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हरीश चौधरी ने शुरू की वर्चस्व की लड़ाई, हेमाराम जी के अनशन के कारण पायलट भी मैदान में

डोटासरा को भी आना पड़ा है मैदान में, आरएलपी भी दे रही दस्तक
हरीश ने मेवाराम सहित अपने विरोधियों को नजरअंदाज किया
 

मधु आचार्य ' आशावादी '
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RNE Special.
 

थार की राजनीति इस सर्दी के मौसम में भी गर्मायी हुई है। पंचायतों के सरकार के विलय के बाद यहां कांग्रेस मैदान में उतर आई है। जनता की लड़ाई लड़ने के लिए पूर्व मंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता हेमाराम चौधरी मैदान में उतरे है। जबकि वे चुनावी राजनीति से दूर हो चुके है। पिछली बार भी पार्टी के बारबार आग्रह करने के बाद भी उन्होंने विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा।

अभी थार से के के विश्नोई राज्य सरकार में मंत्री है और उन पर ही पंचायतों को इधर उधर करने का आरोप है। हेमाराम जी धरने पर बैठ गए है । चुनाव की चाह न होने के बाद भी धरने पर उनके आने से बड़ी संख्या में जनता भी इस आंदोलन से जुड़ गई है। मगर ये भी तय है कि धोरीमन्ना के बहाने कई राजनीतिक दिशाओं में एक साथ तीर चलाये जा रहे है। 
 

लोकसभा चुनाव से है एक तिकड़ी:
 

थार की राजनीति में लोकसभा चुनाव के समय से एक तिकड़ी पूरी राजनीति को अपने तरीके से चला रही है। इस तिकड़ी में कांग्रेस के कद्दावर नेता हरीश चौधरी है, जिनकी पार्टी आलाकमान तक मजबूत पकड़ है। वे वर्तमान में मध्यप्रदेश के प्रभारी भी है। उनके साथ है वरिष्ठ कांग्रेस नेता हेमाराम चौधरी। जो सचिन पायलट के साथ है। इस तिकड़ी को पायलट का भी जाहिर है समर्थन है। तीसरे है बाड़मेर के सांसद उमेदाराम बेनीवाल। जो हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएलपी से लोकसभा चुनाव के समय कांग्रेस में आये। उनके चुनाव की कमान हरीश चौधरी व हेमाराम जी ने ही संभाली थी। कुल मिलाकर तब से थार की राजनीति में हरीश चौधरी का वर्चस्व है। धोरीमन्ना का आंदोलन उसी वर्चस्व की लड़ाई का हिस्सा है।


 

आज की महारैली में पायलट भी:
 

धोरीमन्ना की आज होने वाली महा जनरैली में सचिन पायलट ने आने की घोषणा कर दी है। जहां हेमाराम जी हो वहां पायलट का होना तो बनता ही है। पायलट के मुश्किल दौर में हेमाराम जी भी उनके कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे थे। मानेसर जाने वाले विधायकों में हेमाराम चौधरी भी थे। इन दिनों हरीश चौधरी भी पायलट के निकट है, वे अशोक गहलोत से दूरी बना चुके है। मेवाराम जैन को वापस कांग्रेस में लेने का चौधरी ने विरोध किया था मगर गहलोत आखिरकार सफल हो गये, जैन अब पार्टी में है। मगर इस महारैली से गहलोत व मेवाराम जैन, दोनों ही दूर है। 

डोटासरा भी आ रहे महारैली में:
 

धोरीमन्ना की इस महारैली में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद डोटासरा भी शामिल हो रहे है। पार्टी के राज्य प्रमुख होने के कारण उनकी ड्यूटी है। मगर उससे भी बड़ी बात है, उनकी हरीश चौधरी से निकटता। आजकल डोटासरा का भी पार्टी में एक बड़ा धड़ा माना जाता है। पिछले दिनों डोटासरा व हरीश चौधरी के बीच डोटासरा के जयपुर आवास पर लंबी बात भी हुई थी, उसके भी अपने राजनीतिक मायने है। डोटासरा फिलहाल पायलट को भी खुश रखना चाहते है, उसका जरिया भी धोरीमन्ना की यह रैली है। इसके अलावा सांसद उमेदराम बेनीवाल भी डोटासरा के निकट है।

आरएलपी भी तलाश रही जमीन:
 

बाड़मेर या यूं कहें कि थार हनुमान बेनीवाल के प्रभाव का भी इलाका है। उमेदराम के कांग्रेस में जाने से हनुमान नाराज भी काफी है, डोटासरा से भी उनकी नहीं बनती। मगर हेमाराम जी की उपेक्षा कर वे थार में पांव आसानी से टिका नहीं सकते, ये भी उनको अंदाज है। दूसरे मंत्री के के विश्नोई से भी हनुमान की सीधी राजनीतिक टकराहट है। हरीश से सीधी लड़ाई के बाद भी इस आंदोलन के प्रति उनको सॉफ्ट होना पड़ा है। भले ही वे हरीश चौधरी, उमेदराम, डोटासरा के विरोधी है, मगर पांव टिकाने के लिए सॉफ्ट तो होना जरूरी है।
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जन महारैली से बनेंगे नये समीकरण:
 

आज की धोरीमन्ना की इस महारैली से नये राजनीतिक समीकरण बनेंगे। मेवाराम जैन व गहलोत को इसमें न बुलाकर थार से नया संदेश दिया गया है। इस रैली ने सीएम भजनलाल व भाजपा की परेशानियां भी बढ़ा दी है। भजनलाल सरकार को अब इस मसले पर सोच समझकर निर्णय लेना पड़ेगा, नहीं तो थार भाजपा के लिए कई चुनावी परेशानियां खड़ी करेगा।

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