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Bikaneri Holi : थंब पूजन के साथ गेवरिये, रसिये तैयार, रात को नागणेचीजी माता के दरबार में उड़ेगी गुलाल, कल से रम्मतें

बीकानेरी होली का आगाज, आज रात माता के दरबार में फाग!
 

 

RNE, BIKANER. 
 

बीकानेर की फिजां में फागुनी बयार के साथ मस्ती भी घुलने लगी है। सोमवार को थंब पूजन के साथ जहां पारंपरिक होली आयोजनों की दस्तक हो गई वहीं आज रात बीकानेर की कुलदेवी नागणेचीजी माता के दरबार में फाग के राग गाने और गुलाल उड़ाने के साथ ही होली का औपचारिक आगाज हो जाएगा। इसके साथ ही कल यानी मंगलवार 24 फरवरी से हर रात रम्मतों का दौर चलेगा। मतलब यह कि थंबरोपण के साथ ही होली की मस्ती का आगाज हो गया जो अगले 09 दिन तक नॉन स्टॉप चलने वाली है।

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चौक-मोहल्लों की होली शुरू :
 

दरअसल बीकानेरी होली की मस्ती देशभर मंे अलहदा जगह रखती है और यही वजह है कि प्रवासी बीकानेरी भी इस मौके पर अपने शहर लौटने की कोशिश करते हैं। इसकी शुरूआत होलाष्टक से हो जाती है और शुरुआत अलग-अलग चौक में थंपरोपण से होती है। आज दोपहर को जहां मरुनायक चौक में थंपरोपण के साथ ही होली का आगाज हुआ वहीं लालाणी व्यासों का चौक, कीकाणी व्यासों का चौक सहित शहर के कई चौक-मोहल्लों में थंब पूजन हो रहा है।

माता से मांगेंगे होली की अनुमति :

 

होली की गेर, फाग का विधिवत आगाज आज रात को बीकानेर नगर की कुलदेवी नागणेचीजी माता के दरबार में फाग के साथ होगा। शाकद्वीपीय समाज के लोग इस मंदिर मंे जुटेंगे और माता के दरबार में पारंपरिक भजनों के साथ ही फाग के गीत गाए जाएंगे। यहां गुलाल उछलने के साथ ही शहर मंे होली का गुलाली आगाज हो जाएगा। भाई बंधु ट्रस्ट अध्यक्ष कामिनी विमल भोजक मैया और महामंत्री नितिन वत्सस के मुताबिक बीकानेर की रियास्तकालीन परंपरा का निर्वहन करते हुए शाकद्वीपीय मग ब्राह्मण समाज कल 23 फरवरी 2026 फाल्गुन सुदी सप्तमी(खेलनी सातम) पर माता रानी नागणेची के चरणों में इत्र गुलाल अर्पित कर भजन गाकर माता रानी से होली खेलने की अनुमति प्राप्त करेगा।

क्या होता है नागणेची माता मंदिर में :

 

शाकद्विपीय समाज के महिला पुरुष शाम के समय नए वस्त्र पहनकर माता रानी नागणेची मंदिर प्रांगण में इकट्ठे होकर माता रानी के चरणों में भजन प्रस्तुत करते है। आरती के समय रात्रि 8 बजे माता रानी को इत्र गुलाल अर्पित की जाएगी और बीकानेर शहर में होली महोत्सव की शुरआत की अरदास की जाएगी। फिर गुलाल उछालकर बीकानेर में होलका का आगाज किया जाएगा। इसके बाद होली दहन तक शहर में मांगलिक कार्यों पर प्रतिबंध रहेगा और रम्मतो का दौर शुरू होगा।

अलग-अलग भोग :

 

इस दिन समाज विभिन्न स्थानों पर सामूहिक भोग का आयोजन करता है जिसमे श्यामोजी वंशज मूंधाड़ा प्रन्यास भवन, हसावतो की तलाई, नाथ सागर स्थित सूर्य भवन, डागा चोक स्थित शिव शक्ति भवन, जसोल्लई स्थित जनेश्वर भवन में प्रसाद का आयोजन होगा।

यहां से गुजरेगी होली की पहली गेर :

 

वत्सस ने बताया कि रात्रि को नागणेची मंदिर से निकलकर समाज के बुजुर्ग और युवा देर रात्रि को शहर में होली की पहली गेर लेकर आते है। यह गेर गोगागेट से शहर में प्रवेश करते हुए बागड़ी मोहल्ला, भुजिया बाजार , चाय पट्टी, बैदो का बाजार नाईयो की गली, मरूनायक चोक, चोधरियो की घाटी होते हुए मूंधाड़ा सेवागो के चोक में संपन होगी।

तैयारियों में जुटा समाज :

 

इस रियासत कालीन परंपरा का निर्वहन सफल तरीके से संपन्न करने के लिए समाज के व्यक्ति बड़े पैमाने पर तैयारियो में लगे है। इनमें राजा सेवग, अजय कुमार शर्मा, सुशील सेवग उर्फ लालजी, दीनानाथ सेवग, शिवचंद भोजक, बलदेव प्रसाद सेवग, संजय शर्मा, मनु भाईजी, नीरज शर्मा, प्रणव भोजक, उमेश भोजक, सीताराम सेवग, राधेश्याम सेवग, अरुण शर्मा, रामजी सेवग, विष्णु सेवग, कमल कुमार राजेंद्र शर्मा अपने अपने साथियों सहित तैयारियो में जुटे हैं।

 

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