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दिलावर ने कहा तबादलों में भ्रष्टाचार साबित करे, पद छोडूंगा, डोटासरा का आरोप, तबादलों में जमकर भ्रष्टाचार हुआ

दिलावर ने पूर्व सीएम गहलोत का बयान याद दिलाया
 

मधु आचार्य ' आशावादी '
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RNE Special.
 

शिक्षा सहित अन्य विभागों में 10 जुलाई को तबादलों पर फिर से रोक लग गयी, मगर तबादलों की आंच से राज्य की राजनीति में भी अब भी गर्माहट बनी हुई है। हर बार की तरह शिक्षा विभाग में इस बार भी सबसे अधिक तबादले हुए। यह स्वाभाविक भी था, क्योंकि राज्य के इसी महकमे में सर्वाधिक कार्मिक है। 

शिक्षा विभाग में सीधे सीधे 21 हजार से अधिक तबादलों के आंकड़े लोग देते हैं। मगर साथ ही यह भी कहते हैं कि तबादलों के बाद जो संशोधन आदेश निकले, उनकी विगत उनके पास नहीं है। यदि संशोधन आदेशों को जोड़ा जाए तो तबादलों की संख्या बहुत अधिक हो जाएगी। जिसमें तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादलों पर लगी रोक तो हटाई ही नहीं गयी थी। इस वर्ग के शिक्षक तबादलों पर 8 साल से प्रतिबन्ध लगा हुआ है।
 

तबादलों की गणित को थोड़ा और सरल किया जाए तो यह तथ्य उभर के सामने आता है कि इस बार सर्वाधिक तबादले शिक्षकों के हुए हैं। इसी कारण शिक्षक तबादलों पर सर्वाधिक आरोप - प्रत्यारोप चल रहे हैं। शिक्षक तबादलों में बदले की भावना से तबादले किये जाने की बात भी प्रमुखता से उठ रही है। यह आरोप भी जायज इस कारण है कि इस बार भी शिक्षक तबादले तबादला नीति के बिना राज्यादेशों से विधायकों की डिजायर के अनुसार हुए हैं। इस कारण ही कहा जा रहा है कि तबादलों में बदले की भावना भी खूब चली है।

डोटासरा के दिलावर पर आरोप:

पीसीसी चीफ व पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद डोटासरा के मध्य सदन से लेकर सड़क तक, आरोपों का सिलसिला अनवरत है। दोनों एक दूसरे पर प्रहार करने में जरा सा भी नहीं चूकते। चूंकि डोटासरा पहले शिक्षा मंत्री रह चुके हैं इस कारण विभाग पर उनकी पकड़ है, इसी वजह से वे नए नए मामले निकालकर लाते हैं और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर आरोपों की झड़ी लगा देते हैं।

इस बार के शिक्षक तबादलों के बाद डोटासरा ने दिलावर पर आरोपों का पिटारा खोल दिया। उनका कहना था कि उनके लक्ष्मणगढ़ से चुन चुनकर शिक्षकों को दूरदराज भेजा गया। बस यह देखा गया कि डोटासरा के समय में कौन कौन लक्ष्मणगढ़ आया है, उनको बिना सोचे समझे बाहर स्थानांतरित कर दिया गया। डोटासरा ने इस बार भी तबादलों में जमकर भ्रष्टाचार होने का आरोप दिलावर पर लगाया। उनका कुछ अन्य लोगों पर यह कहते हुए आरोप था कि मंत्री के नाम पर उन्होंने जमकर भ्रष्टाचार किया।

दिलावर ने किया पलटवार:

शिक्षा मंत्री भी बयानों में कमजोर नहीं है। वे तो अपने बयानों को लेकर अनेक बार विवाद में भी आते रहे हैं। वे गोविंद डोटासरा के बयानों पर चुप तो रहने वाले नहीं थे। वे भी बोले, जमकर बोले। कड़ा पलटवार किया और गम्भीर आरोप पूर्व शिक्षा मंत्री व पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा पर लगाये।
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि कांग्रेस के पिछले शासनकाल में शिक्षा विभाग में जमकर भ्रष्टाचार हुआ। उन्होंने चुनोती दी कि यदि डोटासरा शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का एक भी आरोप साबित कर दें तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा। दिलावर ने कहा कि उनके स्टाफ में यदि किसी व्यक्ति द्वारा पैसे लेने का प्रयास मिलता है तो उसी दिन उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी।

दिलावर ने डोटासरा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि शिक्षक तबादले पूर्ण रूप से पारदर्शी तरीके से हुए हैं। शिक्षकों के प्रार्थना पत्रों के अनुसार उनको तबादलों से राहत देने का काम किया गया है, बदले की भावना से कुछ नहीं हुआ है। अधिक तबादले भी नहीं किये गए हैं।

दिलावर ने बताया कांग्रेस का रेट कार्ड:

दिलावर अपने बयान से हलचल पैदा करने में माहिर है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व शिक्षा मंत्री डोटासरा महाभ्रष्ट है। कांग्रेस सरकार के समय शिक्षकों के तबादलों में पैसे लेने की व्यवस्था थी। शिक्षा मंत्री ने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने शिक्षकों ने भी ट्रांसफर - पोस्टिंग में पैसे देने की बात कही थी। 

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कोटा प्रवास में दावा किया कि थर्ड ग्रेड शिक्षकों के ट्रांसफर के लिए चार माह, सेकंड ग्रेड के लिए तीन माह और फर्स्ट ग्रेड के लिए ढाई माह की सैलरी के बराबर राशि ली जाती थी। 

यह टकराहट सदन तक जायेगी:

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर व पीसीसी चीफ व पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद डोटासरा की टकराहट को विराम नहीं लगता। अब शिक्षक तबादलों को लेकर , भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर जो टकराहट शुरू हुई है, उसकी गूंज विधानसभा के अगले सत्र में भी होनी तय है। क्योंकि डोटासरा भी शिक्षक तबादलों की कमियां व विसंगतियों को जुटाने में लगे हुए हैं।

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