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रिक्शा - टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य, यदि मराठी नहीं सीखी तो लाइसेंस कैंसिल होंगे

 

RNE Network.

मातृभाषा को लेकर एक बार फिर महाराष्ट्र ने नया समर्पित भाव दिखाया है। मराठी भाषा को लेकर राज्य के राजनीतिक दल व आम नागरिक बेहद संवेदनशील है। वे मराठी की उपेक्षा को कभी बर्दाश्त ही नहीं करते है। 
 

एक बार कर्नाटक व महाराष्ट्र के मध्य भाषाई झगड़ा होने के कारण सरकारी बस सेवा भी बंद हो गयी थी। उस समय मराठी लोगों की यह जिद थी कि यदि कंडक्टर मराठी नहीं बोलेंगे तो बस को चलने नहीं दिया जायेगा। झगड़ा खूब बढ़ा था।
 

महाराष्ट्र सरकार ने कुछ महीनों पहले हिंदी भाषा को पढाने के आदेश दिए तो लोग भड़क गए। उद्धव व राज ठाकरे ने एक बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया। आखिरकार सरकार को निर्णय वापस लेना पड़ा।
 

अब फिर महाराष्ट्र सरकार ने मराठी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने घोषणा की है कि 1 मई, महाराष्ट्र दिवस से सभी लाइसेंस प्राप्त रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी पढ़ना - लिखना अनिवार्य होगा। नियमों का पालन न करने वाले चालकों के लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे।
कब जागेंगे राजस्थानी ??

राजस्थान के लोग अपनी मातृभाषा राजस्थानी के लिए कब जागरुक होंगे, यह सवाल हर राजस्थानी के मन में उठने लगा है। राजस्थानी रचनाकार सरकार से आग्रह कर रहे है कि वो भी महाराष्ट्र की तरह अपनी मातृभाषा राजस्थानी को तरजीह दे। इसे दूसरी राजभाषा घोषित करे।

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