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कांग्रेस 50 फीसदी टिकट 50 साल से कम उम्र वालों को देगी, बूथ से जिले तक सभाओं से खोजेंगे युवाओं को

भाजपा को भी अब युवाओं पर होना होगा केंद्रित
दोनों दल जूट गए हैं चुनावी तैयारी में
 

मधु आचार्य ' आशावादी '
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RNE Special.
 

आखिरकार राज्य में स्थानीय निकाय व पंचायत राज के चुनावों की बिसात बिछ ही गयी। शहरी व ग्रामीण क्षेत्र की स्थानीय सरकारों का यह चुनाव अनेक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण होता है। इससे न केवल राजनीति को नए नेता मिलते हैं, अपितु राजनीति के सबक भी युवाओं को मतदाताओं को सीखने के लिए मिलते हैं। यह चुनाव राजनीति की दूसरी पाठशाला समझा जाता है। पहली पाठशाला तो छात्र संघ के चुनाव होते हैं।

स्थानीय निकाय व पंचायत राज के चुनाव राज्य सरकार पर एक तरह से जनमत भी होता है। यह चुनाव राज्य सरकार का कार्यकाल आधा होने तक होते हैं तो इनके जरिए जनता यह भी अभिव्यक्त करती है कि सरकार का कामकाज कैसा है। एक तरह से इन चुनावों के परिणाम ही आने वाले विधानसभा चुनाव की नींव होते हैं और संकेत दे देते हैं कि अगली सरकार किसकी बनेगी।
 

भारत को युवा देश माना जाता है क्योंकि यहां सर्वाधिक मतदाता इसी वर्ग के है। ये युवा ही चुनाव की दिशा तय करने के साथ साथ चुनाव परिणाम का भी निर्धारण करते हैं। राज्य व देश के अनेक बड़े नेता इन्ही चुनावों के जरिये सामने आए हैं। युवा वर्ग का ही इस चुनाव में खास महत्त्व रहता है।

ये चुनाव जन हित में जरूरी:

स्थानीय निकायों व पंचायत राज के चुनाव होना जरूरी है। क्योंकि शहरी क्षेत्र की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति स्थानीय निकायों से होती है, वहीं ग्रामीण क्षेत्र की पूर्ति पंचायती राज संस्थाओं से होती है। सड़क, सफाई, नाली, सार्वजनिक प्रकाश आदि के काम इन दोनों स्थानीय सरकारों के जरिये ही होते हैं। 

 

वहीं शहर में सड़कों, गलियों आदि में मरम्मत, निर्माण के कार्य, रोजमर्रा की आवश्यकताओं के दस्तावेज व विकास के अन्य कार्य इन दोनों स्थानीय सरकारों के माध्यम से ही होते हैं। गांधी ने राम राज्य के लिए इसी तरह के ग्राम स्वराज की स्थापना का सपना देखा था। अकाल, बाढ़ आदि में भी इन्हीं स्थानीय सरकारों का महत्त्व रहता है। इनके जरिए ही केंद्र व राज्य सरकार समस्या का मुकाबला करती है और आम जन तक मदद पहुंचाती है।

कांग्रेस - भाजपा जुटे चुनावी तैयारी में:

काफी राजनीतिक तकरार और कानूनी हस्तक्षेप के बाद राज्य में अब स्थानीय निकाय व पंचायती राज के चुनाव हो रहे हैं। कांग्रेस की तरफ इन चुनावों को लेकर कोर्ट का भी दरवाजा भी खटखटाया था। अब हाईकोर्ट ने समय सीमा में चुनाव कराने को लेकर राज्य सरकार को आदेश दे दिए हैं।
कोर्ट के इस आदेश के बाद भाजपा व कांग्रेस, दोनों ही चुनावी तैयारी में जुट गए हैं। दोनों के लिए यह चुनाव बड़ी अग्नि परीक्षा है। भाजपा की ढाई साल की सरकार के कामकाज का इस चुनाव में मूल्यांकन होगा तो विपक्ष के रूप में कांग्रेस की क्या भूमिका रही, मतदाता यह भी मूल्यांकित करेगा। मूल रूप से इन चुनावों में सीएम भजनलाल व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ की व पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा की प्रतिष्ठा दाव पर रहेगी। 

 

भाजपा ने गुरु पूर्णिमा से इन चुनावों के लिए अपना काम आरम्भ कर दिया है। इस दिन हर जिले में पार्टी के पदाधिकारियों व जन प्रतिनिधियों ने संतों का सम्मान किया। पूजन किया। इस कार्यक्रम के जरिये उन्होंने सामाजिक समरसता का संदेश देने की कोशिश की है। यह कदम स्थानीय निकायों के चुनाव के लिए उठाया गया है। वहीं मंत्रियो को ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर जन सुनवाई करने और समस्याओं के निस्तारण के तुरन्त आदेश देने के लिए कहा गया है। यह पंचायती राज चुनावों की तैयारी का ही एक हिस्सा है।

दूसरी तरफ कांग्रेस भी इन चुनावों को लेकर सक्रिय हो गयी है। पार्टी अध्यक्ष गोविंद डोटासरा राजीव गांधी पंचायती राज संगठन की बैठक कर नेताओं व कार्यकर्ताओं में चुनावी रणनीति का मंत्र फूंक चुके हैं। वहीं शहर में बूथ स्तर से जिला स्तर तक की सांगठनिक बैठकें आरम्भ करने के निर्देश जिला कांग्रेस संगठन को दिए जा चुके हैं। कुल मिलाकर भाजपा व कांग्रेस, चुनावी तैयारी में पूरी तरह जुट गए हैं।

50 फीसदी टिकट युवाओं को:

कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद डोटासरा ने घोषणा कर दी है कि इन चुनावों में 50 प्रतिशत टिकट पार्टी 50 साल की उम्र से कम के पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं को देगी। मतलब युवाओं को इस बार टिकट देने में प्राथमिकता रहेगी। इन युवाओं का चयन बूथ, वार्ड व जिला स्तर की बैठकों में किया जायेगा।

 

अब भाजपा की भी मजबूरी है कि वो भी इन चुनावों में युवाओं को प्राथमिकता दे। यह इसलिए भी जरूरी है कि युवा मतदाताओं की संख्या अधिक है। दोनों तरफ से युवा उतरेंगे तो जाहिर है इस बार स्थानीय निकाय व पंचायत राज चुनावो में मुकाबला बड़ा रोचक होगा।

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