Mothers Day Celebration : मातृ दिवस पर सजी काव्य संध्या, डॉ. पुरुषोत्तम व्यास का हुआ सम्मान
RNE Bikaner.
राजस्थान साहित्य चेतना मंच की ओर से मातृ दिवस के अवसर पर बीकानेर के नत्थुसर बास स्थित स्वामी सदन में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। दो चरणों में आयोजित इस कार्यक्रम में मातृशक्ति, संस्कार और संवेदनाओं पर आधारित कविताओं ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। साथ ही श्रीगंगानगर से आए वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पुरुषोत्तम व्यास का सम्मान भी किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि जुगल किशोर पुरोहित तथा विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ कवि डॉ. जगदीश दान बारहठ थे। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं चिकित्सक डॉ. शंकर लाल स्वामी ने की, जबकि संयोजक पूर्व प्राचार्य, चिंतक एवं लेखक प्रो. डॉ. नरसिंह बिनानी रहे।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. शंकर लाल स्वामी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में मां का स्थान सर्वोपरि होता है और मातृशक्ति ही बच्चों में संस्कारों का संचार करती है। उन्होंने अपनी दोहावली —
“बंटवारे में धन लिया, हो गए वे कंगाल,
मां मेरे हिस्से रही, मैं हूं मालामाल”
— प्रस्तुत कर खूब वाहवाही बटोरी।
मुख्य अतिथि जुगल किशोर पुरोहित ने मां और संतान के अटूट रिश्ते को रेखांकित करते हुए अपनी भावपूर्ण कविता “मां तुम दुख सब हरो…” सुनाई।
डॉ. जगदीश दान बारहठ ने अपनी रचना “मां कुछ ऐसी है, सब कुछ वही हो जैसी है” के माध्यम से मातृशक्ति को नमन किया। संयोजक प्रो. डॉ. नरसिंह बिनानी ने मां की ममता का भावपूर्ण चित्रण करते हुए कहा कि मां गर्भधारण के साथ ही अपनी खुशियों का त्याग कर देती है। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं सरस्वती वंदना से हुआ।
गोष्ठी में वरिष्ठ साहित्यकार शिव शंकर शर्मा, शिक्षिका डॉ. कृष्णा गहलोत और कथाकार उमाशंकर बागड़ी सहित कई साहित्यकारों की रचनाओं की प्रभावी प्रस्तुतियां हुईं। संचालन प्रो. डॉ. नरसिंह बिनानी ने किया।
कार्यक्रम के दूसरे चरण में राजस्थान साहित्य चेतना मंच द्वारा श्रीगंगानगर से आए वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पुरुषोत्तम व्यास का सम्मान किया गया। वक्ताओं ने उनके सेवाभाव, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और सादगी को युवापीढ़ी के लिए प्रेरणादायी बताया। अंत में इंजी. भानेश्वर स्वामी ने सभी का आभार व्यक्त किया।

