Ayodhya Ram Mandir चढ़ावा चोरी मामले में SIT की प्राथमिक रिपोर्ट, चंपतराय, अनिल मिश्र, गोपाल राव सहित जिम्मेदार अयोध्या ना छोड़ें
राम मंदिर ट्रस्ट का पुनर्गठन किया जाए, सभी सदस्यों की समान रूप से जिम्मेदारी तय की जाए।
गबन मामला: एसआईटी ने सरकार को सौंपी प्रारंभिक रिपोर्ट, जांच अभी जारी
RNE Ayodhya-Lucknow.
अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान के कथित गबन मामले में जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष आने बाकी हैं।
राज्य सरकार ने 13 जून को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। टीम को प्रारंभिक रिपोर्ट सात दिन और अंतिम रिपोर्ट 15 दिन में देने का निर्देश दिया गया था।
ट्रस्ट व्यवस्था में सुधार की सिफारिश :
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एसआईटी ने वित्तीय पारदर्शिता और प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई सुझाव दिए हैं। इनमें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन और काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर एक मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नियुक्त करने की सिफारिश प्रमुख बताई जा रही है।
कई लोगों से हुई पूछताछ :
जांच के दौरान एसआईटी ने ट्रस्ट पदाधिकारियों, कर्मचारियों और दान प्रबंधन से जुड़े लोगों से पूछताछ की। नकदी गणना प्रक्रिया, बैंक रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और दान प्रबंधन प्रणाली की भी जांच की गई। टीम ने दान राशि के कथित दुरुपयोग से जुड़े धन के प्रवाह (मनी ट्रेल) पर विशेष फोकस किया है।
150 से पूछताछ, टिन्नू-अनिल मिश्र के बयान बेमेल :
सूत्रों के अनुसार महासचिव चंपतराय, डॉ. अनिल मिश्र व व्यवस्थापक गोपाल राव सहित नकदी की गणना व मंदिर व्यवस्था से जुड़े लगभग डेढ़ सौ लोगों से पूछताछ हुई। चंपत राय के चालक रहे रामशंकर यादव टिन्नू और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के बयानों का भी मिलान किया गया। असमानता मिलने पर लगातार तीन दिन इन दोनों से पूछताछ हुई। संदिग्ध पाए गए अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, राजेश पाठक, अविनाश शुक्ल, कृष्णदेव तिवारी, सुभाष श्रीवास्तव सहित ट्रस्ट व बैंक से जुड़े कुल 14 लोगों के लिखित बयान भी दर्ज किए गए।
अयोध्या छोड़ने पर रोक लगे :
जांच के दौरान कुछ ट्रस्ट और मंदिर प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पूछताछ पूरी होने तक अयोध्या नहीं छोड़ने की सिफारिश की गई है। एसआईटी ने यह कदम जांच को प्रभावित होने से बचाने के लिए उठाया। इनमें ट्रस्ट महासचिव चंपतराय, सदस्य डॉ. अनिल मिश्र व व्यवस्थापक गोपाल राव सहित अन्य जिम्मेदारों को अयोध्या छोड़ने की अनुमति न देने की संस्तुति की है।
सरकार की नजर अंतिम रिपोर्ट पर :
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही कह चुके हैं कि जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अब सरकार की नजर एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर है, जिसमें कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि एसआईटी की रिपोर्ट प्रारंभिक है और जांच अभी पूरी नहीं हुई है। किसी भी व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी अंतिम जांच रिपोर्ट और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही तय होगी।

