प्रतिशत यह संकेत देता है कि यहां मतदाताओं की चुनाव में सक्रिय भागीदारी रही है; अब देखना होगा कि इसका लाभ किस प्रत्याशी को मिलता है।

दरअसल वार्ड 18 में 5,279 मतदाता और 4 प्रत्याशी मैदान में रहे। कांग्रेस से पूर्व महापौर मकसूद अहमद, भाजपा से टेकचन्द गहलोत, BSP से त्रिलोक चन्द और निर्दलीय संजय भाटी डटे। यहां 4,038 वोट पड़े और मतदान प्रतिशत 76.49 रहा। इन 11 हॉट वार्डों में यह सबसे ऊंचे मतदान प्रतिशतों में है। 

 वार्ड 28 : मोहन सुराणा की पत्नी मधु सुराणा के सामने कई चुनौतियां : 

इस सीट पर भाजपा प्रत्याशी मधु सुराणा भाजपा के वरिष्ठ नेता मोहन सुराणा की पत्नी है। सुराणा ने अपनी गैर राजनीतिक पृष्ठभूमि वाली पत्नी को मैदान में  उतारा है तो अनुमान लगाया जा सकता है  कि सिर्फ पार्षद चुनाव जीतना मकसद नहीं। बस, इसी सोच के साथ उनकी चुनौतियां भी बढ़ जाति हैं। कांग्रेस की पुष्पा सेठिया के साथ निर्दलीय लक्ष्मीदेवी कातेला की चुनौती भी मधु सुराणा के लिये महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इस वार्ड का चुनाव भाजपा नेता महावीर रांका के टिकट कटने के प्रकरण से भी प्रभावित माना जा रहा है, क्योंकि रांका का मूल वार्ड यही रहा है। ऐसे में मधु सुराणा को पार्टी प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल करने के लिए संगठन, स्थानीय समीकरण और संभावित असंतोष—तीनों मोर्चों पर काम करना पड़ा है। 

वार्ड 28 में 5,552 मतदाता और 4 प्रत्याशी रहे।  भाजपा की मधु सुराणा, कांग्रेस की पुष्पा सेठिया तथा निर्दलीय लक्ष्मीदेवी कातेला और मंजू देवी के बीच वोटों का बंटवारा हो रहा है। यहां 3,256 वोट पड़े और मतदान प्रतिशत 58.65 रहा। 

 

 

वार्ड 38 :अशोक प्रजापत के सामने कई समीकरण : 

 भाजपा के वरिष्ठ नेता अशोक प्रजापत यहां चुनाव मैदान में है और यह मौजूदगी जाहिर करती है कि नजर सिर्फ पार्षद की सीट पर नहीं है। यहां मुकाबला सिर्फ कांग्रेस प्रत्याशी से नहीं है वरन दो निर्दलीयों की वोट काटने की क्षमता परिणाम पर असर डालेगी। इस सीट का सबसे चर्चित पहलू निर्दलीय दीपक अरोड़ा की मौजूदगी है। वे उस प्रकरण के कारण चर्चा में रहे जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल से मारपीट के मामले में गिरफ्तारी हुई थी।

इसी प्रकरण में अरोड़ा के बेटे मोहित द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष के साथ मारपीट का मामला सामने आया था। ऐसे में दीपक अरोड़ा का चुनाव मैदान में होना कांग्रेस के लिए अतिरिक्त राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
वार्ड 38 में 7,772 मतदाता और 4 प्रत्याशी रहे। भाजपा के वरिष्ठ नेता अशोक प्रजापत, कांग्रेस के पड़े और मतदान प्रतिशत 71.47 रहा। 

वार्ड 60 : चौथे फेरे में किशोर आचार्य की कड़ी परीक्षा : 

किशोर आचार्य इस चुनाव के उन प्रत्याशियों में हैं जिनका रिकॉर्ड ही उन्हें चर्चा में लाता है। वे लगातार तीन चुनाव जीत चुके हैं और चौथी बार मैदान में हैं। पिछले चुनाव में भी उनका मुकाबला कांग्रेस के नवल किशोर पुरोहित से हुआ था और किशोर आचार्य ने जीत दर्ज की थी।

इस बार वही पुराना मुकाबला फिर सामने है। RLP के कमल किशोर, निर्दलीय आशीष सोलंकी और भीतरघात की आशंका किशोर आचार्य की लगातार चौथी जीत के रास्ते में चुनौती मानी जा रही है। राजनीतिक रूप से देखा जाए तो चार बार पार्षद बनने वाला चेहरा महापौर पद की दौड़ में स्वाभाविक रूप से मजबूत माना जा सकता है। यही टांग खिंचाई एक वजह भी है। 

 

वार्ड 60 में 5,322 मतदाता और 5 प्रत्याशी डटे। भाजपा के किशोर आचार्य, कांग्रेस के नवल किशोर पुरोहित, RLP के कमल किशोर तथा निर्दलीय आशीष सोलंकी और मिर्जा साहिल बेग मैदान में रहे।  यहां 3,787 वोट पड़े और मतदान प्रतिशत 71.16 रहा।


वार्ड 73 : अनिल कल्ला बनाम दीपक पारीक-महापौर का महासंग्राम :

