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Himalay से Bikaner तक हर-हर महादेव : 1400 किमी तक कंधों पर कावड़ लेकर आए बीकानेर के शिवभक्त गोपाल पुरोहित 

 

Rudra News Express Bikaner. 


अगर आस्था की ताकत का कोई प्रमाण चाहिए तो बीकानेर आकर एक युवक को देख लें जो आज यानी 03 अगस्त 2026 को सावन के पहले सोमवार के दिन अपने शहर पहुंचा है और उसके कंधों पर है लगभग 08 किलो वजन की कावड़। हालांकि सावन के महीने में हजारों लोग कावड़ लेकर अपने शहर या गांव के शिवालयों तक पहुंचते है लेकिन गोपाल पुरोहित की कावड़ यात्रा न केवल दुर्गम है वरन कदन-कदम पर आई जोखिमों से सामने वाली भी है। वजह, गोपाल पुरोहित यह कावड़ हरिद्वार से नहीं वरन ठेठ हिमालय के ग्लेशियर तक जाकर वहां से लाए हैं।

यही वजह है कि आज बीकानेर पहुँचने पर शिवभक्त गोपाल पुरोहित के स्वागत में लोग उमड़ पड़े। उन्हें मालाओं से लाद दिया। पैर छूकर आशीर्वाद तक लेते दिखे। लक्ष्मीनाथ मंदिर से गोपेश्वर महादेव मंदिर तक बाकायदा शोभायात्रा के रूप में नाचते-गाते, हर-हर महादेव उद्घोष लगाते लोग लोगों का काफिला उसके साथ चल पड़ा। रास्ते में जगह-जगह स्वागत, अभिनंदन हुआ। 

जानिए क्या बोले गोपाल पुरोहित :

Rudra News Express से बातचीत में गोपाल पुरोहित ने कहा, यह भगवान भोलेनाथ की भक्ति की शक्ति है और उनकी कृपा से यह मनोरथ पूरा हो पाया है। गोपाल बताते हैं कि बीकानेर जिले में ही नापासर के दो युवक भी हिमालय में ग्लेशियर यानी गौमुख से आगे मेरे साथ चलकर कावड़ लाए हैं। वे नापासर के शिव मंदिर में कावड़ से अभिषेक करेंगे। 

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गोपाल पुरोहित के भाई दिनेश पुरोहित ने कहा, भाई की भक्ति से पूरा परिवार गौरवान्वित है। सभी प्रार्थना करते हैं कि बाबा भोलेनाथ ये भक्तिभाव यूं ही बनाए रखें। दिनेश पुरोहित बताते हैं कि पिछले साल भी गोपाल कावड़ लाया थे लेकिन उस वक्त हरिद्वार से कावड़ आई थी। इस बार गौमुख तक जाकर सावन के पहले सोमवार को इस जल से बाबा का अभिषेक करने का सौभाग्य मिला है।

कितनी दुर्गम है यात्रा : 

हालांकि हरिद्वार जाने वाला देश का लगभग हर रास्ता इन दिनों कावड़ियों से भर है। हर ओर "हर हर - बम बम" उद्घोष गूंज रहे है। दुर्गम रास्तों पर हौसले और भक्ति की शक्ति के साथ लोग बढ़ रहे हैं लेकिन बिरले हैं जो ग्लेशियर तक जाकर शिव अभिषेक के लिये जल लेकर अपने शहर-गांव तक पैदल जा रहे हैं। गोपाल पुरोहित की यात्रा का ही जिक्र करें तो सड़क मार्ग से यह लगभग 1400 किमी लंबी यात्रा होती है। 

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जानिए कहाँ है गौमुख : 

गौमुख (Gaumukh) उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी ज़िले में गंगोत्री हिमानी का अंतिम छोर है, जहाँ से भागीरथी नदी आरम्भ होती है जो गंगा नदी की एक प्रमुख स्रोतधारा है। 4,023 मीटर (13,200 फुट) पर स्थित यह स्थान हिन्दू धर्म में एक पवित्र स्थल व तीर्थ है। यह गंगोत्री बस्ती से लगभग 18 किमी दूर है। एक लोकप्रिय हाईकिंग पगडण्डी भी यहाँ आती है। 

मॉरीशस के प्रधानमंत्री यहां से जल ले गए : 

गौमुख के जल की धार्मिक मान्यता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि सन् 1972 में मॉरीशस के तत्कालीन प्रधानमंत्री, शिवसागर रामगुलाम, यहाँ से जल लेकर गए थे। उन्होंने मॉरीशस में ग्रों बास्सें नामक ज्वालामुखीय झील में मिलाया गया, जिसे गंगा तलाब भी कहा जाता है और जो एक हिन्दू तीर्थस्थल है।

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