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महाराष्ट्र की स्कूलों में मराठी पढ़ाना अनिवार्य, नहीं तो जुर्माना, राजस्थान में राजस्थानी को लेकर कब जागेगी सरकार, लोग

 

RNE Special.

महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर निकले एक आदेश ने हर राजस्थानी की सोई पीड़ को एकदम से जगा दिया है। हर राजस्थानी के जख्मों पर जैसे नमक छिड़क दिया है। यह मसला है भाषा से जुड़ा हुआ। महाराष्ट्र सरकार ने अपनी मातृभाषा मराठी को लेकर एक आदेश निकाला है, उस आदेश को देखकर ही राजस्थानी विचलित हुआ है।
महाराष्ट्र में अब सभी बोर्ड व सभी माध्यम के स्कूलों में कक्षा 1 से 10 तक मराठी पढ़ाना और उसकी परीक्षा कराना अनिवार्य होगा। नियम तोड़ने पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगेगा। इसके बाद भी पालन नहीं करने पर स्कूल की मान्यता रद्द की जा सकती है।

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अपनी मातृभाषा के प्रति महाराष्ट्र के लोगों का असीम लगाव है। तभी तो वहां आने वाली हर सरकार अपनी भाषा मराठी को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं करती। दलीय सीमाएं तोड़कर भी मराठी लोग अपनी भाषा के लिए एक मंच पर आते हैं। मराठी लोगों का कहना है कि मराठी भाषा हमारी अस्मिता है, उसके साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ सहन नहीं की जा सकती।
 

दूसरी तरफ राजस्थान है, जिसकी मातृभाषा राजस्थानी की जुबान पर आजादी के बाद से ताला लगा हुआ है। न उसे संवैधानिक मान्यता दी गयी है और न ही उसे दूसरी राजभाषा का दर्जा मिला है। तीन पीढ़ियों के आंदोलन की भी सरकारों को कोई कद्र नहीं है। पता नहीं, राजस्थान की सरकारें,राजनेता और सोए लोग कब जागेंगे।

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