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Kailash Mansarovar Yatra : लजीज खाना मिलेगा कैलास मानसरोवर यात्रियों को, देखे पूरा मीनू 

 

पहली रात यात्रियों का विश्राम टनकपुर पर्यटक आवास गृह में होगा
 

भगवान शिव के भक्तों को कैलास मानसरोवर यात्रा के दौरान खाने की परेशानी नहीं होगी।  कैलास मानसरोवर यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को लजीज खाना मिलने वाला है। पांच वर्ष के अंतराल के बाद कैलास मानसरोवर यात्रा फिर शुरू हो गई है। उत्तराखंड के लिपुलेख दरें से होकर जाने वाला पहला दल शुक्रवार चार जुलाई को दिल्ली से चंपावत जिले के टनकपुर पहुंचेगा। 

पहली रात यात्रियों का विश्राम टनकपुर पर्यटक आवास गृह में होगा। कुमाऊं में प्रवेश करने पर यात्रियों का तिलक लगाकर अभिनंदन होगा। स्वागत ड्रिंक के तौर पर बुरांश के जूस के बाद जखिया आलू, भट की चुड़कानी और झंगोरे की खीर यात्रियों को परोसी जाएगी।

खाने का यह रहेगा मीनू 

कैलास मानसरोवर यात्रियों के रात्रि भोजन के मेन्यू में जखिया के तड़के से तैयार आलू के गुटके, प्रोटीन से भरपूर भट की चुड़कानी (दाल) शामिल है। मीठे में झंगोरे की खीर खिलाई जाएगी। उत्तराखंड में भट की चुड़कानी को भात (चावल) के साथ विशेष रूप से पसंद किया जाता है।

 यात्रियों की थाली में खीरे से तैयार पहाड़ी रायता भी शामिल होगा। दूसरी सुबह आगे की यात्रा पर रवाना होने से पहले नाश्ते में भांग-पुदीने की चटनी, पोहा, इडली सांभर आदि परोसा जाएगा।

चार दशक बाद फिर परंपरागत मार्ग से यात्रा इस बार यात्रा 44

वर्ष पुराने टनकपुर-लोहाघाट मार्ग से होने जा रही है। भारत-चीन युद्ध के बाद 1981 में जब यात्रा दोबारा शुरू हुई तो 1984 तक यही मार्ग उपयोग में लाया गया। 1984 के बाद काठगोदाम से अल्मोड़ा-दन्या-घाट-पिथौरागढ़ मार्ग चलन में आ गया।

इस बार दिल्ली से टनकपुर आने के बाद यात्री चंपावत-लोहाघाट होते हुए पिथौरागढ़ जाने को 146 किमी लंबे पुराने मार्ग का उपयोग करेंगे। काठगोदाम-अल्मोड़ा-घाट रूट की अपेक्षा टनकपुर-चंपावत-घाट सड़क अधिक चौड़ी व आरामदायक है।

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