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कांग्रेस छोड़कर गए मालवीय वापसी की तैयारी में, कई और नेता भी  कांग्रेस के बड़े नेताओं के सम्पर्क में

पंचायत चुनावों से पहले होगी कईयों की वापसी
भाजपा में हलचल तेज हुई, मंथन शुरू
 

मधु आचार्य ' आशावादी '
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RNE Special.
 

जैसी आशंका थी, बिल्कुल वही घटित हो रहा है। विधानसभा और लोकसभा चुनावों के समय कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाने वाले नेता अब घर वापसी की छटपटाहट में है। क्योंकि उनकी उम्मीदों पर पानी फिरा, उनको न तो संगठन में सम्मान मिला और न ही सरकार में भागीदारी। उल्टे उनके राजनीतिक प्रभुत्त्व को भी उनके क्षेत्र में धीरे धीरे घुन लगना शुरू हो गया।

इन नेताओं के समर्थकों का भी उन पर दबाव बढ़ गया। क्योंकि वे बाहर से आये थे इस कारण भाजपा कार्यकर्ताओं से तो पीछे के पायदान पर उनको रहना ही था। ये बात उनको सालने लगी और वे अपने नेताओं पर दबाव बनाने लगे। 

कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गये नेताओं में से भाजपा ने ज्योति मिर्धा व महेन्द्रजीत सिंह मालवीय को ही चुनाव लड़ाया। दोनों जीत नहीं सके। फिर कांग्रेस छोड़कर गये इन नेताओं को उम्मीद थी कि उनको संगठन में सम्मानजनक पद मिल जायेगा, मगर वहां भी स्कोप खत्म हो गया। राजनीतिक नियुक्तियों में इन नेताओं का उम्मीद करना तो बेमानी था, ये बात वे भी जानते थे। आखिरकार छटपटाते इन नेताओं ने फिर से घर वापसी के प्रयास जोर शोर से आरम्भ कर दिए है।
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पहल की है मालवीय ने:
 

पूर्वी राजस्थान के कद्दावर नेता महेन्द्रजीत सिंह मालवीय का धैर्य सबसे पहले टूटा है। मालवीय भाजपा में गये तो उनको विधायकी छोड़नी पड़ी। वे कांग्रेस से विधायक थे और उनका नाम नेता प्रतिपक्ष के लिए भी चला था। मगर वे भाजपा में चले गए, वजह भी स्पष्ट नहीं हो पाई। भाजपा के पास बांसवाड़ा में लोकसभा के लिए कोई वजनदार उम्मीदवार नहीं था। उनको भाजपा ने टिकट दिया मगर वे आदिवासी पार्टी के राजकुमार रोत से चुनाव हार गए। अब न विधायक रहे, न सांसद बने।

बाद में भाजपा ने उनको मुख्यधारा में लाने का प्रयास ही नहीं किया। जबकि कांग्रेस में थे तब वे सांसद रहे, दो बार विधायक रहे, दो बार ताकतवर मंत्री रहे, एआईसीसी के सदस्य रहे। मगर भाजपा ने उनको कुछ भी जिम्मेदारी नहीं दी। ऊपर से कार्यकर्ताओं का दबाव अलग। आखिर उन्होंने घर वापसी का ही निर्णय किया है।
 

कल उन्होंने साफ कर दिया कि वे अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस में वापस आ रहे है। पार्टी नेताओं की भी सहमति मिल गयी है। ये बात उन्होंने पीसीसी अध्यक्ष गोविंद डोटासरा व नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जुली से मुलाकात के बाद कही।
 

कई और नेता भी तैयारी में:
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दो साल की इस अवधि में जिला से प्रदेश स्तर तक के अनेक स्थानीय व कद्दावर नेताओं ने भाजपा ज्वाइन की थी। वे सब अब डोटासरा, जुली, अशोक गहलोत, सचिन पायलट, हरीश चौधरी आदि के संपर्क में है। हरी झंडी का इंतजार है बस। वो मिलते ही इन नेताओं की घर वापसी हो जाएगी। चूरू के प्रताप पूनिया, झुंझनु के जे पी चंदेलिया, जयपुर के सीताराम अग्रवाल आदि भी भाजपा में गये मगर अभी तक नेपथ्य में है। इस तरह के कई नेता है। उनमें से कुछ घर वापसी के लिए विचार भी कर रहे है।
 

पंचायत चुनाव पर नजर:
 

कांग्रेस इन पार्टी छोड़कर गये नेताओं को लेने के लिए भी तैयार है, क्योंकि उसकी नजर पंचायत राज चुनावों पर है। वहां कांग्रेस का जनाधार है, उसे वो बढ़ाना चाहेगी। इस वजह से स्पष्ट है कि पंचायत राज चुनाव से पहले कई नेताओं की कांग्रेस में घर वापसी होनी तय है।
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भाजपा ने भी मंथन शुरू:
 

भाजपा भी अब इस स्थिति को लेकर गंभीर हो गयी है। एक साथ इतने नेताओं का वापस कांग्रेस में जाना भाजपा के परसेप्शन पर असर डालेगा। उस पर एक रणनीति बनानी भाजपा ने भी शुरू कर दी है।

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