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पुस्तक ‘फूड इज नॉट द एनेमी’ का विमोचन, विशेषज्ञों ने कहा- भोजन से डर नहीं, संतुलित रिश्ता जरूरी

- भोजन और स्वस्थ जीवन शैली पर हुई चर्चा
- वक्ताओं ने कहा भोजन नहीं , गलत खानपान  है सेहत के दुश्मन 
- विशेषज्ञों ने सेहत के लिए  मिलेटस को सबसे बेहतर अनाज बताया
 

RNE Network.

प्रभा खेतान फाउंडेशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में क्लिनिकल डाइटिशियन एवं वेलनेस कोच डॉ. रिद्धिमा खमेसरा की पुस्तक ‘फूड इज नॉट द एनेमी’ का विमोचन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन इंडिया इंटरनेशनल सेंटर एनेक्सी  में  किया गया था। पुस्तक भोजन, पोषण, कैलोरी और स्वस्थ जीवनशैली को लेकर फैली भ्रांतियों को सरल तरीके से समझाने पर केंद्रित है। कार्यक्रम का आयोजन प्रभा खेतान फाउंडेशन की ओर से किया गया था।  

पुस्तक विमोचन के बाद भोजन और स्वास्थ्य को लेकर एक विशेष संवाद आयोजित किया गया, जिसमें चिकित्सक डॉ. अंशुमान कौशल, लेखक एवं खाद्य विशेषज्ञ पुष्पेश पंत, शेफ विकास चावला और एथलीट नूपुर श्योरान ने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम का संचालन करते हुए वक्ताओं ने कहा कि भोजन को लेकर डर और गलत जानकारी के बजाय लोगों को उसके साथ संतुलित और स्वस्थ रिश्ता बनाने की जरूरत है।

चर्चा के दौरान पुष्पेश पंत ने कहा कि भोजन को लेकर आज अत्यधिक भ्रम और डर पैदा हो गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समस्या भोजन नहीं, बल्कि उसके प्रति हमारी सोच और व्यवहार भी हो सकता है।

एथलीट नूपुर श्योरान ने निरंतरता को मोटिवेशन से अधिक महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि व्यक्ति हर समय प्रेरित नहीं रह सकता। अनुशासन और नियमितता ही लंबे समय तक स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखने में मदद करती है।

डॉ. अंशुमान कौशल ने स्वास्थ्य को लेकर रोजमर्रा की छोटी आदतों के महत्व पर बात की। उन्होंने भोजन के बाद कुछ समय टहलने, ब्लड प्रेशर की नियमित जांच और डायबिटीज की निगरानी के लिए HbA1c जैसे परीक्षणों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि रात के आखिरी भोजन और सोने के बीच पर्याप्त अंतर रखना बेहतर स्वास्थ्य और नींद के लिए उपयोगी है।

रैपिड फायर राउंड में शेफ विकास ने खिचड़ी को ऐसा भारतीय व्यंजन बताया, जिसे दोबारा लोकप्रियता मिलनी चाहिए। उन्होंने मिलेट्स के इस्तेमाल और पारंपरिक भारतीय खानपान की विविधता पर भी बात की। वहीं डॉ. अंशुमान ने बिना जरूरत प्रोबायोटिक्स के सेवन को लेकर सावधानी बरतने की बात कही।

चर्चा के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि “भोजन दुश्मन नहीं है”, लेकिन उसकी मात्रा, गुणवत्ता और व्यक्ति की शारीरिक सक्रियता महत्वपूर्ण है। वक्ताओं ने कहा कि स्वस्थ जीवनशैली के लिए किसी कठोर या असंभव लक्ष्य के बजाय छोटी आदतों को लगातार दोहराना अधिक प्रभावी हो सकता है।

कार्यक्रम में आदतों के निर्माण पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने ‘2-मिनट नियम’ जैसी रणनीति का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी नई आदत की शुरुआत छोटे कदम से करनी चाहिए और निरंतरता बनने के बाद धीरे-धीरे उसका दायरा बढ़ाना चाहिए।

कार्यक्रम का आयोजन प्रभा खेतान फाउंडेशन के सहयोग से किया गया। इस दौरान पुस्तक की लेखिका डॉ. रिद्धिमा खमेसरा सहित कार्यक्रम से जुड़े अतिथियों ने भोजन, चिकित्सा, खेल और पोषण के बीच संतुलन बनाते हुए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।

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