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बरसाना में लठमार होली से पहले लड्डू बरसे!

नन्दगांव के हुरियारों का कूच, बरसाना की घूंघट वाली हुरियारिनें लट्ठ लेकर तैयार
20 लाख श्रद्धालु जुट रहे, 2000 किलो ठंडाई, कई टन गुलाल तैयार
 

RNE Mathura-Barsana. 

यूं तो देशभर में होली की रंगत चढ़ने लगी है लेकिन सबसे ज्यादा होली की हुल्लड़ और उत्साह कहीं है तो वह है मथुरा, नंदगाव, वृंदावन और बरसाना में। खासतौर पर बरसाना में बसंत पंचमी से शुरू हुई होली की मस्ती अब परवान पर पहुंच चुकी है। आज विश्व प्रसिद्ध लट्ठमार होली शुरू हो गई है। 

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कान्हा का जहां बचपन बीता उस नंदगांव के हुरियारे हुल्लड़ करते 08 किमी दूर बरसाना की ओर निकल चुके हैं। राधा के गांव बरसाना की हुरियारिने लंबा सा घूंघट निकाल, हाथों में लट्ठ लेकर इन हुरियारों पर लाठी बरसाने को तैयार है। इससे पहले हुरियारों को न्यौता देकर पांडा बरसाना लौटे हैं। उनकी अगवानी में लड्डू बरसाए गए हैं। ऐसे में लट्ठ से पहले लड्डू चले और इसमें भागीदारी करने और देखने दुनियाभर से श्रद्धालु-सैलानी बरसाना पहुंच गए। अनुमान है कि लड्डू होली के मौके पर लगभग 05 लाख लोग मौजूद रहे।

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दरअसल ब्रजमंडल में वसंत पंचमी से ही होली का उत्सव शुरू हो जाता है। मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान, वृन्दावन के मंदिरों और बरसाना-नंदगांव में भक्त अबीर-गुलाल से सराबोर नजर आते हैं। बरसाना के श्रीजी मंदिर में लट्ठमार होली से एक दिन पहले लड्डू होली खेली जाती है। इस दिन नंदगांव के हुरियारों को न्यौता देकर पांडा बरसाना लौटता है। मंदिर में गोस्वामी और भक्त उसका लड्डू फेंककर स्वागत करते हैं। समाज-गायन और होली गीतों के बीच भक्त झूम उठते हैं। अगले दिन विश्व प्रसिद्ध लट्ठमार होली खेली जाती है, जिसमें नंदगांव के हुरियारे और बरसाना की हुरियारिनें पारंपरिक अंदाज में होली मनाते हैं। इस अनोखी परंपरा को देखने देश-विदेश से श्रद्धालु बरसाना पहुंचते हैं।

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वहीं दूसरी ओर लट्ठमार में 20 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। हुरियारों की अगवानी में लगभग 2000 किलों ठंडाई घोटी गई है। कई टन गुलाल पूरी होली के दौरान उछल रही है। द्धालु जोश और उत्साह के साथ राधा-रानी की शरण में पहुंच रहे हैं। गुलाल से रंगे हुए भक्त ढोल-नगाड़ों पर झूम रहे हैं। बरसाना की हूरियारिनें लठ लेकर तैयार हैं। कुंज और रंगीली गलियों में करीब 03 किमी तक दोनों तरफ खड़ी हुरियारने लाठियां मारती हैं, इनसे बचने के लिए हुरियारे ढाल का सहारा लेते हैं। इन सबके बीच यह दृश्य देखने वाले खुद को धनी मानते हुए कान्हा और राधा रानी के नजदीक पाते हैं।

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