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शहीद दिवस पर महात्मा गांधी पर खास खबर : जोशीजी का मार्गदर्शन, भाई का साथ, गांधी की बैरिस्टरी का सफर शुरू

 

- रिंकू

RNE, SPECIAL.

आज का खास दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को समर्पित है जिसे हम शहीद दिवस के रूप में मनाते है। आज हम इस रिपोर्ट में गांधी के जीवन का वो विशेष पहलू जिसने उनको गढ़ा, को टटोलने का प्रयास करेंगे। आज हम गांधी से जुड़े उस व्यक्ति की बात करेंगे जिसके विचार ने उनकी सफलता की नींव रखी।

हम बात कर रहे हैं मावजी दवे जोशी की :
 
मावजी दवे जोशी एक विद्वान ब्राह्मण के साथ गांधी जी के पिताजी के बहुत अच्छे दोस्त थे। गांधी अपनी आत्मकथा में लिखते है कि मेरे पिताजी के निधन के बाद भी जोशी जी का मेरे घर आना जाना था। वे हमारे परिवार के करीबी लोगों में थे और उनकी राय हमेशा से ही परिवार के लोगों में मान्य थी।

 

इसी प्रकार एक सामान्य मुलाकात में मेरी मां से जोशीजी ने पढ़ाई के बारे में पूछा कि यह क्या कर रहा है? बताया गया कि समलदास कॉलेज में पढ़ रहा है तो उन्होंने कहा कि अब समय वैसा नहीं रहा जो सामान्य शिक्षा से काम हो जाए। सामान्य शिक्षा से ये अपने पिता के पद तक भी नहीं पहुंच पाएगा। इसे अब कुछ और करने की जरूरत है।

मावजी ने नब्ज पहचानी, पूछा इंग्लैंड जाओगे ?
 

मावजी एक गहरी समझ के व्यक्ति थे उन्हें अंदाजा था कि इस पारंपरिक शिक्षा से अब काम नहीं चलने वाला उन्होंने मुझे तपाक से पूछा क्या तुम पढ़ने के लिए इंग्लैंड जाना पसन्द करोगे? गांधी के लिए इससे बड़ी खुशी की बात कोई नहीं थी उन्होंने झट से हामी भर दी। मावजी का बेटा केवलराम पहले से ही इंग्लैंड में पढ़ाई कर रहा था जिसके कारण इस बारे में उन्हें समूची जानकारी थी।


मां पुतलीबाई की हिचक, भाई का साथ, समाज का बहिष्कार :

जोशीजी का सुझाव और गांधी की हामी उन्हें इंग्लैंड पहुंचाने के लिए काफी नहीं थी। गांधी को लेकर उनके मां के मन में भी असुरक्षा की भावना व्याप्त थी। उन्हें लगता था कि विदेश में पढ़ाई के दौरान वे गलत आदतों का शिकार हो सकते है। इतना ही नहीं उन्हें समाज का भी भारी विरोध का सामना करना पड़ा। समाज का विरोध इतना था कि उन्हें समाज से ही निकाल दिया गया। लेकिन इन सबके बावजूद उनके बड़े भाई ने पूरा साथ दिया। गांधी जी का बैरिस्टर बनने का सफर इतना आसान नहीं रहा लेकिन इस सफर ने उनको तराशा।

 

मावजी जोशी के एक विचार ने कैसे मोहनदास को एक प्रखर वक्ता, समाज सुधारक और एक महान नेता बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।


 

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