यह बीकानेर की सबसे हॉट सीटों में गिनी जा रही है। कांग्रेस के अनिल कल्ला युवा नेता होने के साथ दिग्गज कांग्रेस नेता जनार्दन कल्ला के पुत्र और पूर्व मंत्री बीडी कल्ला के भतीजे हैं। दूसरी ओर भाजपा के दीपक पारीक भी पार्टी के बड़े चेहरों में शामिल हैं और उनके मैदान में उतरते ही उन्हें महापौर पद के संभावित चेहरों में देखा जाने लगा। लेकिन दोनों के लिए राह आसान नहीं है।

भाजपा के पूर्व पार्षद दिनेश कुमार टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर निर्दलीय मैदान में हैं। कांग्रेस में पार्टी के पूर्व महासचिव आनंद जोशी भी टिकट नहीं मिलने से बागी होकर चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में यह सीट वास्तव में महापौर पद के संभावित चेहरों का महासंग्राम बन गई है।

वार्ड 73 में 4,688 मतदाता और 7 प्रत्याशी डटे। भाजपा से दीपक पारीक, कांग्रेस से अनिल कल्ला, CPI(M) से दीवान, RLP से राकेश श्रीमाली तथा निर्दलीय आनंद कुमार जोशी, दिनेश कुमार और इम्तियाज़ अली मैदान में रहे। यहां शाम 06 बजे तक 3,410 वोट पड़े और मतदान प्रतिशत 72.74 रहा। 


वार्ड 75 : रांका का टिकट कट, विशाल गोलछा की एंट्री, धर्मवीर नाहटा को बल : 

यह सीट चुनाव से पहले ही भाजपा के भीतर टिकट को लेकर हुए घटनाक्रम के कारण सबसे ज्यादा चर्चित रही। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व UIT चेयरमैन महावीर रांका का टिकट लगभग तय माना जा रहा था और उन्होंने नामांकन के अंतिम दिन पर्चा भी दाखिल किया था। इसके बाद अंतिम समय में विशाल गोलछा का नाम सामने आया।

टिकट को लेकर बीकानेर से जयपुर और दिल्ली तक राजनीतिक हलचल की चर्चा रही। रांका के समर्थक गणेश बोथरा, जो हिन्दू नववर्ष शोभायात्रा के संयोजक और रांका के रणनीतिकार माने जाते हैं, ने सार्वजनिक रूप से कांग्रेस प्रत्याशी धर्मवीर नाहटा के समर्थन में वीडियो जारी किया। यह घटनाक्रम भाजपा के लिए इस वार्ड में चुनौती माना जा रहा है। हालांकि रांका ने स्वयं किसी भाजपा प्रत्याशी के विरोध की सार्वजनिक घोषणा नहीं की है। ऐसे में वार्ड 75 का परिणाम भाजपा के अंदरूनी समीकरणों के लिहाज से भी खासा महत्वपूर्ण होगा। 

बोथरा का बयान इसलिये ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि वे नववर्ष यात्रा के संयोजक रहे हैं। यह यात्रा RSS पृष्ठभूमि से जुड़ाव रखती है। वर्तमान विधायक जेठानन्द व्यास इसके संयोजक रहे और हिंदूवादी नेता के रूप में इसी यात्रा से बड़ी पहचान मिली। यही टिकट और जीत का आधार भी रहा। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि रांका के टिकट का सबसे प्रखर विरोध भी विधायक ने ही किया था। ऐसे में इसे भाजपा और संघ पृषभूमि के बीच भी बड़े असंतोष के रूप में देखा जा रहा है। 

वार्ड 75 में 7,229 मतदाता और 4 प्रत्याशी हैं। भाजपा से विशाल गोलछा, कांग्रेस से धर्मवीर नाहटा तथा निर्दलीय मनवर अली और सुभाष मैदान में हैं। यहां 4,600 वोट पड़े और मतदान प्रतिशत 63.63 रहा। 


 वार्ड 77 : सबसे ज्यादा मतदाता, राहुल जादूसंगत -ताराचंद मेघवाल आमने-सामने

वार्ड 77 में 7,996 मतदाता हैं जो इन 11 हॉट वार्डों में सबसे ज्यादा। इस वार्ड की अहमियत केवल मतदाताओं की बड़ी संख्या के कारण नहीं है। कांग्रेस ने यहां अपने उभरते SC चेहरे राहुल जादूसंगत को मैदान में उतारा है। मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में महापौर का पद सामान्य होने की स्थिति में कांग्रेस भविष्य में किसी पिछड़े या दलित चेहरे को उप महापौर के रूप में आगे बढ़ा सकती है—इसी संभावना के कारण राहुल जादूसंगत की पार्षदी की दावेदारी पर भी शहर की नजर है। दूसरी ओर भाजपा ने ताराचंद मेघवाल को मैदान में उतारा है। CPI(M) और दो निर्दलीयों की मौजूदगी इसे सीधा भाजपा-कांग्रेस मुकाबला नहीं रहने देती।
  

 

यहां 5 प्रत्याशी मैदान में डटे। भाजपा से ताराचंद मेघवाल, कांग्रेस से राहुल जादूसंगत, CPI(M) से सुंदर लाल बारूपाल तथा निर्दलीय लक्ष्मण गर्ग और माया कलवा। यहां मतदान प्रतिशत 71.85 रहा और 5,745 वोट पड़े।

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