बरसात में दो दर्जन से अधिक जगहों पर वर्षों से भर रहा पानी, सीवरेज से महरूम है शहर के बहुत से इलाके
रितेश जोशी

RNE Special.
बीकानेर के लिए यह एक सुखद बात है कि हमारी सरकार यहां दो दिन रहेगी। इस अवधि में शहर की समस्याओं को जानने का अवसर भी मिलेगा। जब जान लेंगे तो सुधार के भी उपाय होंगे। बशर्ते, हमारे विधायक व अन्य जन प्रतिनिधि सरकार को सही तस्वीर बताएंगे। यह अवसर मुश्किल से ही मिलते हैं। जब मिल रहा है अवसर तो उसका उपयोग भी जन प्रतिनिधियों को करना चाहिए। सरकार की अब तक की कार्यप्रणाली तो यही रही है कि वे हाथों हाथ समस्या के निस्तारण के आदेश देते हैं। जन प्रतिनिधियों को यह अवसर चूकना नहीं चाहिए।

बीकानेर संभाग मुख्यालय है मगर फिर भी यहां न तो पूरी सीवरेज है और न ही ड्रेनेज का माकूल सिस्टम है। इसके अलावा शहर में अनेक नाले खुले पड़े हैं और उनकी सफाई भी गाहे बगाहे होती है। इसे नगर निगम की बड़ी असफलता ही माना जाना चाहिए। यह वो पहली रोजमर्रा की जरूरतें है जिनके अभाव में यहां के बाशिंदों को नारकीय जीवन जीने को मजबूर होना पड़ता है।
अनेक बार दुर्घटनाएं हुई है। बड़ी बड़ी दुर्घटनाएं हुई है मगर नगर निगम व प्रशासन ने आंखें ही बन्द रखी है। लोग चुप रहे हों, ऐसा भी नहीं है। मगर नगर निगम ने केवल उनके गुस्से पर पानी के छींटे डाले। वर्षों से इस समस्या का हल नहीं किया। इससे दुखद स्थिति बीकानेर वासियों की हो नहीं सकती।
सीवरेज से बड़ा इलाका वंचित है:
21 वीं सदी है और जीवन अत्याधुनिक हो गया। सीवरेज तो अब गांवों तक भी पहुंच गई। मगर बीकानेर का यह दुर्भाग्य है कि यहां संभाग मुख्यालय के बाद भी बड़ा इलाका सीवरेज की सुविधा से वंचित है। कोई इस तरफ ध्यान ही नहीं देना चाहता। जबकि बीकानेर पश्चिम के विधायक जेठानन्द व्यास इस समस्या को लेकर लगातार सरकार व प्रशासन से मिलकर बात रख चुके हैं।

मगर अधिकारी अभी तक भी उनकी मांग उनके सुझाव पर ध्यान नहीं दे रहे। क्योंकि सीवरेज से वंचित अधिकतर क्षेत्र बीकानेर पश्चिम में ही है। पुराने शहर में जबकि सीवरेज की ज्यादा जरूरत है, मगर स्वायत्त शासन विभाग या बीकानेर नगर निगम इस हालत के बाद भी कोई कार्य योजना नहीं बना रहा है। यह बहुत दुखद स्थिति है। सरकार, आपसे उम्मीद है।
ड्रेनेज का भी सिस्टम नहीं:
राजस्थान में वैसे ही बरसात कम होती है। फिर बीकानेर में तो बहुत ही कम बारिश होती है। जहां लोग अपने शहर में बारिश के लिए प्रार्थना करते हैं वहीं शहर के लोग बरसात से बचाव की प्रार्थना करते हैं। क्योंकि बरसात आते ही लोग बड़ी समस्या में घिर जाते हैं।

हर साल मानसुन की बरसात होती है और हर साल उन्हीं जगहों पर पानी भरता है, मगर यहां का नगर निगम केवल कामचलाऊ व्यवस्था करता है। इस समस्या के स्थायी समाधान की कोई योजना ही नहीं बनाता। लोगों का तो यहां तक आरोप है कि इसकी वजह भ्रष्टाचार है। गिन्नानी, नगर निगम के आगे, सूरसागर के आगे, कलेक्ट्रेट, रेलवे स्टेशन के सामने, पीबीएम के सामने, कोठारी हॉस्पिटल के सामने, रोशनी घर चौराहा, फड़ बाजार, हेड पोस्ट ऑफिस के सामने आदि पानी जमा होने के स्थायी स्पॉट है। इतना पानी भरता है कि लोग निकल नहीं सकते। बच्चे तैरते भी है। सरकार, इस स्थायी नारकीय समस्या का तो निदान कराओ।
खुले नाले से मौत को आमंत्रण:
संभाग मुख्यालय होने के बावजूद बीकानेर वो शहर है, जहां आज भी गंदे पानी के नाले खुले पड़े हैं और उनमें कीचड़ भरा रहता है। इन नालों की सफाई कभी कभार होती है, वो भी नाम मात्र की। नालों का तल तो किसी ने देखा भी नहीं होगा। यह नगर निगम की घोर लापरवाही है।

जब कभी इसमें कोई गौ वंश गिरता है तो लोग असहाय हो जाते हैं। आदमी गिर जाए तो फिर तौबा। इन खुले नालो से नगर निगम खुद ही दुर्घटनाओं को न्योता देता है। बरसात के समय तो ये पानी नालों में नहीं सड़क पर बहता है। साथ में सड़क को भी कचरे से पाट देता है। यह कचरा भी 3 - 4 दिन साफ नहीं होता। इन खुले नाले या यूं कहा जाए कि मौत के कुओं को ढकने का काम इस नगर की जरूरत है। निगम को कसने की जरूरत है। सरकार, जनता को त्राहिमाम करने से बचाएं। स्थायी निदान कराएं।

