जनरंजन : आज-आज का दिन पार्षद उम्मीदवारों के पास मेहनत का, कल EVM में बन्द हो जायेगा भाग्य, अगला चरण शुरू, बोर्ड और मेयर की बिछ गई बिसात
मधु आचार्य ' आशावादी '
स्थानीय सरकार किसकी बनेगी, अब उसका काउंटडाउन शुरू हो गया है। नगर निगम में बोर्ड किसका बनेगा, मेयर किस पार्टी का होगा, यह पार्षद तय करेंगे। उन्हीं पार्षदों के लिए कल मतदान होगा। जिस दल के 40 से अधिक पार्षद जीतेंगे, उसका महापौर यानी मेयर बनेगा। या फिर जो पार्टी पार्षद कम पड़ने पर दूसरे जीते पार्षद लाकर जुगाड़ कर लेगी, उसका मेयर बनेगा।
निर्दलीय, आरएलपी, बसपा व बागियों की बड़ी संख्या और उनमें से कुछ के जीतने की स्थिति देखकर लगता है, जो भी पार्टी मेयर बनाएगी, उसे कुछ पार्षदों का तो साम - दाम - दंड - भेद से जुगाड़ करना ही पड़ेगा।
कल वार्ड पार्षद के लिए वोट पड़ने के बाद चुनावी विश्लेषक यह तो मोटा मोटा अनुमान लगा ही लेंगे कि कौनसे वार्ड में कौन जीत रहा है, उनके कितने पार्षद जीत रहे हैं। उस आंकड़े के अनुसार ही आगे की व्यवस्था भी की जाने लगेगी।
पिछले नगर निगम के चुनाव शहर को याद होंगे। जब भाजपा को मेयर बनाने के लिए पूरा बहुमत नहीं मिला था। तब भाजपा ने जुगाड़ से बहुमत जुटाया और हरियाणा में पार्षदों की बाड़ेबंदी की। कांग्रेस उस समय राज्य सरकार में होते हुए भी कमजोर पड़ गयी थी। रणनीति की कमजोरी का खमियाजा कांग्रेस को उठाना पड़ा था।
बीकानेर सहित राज्य में अभी तक एक बार ही मेयर का चुनाव पार्षदों ने नहीं किया था। इस पद के लिए सीधे वोट पड़े थे और वह चुनाव बीकानेर में कांग्रेस के दिग्गज नेता भवानी शंकर शर्मा ने जीता था। तब पार्षदों की जुगाड़ व्यवस्था पूरी तरह समाप्त हो गयी थी।
मेयर पार्षदों का चुना नहीं, सीधे जनता का चुना हुआ था। कुछ अर्थों में स्थानीय सरकार के लिए वह व्यवस्था ठीक थी। पार्षदों की बाड़ेबंदी या अन्य खर्च मेयर उम्मीदवार को नहीं करने पड़े थे। मगर राजनीतिक दलों के लिए तो यह व्यवस्था मुफीद है ताकि वह जैसे तैसे पार्षदों का जुगाड़ कर अपना बोर्ड व मेयर बना ले। राजनीति वालों को टेढ़े रास्ते ज्यादा पसंद आते हैं।
पार्षदों के पास मेहनत के लिए आज आज का दिन
वार्ड पार्षद का चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के लिए वोट के लिए मेहनत करने के लिए आज का ही दिन शेष बचा है। आज वे घर घर जाकर वोट मांग सकते हैं। वोटर की मनुहार कर सकते हैं। रिश्तेदारी की दुहाई देकर मत प्राप्त कर सकते हैं। उम्मीदवारों के परिजन भी आज अपनी पूरी शक्ति अपने मोहल्ले, वार्ड के लोगों के पास जाकर गुहार करने के लिए लगाएंगे।
आज की रात को कत्ल की रात भी कहा जाता है। आज रात कई मतों का रुख मोड़ने की गवाह बन सकती है। हर तरीके को उम्मीदवार अपनाएंगे और वोटर के रुख को बदलेंगे। रात के समय में उन लोगों पर मेहनत की जाएगी जो विरोध में है या फिर रूठे हुए हैं। कई मतदाताओं का आज रुख बदलेगा और उम्मीदवार का भाग्य भी उससे बदल जायेगा। इस कारण ही इसे कत्ल की रात कहते हैं।
कल भाग्य ईवीएम में बंद हो जायेगा
कल तो हर उम्मीदवार का भाग्य ईवीएम में बंद हो जायेगा। उसकी किस्मत वार्ड का मतदाता लिख देगा। बस कयास और उम्मीद ही शेष रहेंगे, जिन पर पटाक्षेप मतगणना के दिन होगा। तब तक केवल दावे ही हवा में तैरते रहेंगे।
अब पार्टियां बिछा रही मेयर की बिसात
अब तो पार्टियों ने मेयर पद के लिए बिसात बिछा दी है और मोहरे चलने शुरू कर दिए हैं। इस नीति के कारण ही कोई एक पार्टी मेयर बना सकेगी। मजबूत व जिताऊ उम्मीदवारों को मतगणना समाप्त होते ही पार्टियां अपने पाले में लेना शुरू कर देगी।
मतगणना के दिन तक वो उनको अपने ही संरक्षण में रखेगी ताकि जीतते ही अपने निर्धारित स्थान पर ले जाये और हारे उसको मुक्त कर दे। स्थानीय सरकार के लिए जोड़ तोड़ का खेल तो अब कल से शुरू होगा। जो जितनी सटीक गणना करेगा, उतना ही फायदे में रहेगा।

