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विख्यात कथाकार ज्ञानरंजन का निधन, 35 वर्षों तक इन्होंने साहित्यिक पत्रिका ' पहल ' का संपादन किया

 

RNE Network.

विख्यात हिंदी कथाकार व पहल पत्रिका के संपादक ज्ञानरंजन का निधन हो गया। उन्होंने कल 7 जनवरी को रात 10.30 बजे जबलपुर में अंतिम सांस ली। वे 90 वर्ष के थे।
 

बुधवार सुबह उन्हें जबलपुर के अस्पताल में भर्ती किया गया था। वे साठोत्तरी कहानी के सशक्त हस्ताक्षर थे। उन्होंने हिंदी साहित्य में अपनी अनूठी पहचान बनाई। उनके निधन से एक साहित्यिक युग का अवसान हो गया। उन्होंने 35 वर्षों तक साहित्यिक पत्रिका ' पहल ' का संपादन किया। उनकी रचनाएं भारतीय व विदेशी भाषाओ में अनुदित भी हुई। उनको अनेक सम्मान मिले।

ज्ञानरंजन के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए राजस्थानी कवि, नाटककार, आलोचक डॉ अर्जुन देव चारण ने कहा कि उन्होंने भारतीय कहानी को ऊंचाईयां दी। साहित्यकार मधु आचार्य ' आशावादी ', ब्रजरतन जोशी, नगेन्द्र किराड़ू, नदीम अहमद नदीम, संजय पुरोहित, अमित गोस्वामी, नवल व्यास, रवि शुक्ला, शायर मोइनुद्दीन माहिर, बुनियाद हुसैन जहीन, असद अली असद, अरमान नदीम, इमरोज नदीम आदि ने शोक व्यक्त किया है।

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